राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे
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राजस्थान सरकार के विरोध में बृहस्पतिवार को जयपुर का पूर्व राजघराना पहली बार सड़क पर उतरा। राजपूत समाज के समर्थन के साथ रैली निकालकर परोक्ष रूप से पूर्व राजघराने के प्रमुख पद्मनाभ की भी लॉन्चिंग कर दी। पूर्व राजघराने की वरिष्ठ सदस्य पद्मिनी देवी ने रैली के दौरान कहा कि अब सिटी पैलेस में महीने में दो दिन जन सुनवाई भी शुरू की जाएगी, जिसमें जयपुर की जनता पहुंचकर अपनी समस्या बता सकती हैं। करीब एक सप्ताह पूर्व जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने राजमहल पैलेस होटल के बाहर जमीन पर कब्जे की कार्यवाही की थी। एक दिन पूर्व पद्मिनी देवी ने खुद को राजमाता बताते हुए जनता से समर्थन मांगा था और जेडीए की इस कार्यवाही को अन्याय व दमन करार देते हुए रैली में साथ देने की अपील भी की थी।
पूर्व राजघराना प्राइम लोकेशन पर स्थित करीब 500 करोड़ रुपये की इस जमीन पर अपना दावा पेश कर रहा है। माना गया कि जेडीए की कार्यवाही बिना शीर्ष इशारे के नहीं हो सकती। इस रैली में बीजेपी विधायक और पूर्व राज परिवार सदस्य दिया कुमारी शामिल नहीं हुईं। जेडीए ने राजमहल पैलेस के द्वारों को सील किया हुआ है। कार्यवाही के दौरान जेडीए के आयुक्त शिखर अग्रवाल और दिया कुमारी में जमकर कहासुनी हुई थी। घटना के बाद राज सम्मान एवं धरोहर बचाओ संघर्ष समिति का गठन किया गया था। राजघराने की मांग है कि आयुक्त को बर्खास्त किया जाए और राजमहल पैलेस का मुख्य द्वार खोला जाए।
पिंक सिटी में स्थित त्रिपोलिया बाजार से राजमहल पैलेस तक निकाली गई रैली में करीब पांच हजार लोग शामिल हुए। रैली के दौरान पद्मिनी देवी तथा पद्मनाभ जीप में बैठे थे। पद्मनाभ का हाल ही सामंती प्रथा के साथ राज्याभिषेक किया गया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि वे राजनीति में आना चाहते हैं। रैली में प्रदेश के लगभग सभी हिस्सों से राजपूत समाज के लोग पहुंचे थे। रैली में महिलाएं व बच्चे भी शामिल हुए। रैली को देखते हुए सरकार ने भारी पुलिस बल तैनात किया हुआ था। पद्मिनी देवी ने जीप से लोगों से कहा कि हमारे खिलाफ कार्यवाही के जरिए हमें नीचा दिखाया गया। ये लड़ाई सिर्फ हमारी नहीं, सबके लिए है। आज हमारे साथ हुआ है, कल आपके साथ भी होगा।