भारत के प्रधान न्यायाधीश के आदेश के तहत अधिसूचित किया गया यह रोस्टर सिस्टम पांच फरवरी से प्रभावी होगा। रोस्टर सिस्टम को सार्वजनिक करना इस मायने में अहम है कि गत 12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठतम जज न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर, न्यायमूर्ति रंजन गोगई, न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति कूरियन जोसफ ने प्रेस कांफ्रेंस कर संवेदनशील जनहित याचिकाओं और महत्वपूर्ण मामलों को जूनियर जजों के पास भेजने पर आपत्ति जताई थी।
नई जनहित याचिकाओं पर चीफ जस्टिस करेंगे सुनवाई
अधिसूचना में चीफ जस्टिस और 11 अन्य जजों की अध्यक्षता वाली पीठ के पास मामलों का बंटवारा किया गया है। चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ नई जनहित याचिकाओं, चुनाव मसलों, न्यायालय की अवमानना, सामाजिक न्याय आदि मसलों पर सुनवाई करेगी। वहीं दूसरे वरिष्ठतम जज न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर की अध्यक्षता वाली पीठ के पास आपराधिक, श्रम, कर, भूमि अधिग्रहण, न्यायिक अधिकारियों से जुड़े मसले, समुद्री कानून आदि के मामले आएंगे।
नया रोस्टर सिस्टम पांच फरवरी से अगले आदेश तक के लिए होगा प्रभावी
तीसरे वरिष्ठतम जज न्यायमूर्ति रंजन गोगई की अध्यक्षता वाली पीठ के पास न्यायालय की अवमानना, पर्सनल लॉ, एक्साइज आदि के मामले आएंगे। चौथे वरिष्ठतम जज न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष वन संरक्षण, भूमि अधिग्रहण, जेल, पेड़, धार्मिक आदि मामले आएंगे। पांचवे वरिष्ठतम जज न्यायमूर्ति कूरियन जोसफ केपास श्रम, फैमिली लॉ, पर्सनल लॉ, धार्मिक कानून आदि केमसले आएंगे। वहीं न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा एवं न्यायमूर्ति रोहिंग्टन एफ नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठों के समक्ष इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेज केरजिस्ट्रेशन से संबंधित मामले आएंगे।