सरकार सोमवार को लोकसभा में कहा कि सितंबर 2020 में भारत को रक्षा क्षेत्र में लगभग 494 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्राप्त हुआ है। सरकार के मुताबिक, इससे संबंधित नीति में संशोधन के बाद ये एफडीआई प्राप्त हुआ है।
पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने घरेलू रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए कई उपाय किए हैं। 2020 में सरकार ने रक्षा क्षेत्र में स्वचालित मार्ग से एफडीआई की सीमा को 49 प्रतिशत से बढ़ाकर 74 प्रतिशत और सरकारी मार्ग से 100 प्रतिशत तक बढ़ाने की घोषणा की थी।
रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने बताया कि संशोधित नीति पर अधिसूचना जारी होने के बाद से रक्षा क्षेत्र में कुल एफडीआई प्रवाह लगभग 494 करोड़ रुपये था।
संसद में एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने बताया, सरकार ने 17 सितंबर, 2020 के प्रेस नोट नंबर 4 (2020 सीरीज) के द्वारा स्वचालित मार्ग के जरिए 74 प्रतिशत तक और सरकारी मार्ग के जरिए 100 प्रतिशत तक उस स्थिति में एफडीआई को उदारीकृत करके अनुमति प्रदान की है जहां आधुनिक प्रौद्योगिकी की पहुंच बनने की संभावना है।
2022 तक कुल 494 करोड़ रुपये का एफडीआई प्राप्त हुआ
भट्ट ने कहा कि संशोधित एफडीआई नीति की अधिसूचना के बाद से, मई 2022 तक प्राप्त कुल एफडीआई राशि लगभग 494 करोड़ रुपये है। उन्होंने कहा कि रक्षा उत्पादन विभाग (डीडीपी) ने निवेश को आकर्षित करने के लिए कई नीतिगत सुधार किए हैं।
भारत विश्व स्तर पर हथियारों के सबसे बड़े आयातकों में से एक है और सरकार आयात पर निर्भरता कम करना चाहती है तथा उसने घरेलू रक्षा निर्माण को बढ़ावा देने का फैसला किया है।
358 निजी कंपनियों को जारी किए 584 रक्षा लाइसेंस
भट्ट ने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि सरकार ने विनिर्माण इकाइयों की स्थापना के लिए 358 निजी कंपनियों को 584 रक्षा लाइसेंस जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 358 निजी कंपनियों को विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने की खातिर 584 रक्षा लाइसेंस जारी किए हैं। इनमें हथियार निर्माण के लिए 107 लाइसेंस शामिल हैं।