पीएम मोदी की अगुवाई में केंद्र सरकार देश को डिजिटल बनाने का बेशक दावा कर रही है। मगर संघ के अपने संगठनों को ही पीएम मोदी का आर्थिक मॉडल रास नहीं आ रहा है।
केंद्र सरकार पीएम मोदी के नेतृत्व में जब अपने शासन की तीसरी वर्षगांठ का जश्न मना रही होगी। तब संघ का एक संगठन भारतीय मजदूर संघ कानपुर में सरकार की आर्थिक नीतियों को कसौटी पर कसेगा।
यही नहीं देश-दुनिया के नामी आर्थिक चिंतक और विचारक यहां मंथन के बाद सरकार के सामने आर्थिक विकास का भावी रोडमैप पेश करेंगे।
भारतीय मजदूर संघ के राष्ट्रीय महासचिव बृजेश उपाध्याय ने अमर उजाला को बताया कि बीएमएस ने 22 से 24 मई के बीच यूपी के कानपुर में अपनी राष्ट्रीय अधिवेशन की बैठक बुलाई है। इस बैठक में मजदूर संघ से जुडे देशभर से 3500 से उपर मजदूर नेता उपस्थित रहेंगे।
बैठक के विषयों की जानकारी देते हुए उपाध्याय ने कहा कि उद्योगों में चौथी पीढी के तकनीक के उपयोग के दुष्परिणाम, पर्यावरण के नाम पर पूंजीपतियों की हो रही मनमानी और नए नियमों से व्यपार को होने वाले खतरों सहित तीन अहम मुददों पर चर्चा होगी। इस अधिवेशन में बीएमएस नेताओं के अलावा केंद्रीय श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय, पदमश्री सम्मानित अशोक भगत और आईएलओ निदेशक दून पाल भी उपस्थित रहेंगे।
रोबोट के इस्तेमाल से बढेगी बेरोजगारी
उद्योग में चौथे पीढी के तकनीक से बढने वाली मुसीबत से आगाह करते हुए मजदूर संघ के राष्ट्रीय महासचिव ने कहा कि उद्योग क्षेत्र में रोबोट के प्रचलन से बेरोजगारी संकट बढेगा। उन्होंने कहा कि देश में वैसे ही बेरोजगारी की समस्या मुह बाए खडी है।
उपर से यदि रोबोट का इस्तेमाल उद्योग क्षेत्र में होने लगेगा तो बेरोजगारी और बढेगी। बृजेश उपाध्याय के अनुसार वर्ष 2030 तक उद्योग में मानव कार्यों की जगह रोबोट ले लेंगे। इससे बेरोजगारी बढेगी, सरकार को अभी से इसका निदान सोचना चाहिए।
90 प्रतिशत पर्यावरण के मामले गलत
बीएमएस महासचिव का कहना है कि पर्यावरण के नाम पर पूजीपतियों की मनमानी चल रही है। ऐसा नहीं है कि प्रकृति के सामने पर्यावरण का संकट नहीं है। मगर उद्योग जगत में पर्यावरण से जुडे 90 प्रतिशत मामले गलत हैं।
पर्यावरण के नाम पर पुराने उद्योग को बंद करने और नए उद्योग खोलने से समाधान नहीं होगा। बल्कि इससे बैंको का भी नुकसान है।
नए नियमों से व्यापारियों को खतरा
व्यापार के लिए जो रोजाना नए-नए नियम बनाए जा रहे हैं उससे व्यापारियों को ही खतरा है। असंगठीत क्षेत्र में 93 प्रतिशत मजदूर हैं। मगर किसी भी सरकार ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।