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CAG: द्वारका एक्सप्रेसवे परियोजना में 12 फीसदी की हुई बचत, सड़क मंत्रालय ने कैग की रिपोर्ट को कहा गलत

Wed, 16 Aug 2023 08:30 PM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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द्वारका एक्सप्रेस वे - फोटो : अमर उजाला
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द्वारका एक्सप्रेसवे पर भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) ने उसकी लागत को लेकर एक रिपोर्ट जारी की थी जिसमें सड़क निर्माण में अनुमान से ज्यादा लागत की बात कही गई थी। लेकिन अब सड़क मंत्रालय ने इस पर कहा कि द्वारका एक्सप्रेसवे के अनुबंध देने में अनुमान के मुकाबले निर्माण लागत में 12 फीसदी से अधिक की बचत की है। बयान में कहा कि कैग की रिपोर्ट में लागत अत्यधिक बताई गई है जो कि गलत है, क्योंकि ऑडिटर ने वास्तविक लागत को ध्यान में नहीं रखा।

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कैग ने सड़क लागत तय राशि से ज्यादा बताई थी
कैग ने अपनी एक रिपोर्ट जारी कर कहा था कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण बोर्ड ने द्वारका एक्सप्रेसवे को प्रति किलोमीटर 250 करोड़ रुपये की सिविल लागत के साथ इसकी मंजूरी दी थी। जबकि संसद की आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने प्रति किलोमीटर लागत 18 करोड़ रुपये के हिसाब से इसे बनाने की स्वीकृति दी थी, यानी इस प्रोजेक्ट के तहत निर्माण कार्य तय राशि से 14 गुना ज्यादा कीमत की गई।

मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि द्वारका एक्सप्रेसवे के सभी चार पैकेजों को 206.39 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर की औसत नागरिक लागत पर निविदा के लिए रखा गया था, लेकिन अंततः अनुबंध 181.94 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर की कम दर पर दिए गए। उन्होंने कहा कि एक्सप्रेसवे के चार पैकेजों की औसत सिविल निर्माण लागत अनुमान से 12 फीसदी कम थी।
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कैग ने अपनी रिपोर्ट में इन चीजों को शामिल नहीं किया
सूत्रों ने यह भी बताया कि सीएजी ने राष्ट्रीय कॉरिडोर दक्षता कार्यक्रम के तहत 91,000 करोड़ रुपये के निर्माण की कुल लागत को विकास के तहत परियोजना की पूरी लंबाई 5,000 किलोमीटर के साथ विभाजित किया है। उन्होंने कहा कि कैग ने स्वयं नोट किया है कि 18.2 रुपये प्रति किलोमीटर की निर्माण लागत में फ्लाईओवर, रिंग रोड आदि के लागत मानदंड शामिल नहीं हैं।  उनका विचार है कि विचाराधीन एक्सप्रेसवे में ऊंची सड़कें, अंडरपास, सुरंगें और अन्य घटक हैं जो परियोजना का हिस्सा नहीं थे।

देश की पहली आठ लेन वाली एलिवेटेड सड़क
मंत्रालय के अनुसार, एक्सप्रेसवे चार स्तरीय इंटरचेंज सुविधा के साथ देश की पहली आठ लेन वाली एलिवेटेड सड़क है। इसे दिल्ली हवाई अड्डे से जोड़ने के लिए आठ लेन वाली 3.6 किलोमीटर लंबी सुरंग और छह लेन वाली 2.4 किलोमीटर लंबी सुरंग है। इसके अलावा, इसमें प्रमुख इंटरचेंजों पर ऊंची सर्विस सड़कें हैं। मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि वे इस मुद्दे पर अपनी टिप्पणियों से कैग को अवगत कराने का प्रयास करेंगे और जब भी यह मामला लोक लेखा समिति में चर्चा के लिए आएगा, तो अपने विचार प्रस्तुत करेंगे।

द्वारका एक्सप्रेसवे इन सुविधाओं से लैस
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी देश के पहले एलिवेटेड हाईवे द्वारका एक्सप्रेसवे का निरीक्षण करने के लिए गुरुग्राम पहुंचे थे। इस प्रोजेक्ट के निर्माण पर करीब नौ हजार करोड़ रुपये की अनुमानित लागत है। इस एक्सप्रेसवे पर यातायात की सुगमता और सफर करने वालों की सुरक्षा के लिए आईटीएस, एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम, टोल मैनेजमेंट सिस्टम, सीसीटीवी कैमरा, सर्विलांस आदि अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल होगा।

केजरीवाल ने साधा निशाना
आप संयोजक व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सीएजी के हवाले से प्रकाशित एक रिपोर्ट के आधार पर कहा कि मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार के 75 वर्ष के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। वहीं, आप के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने कहा कि द्वारका एक्सप्रेसवे 18 करोड़ रुपये प्रति किमी की लागत से बनना था, लेकिन मोदी सरकार ने इसकी लागत बढ़ाकर 250 करोड़ रुपये प्रति किमी कर दी।

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