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Puri: जगन्नाथ मंदिर में विदेशियों के प्रवेश के समर्थन में राज्यपाल गणेशीलाल, BJP-कांग्रेस ने याद दिलाई परंपरा

Sun, 15 Jan 2023 05:08 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भुवनेश्वर

सार

परंपरा के अनुसार, केवल हिंदुओं को पुरी मंदिर के अंदर भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने की अनुमति है। ऐसे में राज्यपाल के इस बयान से राज्य में एक नया बवाल खड़ा हो गया है। पुरी मंदिर के सेवादारों ने राज्यपाल के प्रस्ताव का विरोध किया है।
 
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जगन्नाथ पुरी मंदिर - फोटो : Social media
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विस्तार
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अपने बयानों के कारण हमेशा चर्चा में रहने वाले ओडिशा के राज्यपाल प्रोफेसर गणेशीलाल एक फिर सुर्खियों में हैं। दरअसल, इस बार राज्यपाल गणेशी लाल ने पुरी के जगन्नाथ मंदिर में विदेशियों को प्रवेश की अनुमति देने का सुझाव दिया है। जिससे विवाद खड़ा हो गया है। कई परंपरावादी और राजनीतिक नेताओं ने इस प्रस्ताव की आलोचना की है और उनके प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। 

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ऐसा क्या सुझाव दिया था राज्यपाल ने जो अब हो रहा विरोध
दरअसल, बीते गुरुवार को भुवनेश्वर के उत्कल विश्वविद्यालय में ओडिशा विजन 2036 कॉन्क्लेव के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने मंदिर में विदेशियों के प्रवेश का समर्थन किया था। उन्होंने कहा था कि यदि कोई विदेशी पुरी गजपति, पुरी शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती और सेवकों से मिल सकता है तो उसे भगवान जगन्नाथ की पूजा करने का मौका मिलना चाहिए।

अपने संबोधन में राज्यपाल गणेशी लाल ने आगे कहा था कि यह मेरी निजी राय है। कोई इसकी सराहना करे या न करे, लेकिन मैं सेवकों, पुरी शंकराचार्य और राजा गजपति से मेरे प्रस्ताव पर विचार करने का अनुरोध करता हूं।
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क्या है मंदिर में दर्शन की परंपरा
बता दें कि पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर 12वीं सदी के चार धामों में से एक है। इस मंदिर में गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है। मंदिर के गेट पर एक साइन बोर्ड में इसे साफ तौर पर लिखा गया है। साइन बोर्ड में लिखा है कि "केवल हिंदुओं को अनुमति है।" परंपरा के अनुसार, केवल हिंदुओं को पुरी मंदिर के अंदर भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने की अनुमति है। ऐसे में राज्यपाल के इस बयान से राज्य में एक नया बवाल खड़ा हो गया है। पुरी मंदिर के सेवादारों ने राज्यपाल के प्रस्ताव का विरोध किया है।

अब भाजपा-कांग्रेस सभी कर रहे राज्यपाल गणेशीलाल का विरोध
भाजपा नेता और पूर्व मंत्री बिजय महापात्रा ने उनके बयान की निंदा करते हुए कहा कि मंदिर की सदियों पुरानी परंपराओं से छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि हर साल रथ यात्रा के अवसर पर जब भगवान मंदिर से बाहर निकलते हैं, तो गैर-हिंदुओं सहित हर कोई, सहोदर देवताओं- भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर सकता है। ऐसे मामलों में कोई विवाद नहीं होना चाहिए। पुरी के कई लोगों ने भाजपा नेता के इस बयान का समर्थन किया है। 

कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक सुरेश राउत्रय ने भी कहा कि धार्मिक प्रथाओं में हस्तक्षेप से बचना चाहिए। वहीं, शिवसेना के संयोजक प्रियदर्शन पटनायक ने कहा कि हमारे मन में राज्यपाल के लिए बहुत सम्मान है। लेकिन उनका प्रस्ताव अस्वीकार्य है। उन्हें विश्वास और धर्म से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर टिप्पणी करने से बचना चाहिए।

नेताओं के साथ ही पुरी स्थित एक सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन श्री जगन्नाथ सेना ने भी इसका विरोध किया है। शनिवार को इस संगठन ने मंदिरों के शहर में पुरी में राज्यपाल की टिप्पणी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था।

एसजेटीए ने नहीं दी अब तक प्रतिक्रिया
वहीं, इस पूरे विवाद के संदर्भ में श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) ने अभी तक इस मामले पर एक बयान जारी नहीं किया है। बता दें कि एसजेटीए एक सरकारी निकाय है, जो मंदिर के रखरखाव और उसके संचालन की देखरेख करता है। 

ओडिशा के पूर्व मंत्री दामोदर राउत ने किया राज्यपाल के बयान का समर्थन
इस बीच, ओडिशा के पूर्व मंत्री दामोदर राउत लाल के सुझाव के समर्थन में सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि किसी के द्वारा देवताओं के दर्शन पर कोई प्रतिबंध नहीं होना चाहिए। राउत ने कहा कि भगवान जगन्नाथ "ब्रह्मांड के स्वामी" हैं। भगवान जगन्नाथ को सभी धर्मों का मूल माना जाता है। गुरु नानक देवता के दर्शन के लिए यहां आए थे। इसी तरह, श्री चैतन्य ने 1508 में पुरी आए थे और वापसी में उन्होंने वैष्णववाद का प्रचार किया था। 

 राजभवन से आई प्रतिक्रिया
वहीं, जब इस पूरे मुद्दे पर रविवार को राज्यपाल गणेशी लाल का रुख जानने का प्रयास किया गया तो जानकारी हुई कि वे मध्य प्रदेश के उज्जैनी के लिए रवाना हो गए हैं। हालांकि राजभवन के एक प्रवक्ता से संपर्क किए जाने पर उन्होंने कहा कि राज्यपाल गणेशीलाल ने सिर्फ एक सुझाव दिया है। ये इससे आगे कुछ नहीं है। प्रवक्ता ने यह भी कहा कि उन्होंने कोई आदेश नहीं दिया है। 

इससे पहले भगवान श्रीकृष्ण से की थी पीएम मोदी की तुलना 
इससे पहले, ओडिशा के राज्यपाल प्रोफेसर गणेशीलाल ने हरियाणा में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना भगवान श्रीकृष्ण से क थी। उन्होंने कहा था कि पीएम मोदी ने देश रूपी पर्वत को उठा रखा है। आप बस नीचे से खूंटा लगा देना। उन्होंने कहा कि विवेकानंद का बचपन का नाम नरेंद्र था। उन्होंने भी देश का नाम रौशन किया था और अब एक अपने पीएम नरेंद्र भी देश का नाम विश्व में फैला रहे हैं।

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