ED: रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ किस मामले में ईडी ने दाखिल की चार्जशीट, संपत्ति जब्त करने का क्या मतलब, आगे क्या?
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sat, 19 Jul 2025 07:17 AM IST
सार
रॉबर्ट वाड्रा से जुड़ा यह पूरा मामला क्या है? ईडी ने इस मामले में वाड्रा पर क्या आरोप लगाए हैं? ईडी की कार्रवाई में अब आगे क्या हो सकता है? संपत्तियां जब्त करने का मतलब क्या है? आइये जानते हैं...
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सांसद प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ जमीन के लेनदेन में कथित धनशोधन से जुड़े एक मामले में चार्जशीट दायर की है। केंद्रीय एजेंसी इस मामले में वाड्रा की कंपनी स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी की 37.64 करोड़ रुपये की 43 अचल संपत्तियां कुर्क कर लीं हैं। बताया गया है कि ईडी ने मामले में जांच पूरी करने के बाद दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में शिकायत की थी। इस मामले में वाड्रा की स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी प्रा. लि. के अलावा 11 और लोगों को आरोपी बनाया गया था। शुक्रवार को अदालत ने मामले में अपने रिकॉर्ड कीपर (अहलमद) से रिपोर्ट मांगी और मामले को दस्तावेज के सत्यापन के लिए सूचीबद्ध कर लिया।
ईडी की तरफ से इस मामले में चार्जशीट दाखिल होने और संपत्तियों को अटैच किए जाने की खबरों के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। राहुल ने कहा कि केंद्र रॉबर्ट वाड्रा को परेशान कर रहा है। राहुल ने कहा कि अंत में जीत सच्चाई की होगी।
ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर रॉबर्ट वाड्रा से जुड़ा यह पूरा मामला क्या है? ईडी ने इस मामले में वाड्रा पर क्या आरोप लगाए हैं? ईडी की कार्रवाई में अब आगे क्या हो सकता है? संपत्तियां जब्त करने का मतलब क्या है? आइये जानते हैं...
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रॉबर्ट वाड्रा
- फोटो : पीटीआई
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सांसद प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ जमीन के लेनदेन में कथित धनशोधन से जुड़े एक मामले में चार्जशीट दायर की है। केंद्रीय एजेंसी इस मामले में वाड्रा की कंपनी स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी की 37.64 करोड़ रुपये की 43 अचल संपत्तियां कुर्क कर लीं हैं। बताया गया है कि ईडी ने मामले में जांच पूरी करने के बाद दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में शिकायत की थी। इस मामले में वाड्रा की स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी प्रा. लि. के अलावा 11 और लोगों को आरोपी बनाया गया था। शुक्रवार को अदालत ने मामले में अपने रिकॉर्ड कीपर (अहलमद) से रिपोर्ट मांगी और मामले को दस्तावेज के सत्यापन के लिए सूचीबद्ध कर लिया।
ईडी की तरफ से इस मामले में चार्जशीट दाखिल होने और संपत्तियों को अटैच किए जाने की खबरों के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। राहुल ने कहा कि केंद्र रॉबर्ट वाड्रा को परेशान कर रहा है। राहुल ने कहा कि अंत में जीत सच्चाई की होगी।
ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर रॉबर्ट वाड्रा से जुड़ा यह पूरा मामला क्या है? ईडी ने इस मामले में वाड्रा पर क्या आरोप लगाए हैं? ईडी की कार्रवाई में अब आगे क्या हो सकता है? संपत्तियां जब्त करने का मतलब क्या है? आइये जानते हैं...
आरोप है कि मानेसर-शिकोहपुर में मौजूद जमीन के ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से वाड्रा की कंपनी को बेचे जाने के एक दिन बाद ही इसका म्यूटेशन कर दिया गया। इतना ही नहीं, इसके अगले दिन जमीन को वाड्रा की कंपनी को स्थानांतरित भी कर दिया गया। जबकि आमतौर पर इस प्रक्रिया में तीन महीने का समय लगता है।
हरियाणा की तत्कालीन हुड्डा सरकार पर क्या आरोप?
हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकार ने इस जमीन में से 2.70 एकड़ जमीन को कमर्शियल कॉलोनी के तौर पर डेवलप करने की इजाजत देते हुए रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी को इसका लाइसेंस दिया था। आवासीय परियोजना का लाइसेंस मिलने के बाद जमीन की कीमत बढ़ गई। जून 2008 में वाड्रा से जुड़ी कंपनी ने ये जमीन डीएलएफ को 58 करोड़ में बेच दी। यानी कुछ ही महीनों जमीन की कीमत 773 प्रतिशत तक बढ़ गई। आगे चलकर हुड्डा सरकार ने आवासीय परियोजना का लाइसेंस डीएलएफ को ट्रांसफर कर दिया।
मामले का खुलासा कैसे हुआ?
अक्तूबर 2012 में जब आईएएस अशोक खेमका (अब रिटायर्ड) हरियाणा में भूमि पंजीकरण और रिकॉर्ड विभाग में इंस्पेक्टर जनरल के पद पर तैनात हुए तो उन्होंने वाड्रा की जमीनों के समझौतों को खंगालना शुरू किया। इसके ठीक बाद मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा के आदेश पर उनका ट्रांसफर कर दिया गया। हालांकि, खेमका ने अपनी जांच पूरी कर ली और 15 अक्तूबर को जमीन का म्यूटेशन रद्द कर दिया।
हालांकि इस घटनाक्रम के बाद विवाद इस कदर बढ़ गया कि हरियाणा सरकार को तीन वरिष्ठ आईएएस अफसरों के नेतृत्व में मामले की जांच के लिए पैनल गठित करना पड़ा। हालांकि, हुड्डा सरकार ने वाड्रा और डीएलएफ दोनों को क्लीन चिट दे दी। साथ ही खेमका पर अधिकार से बाहर जाकर कार्रवाई करने का आरोप लगा दिया।
2014 में भाजपा के सत्ता में आने के बाद मनोहर लाल खट्टर सरकार ने एक रिटायर्ड जज के नेतृत्व में जांच आयोग का गठन किया। 31 अगस्त 2016 को इस आयोग ने 182 पन्ने की रिपोर्ट सरकार को सौंपी। हालांकि, तब इस समझौते को लेकर हुए खुलासों को सार्वजनिक नहीं किया गया। उसी साल नवंबर में हुड्डा सरकार ने जांच आयोग के गठन को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी। सरकार ने इसके बाद अदालत में आश्वासन दिया कि रिपोर्ट को प्रकाशित नहीं किया जाएगा।
हरियाणा पुलिस ने 2018 में इस सौदे से जुड़े मामले में केस दर्ज किया। इस मामले में हुड्डा और वाड्रा के अलावा कुछ और लोगों के नाम शामिल किए गए। बाद में 1 सितंबर 2018 को ईडी ने इस मामले को अपने हाथ में ले लिया। आरोप लगा कि वाड्रा ने झूठी घोषणाओं के आधार पर जमीन की खरीद-बिक्री की। हालांकि, रॉबर्ट वाड्रा और भूपेंद्र हुड्डा दोनों ही मामले में किसी भी तरह की गड़बड़ी के आरोपों से इनकार करते रहे हैं और इसे राजनीतिक एजेंडा करार देते रहे हैं।
संपत्ति अटैच किए जाने के क्या मायने?
धनशोधन रोधी अधिनियम (पीएमएलए) के धारा 5 के मुताबिक, ईडी के निदेशक या कोई अन्य अधिकारी (उपनिदेशक पद या इससे ऊपर) किसी संदिग्ध की उस संपत्ति को अटैच करने का आदेश जारी कर सकता है, जिसे धनशोधन से जुड़े अपराध के जरिए हासिल किए जाने का शक हो। संपत्ति को कुर्क करने का यह आदेश निदेशक तब जारी कर सकता है, जब उन्हें लग रहा हो कि आपराधिक गतिविधियों के जरिए जुटाई गई संपत्ति को छिपाया, स्थानांतरित किया या बेचा जा सकता है। इस तरह की गतिविधियों से अपराध के जरिए जुटाई संपत्ति के खिलाफ कार्रवाई में रोड़ा आ सकता है।
नियम के मुताबिक, अगर ईडी ने किसी संपत्ति को कुर्क कर लिया है तो यह आदेश 180 दिन तक वैध रहता है। अगर ईडी की इस कार्रवाई के पीछे के कारणों की पुष्टि एजेंसी द्वारा नियुक्त न्यायिक प्राधिकरण की तरफ से नहीं होती तो यह संपत्ति अपने आप कुर्की से मुक्त हो जाती है। यानी आरोपी व्यक्ति इस संपत्ति पर अपना अधिकार बरकरार रखता है। लेकिन अगर न्यायिक प्राधिकरण ईडी की कार्रवाई को वैध ठहराता है तो संपत्ति पर कब्जा ईडी के पास ही रहता है। हालांकि, मालिकाना हक ईडी के पास नहीं जाता। गौर करने वाला तथ्य यह है कि आमतौर पर अगर ईडी किसी आरोपी की संपत्ति अटैच करती है तो ईडी द्वारा नियुक्त न्यायिक प्राधिकरण कार्रवाई को मंजूरी दे ही देता है।
आरोपी अपनी संपत्ति को लेकर क्या-क्या कर सकता है?
हालांकि, अगर आरोपी अदालतों से अपनी संपत्ति को छुड़ाने में राहत नहीं पाता तो ईडी उसे परिसर खाली करने का आदेश जारी कर देती है और उसके सामान को भी दूसरी जगह शिफ्ट करने की चेतावनी दी जाती है। ईडी की तरफ से आरोपी के दोषी साबित किए जाने की स्थिति में अदालत कुर्क की गई संपत्ति के जब्ती के आदेश दे सकती है।