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हम दोनों मोर्चों पर जंग समेत किसी भी संघर्ष के लिए तैयार, हमारी क्षमताओं ने विरोधियों को चौंकाया: वायुसेना प्रमुख

Mon, 05 Oct 2020 01:27 PM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया - फोटो : ANI
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लद्दाख सीमा पर चीन के साथ जारी तनाव के बीच वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया का बड़ा बयान सामने आया है। वायुसेना प्रमुख ने कहा है कि भारत दोनों फ्रंट पर युद्ध करने के लिए तैयार है। वायुसेना प्रमुख के इस बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि चीन और पाकिस्तान की ओर से तनाव की स्थिति को लेकर भारत पूरी तरह मुस्तैद है। 

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वायुसेना प्रमुख ने कहा, हमारे पड़ोस में और आस-पास के क्षेत्रों में उभरते हुए खतरे के परिदृश्य में युद्ध लड़ने की एक मजबूत क्षमता होने की आवश्यकता है। मैं आपके साथ विश्वास के साथ साझा कर सकता हूं कि ऑपरेशनली, हम सर्वश्रेष्ठ हैं।  

 
राफेल के आने से वायुसेना की ताकत बढ़ी
आरकेएस भदौरिया ने कहा, हमने राफेल, चिनूक, अपाचे का परिचालन किया है और उन्हें रिकॉर्ड समय में संचालन की हमारी अवधारणा के साथ एकीकृत किया है। अगले 3 साल में हम राफेल और एलसीए मार्क 1 स्क्वाड्रन को पूरी ताकत के साथ चालू करेंगे। साथ ही अतिरिक्त मिग-29 का ऑर्डर दिया जाएगा, जो वर्तमान बेड़े में शामिल होगा। 
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उन्होंने कहा, राफेल के आने से वायुसेना की ताकत बढ़ी है और ये हमें आगे तक मजबूत करेगा। इसकी मदद से हम जल्दी और ठोस कार्रवाई कर पाएंगे। अगले पांच साल में तेजस, कॉम्बैट हेलिकॉप्टर, ट्रेनर एयरक्राफ्ट समेत कई अन्य ताकतवर हथियार वायुसेना की ताकत बनेंगे। 

डीआरडीओ और एचएएल के शुक्रगुजार
वायुसेना प्रमुख ने कहा, हमने लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट पर अपना भरोसा रखा है और अगले 5 वर्षों में हम 83 एलसीए मार्क 1 ए को वायुसेना में शामिल करेंगे। हम डीआरडीओ और एचएएल के स्वदेशी उत्पादन के प्रयास के समर्थक हैं और आपको जल्द ही इस क्षेत्र में एचटीटी-40 और लाइट कॉम्बैट हेलीकाप्टर के लिए अनुबंध देखने को मिलेगा। 

दोनों फ्रंट पर युद्ध के लिए तैयार है भारत
आरकेएस भदौरिया ने कहा कि वायुसेना भारत और चीन के साथ दोनों फ्रंट पर एक साथ जंग के लिए पूरी तरह से तैयार है। उन्होंने कहा कि चीन की हरकत के बारे में मई में ही पता लग गया था, तभी से ही भारतीय सेना और वायुसेना की ओर से कदम उठाए गए। 

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उन्होंने कहा, भारतीय वायुसेना तेज गति से बदल रही है। देश के सामने फिलहाल जो चुनौतियां हैं, वे जटिल हैं। उभरती चुनौतियों ने हमें भारतीय वायुसेना की क्षमताओं को मजबूत करने के लिए अधिकृत किया है। हमारी क्षमताओं ने हमारे विरोधियों को चौंकाया है। 

चीन की चाल को नाकाम करने के लिए ईस्टर्न फ्रंट पर वायुसेना मुस्तैद 
वायुसेना प्रमुख ने कहा, ईस्टर्न फ्रंट पर वायुसेना मुस्तैद है और ऐसा कोई सवाल ही नहीं होता कि चीन हमसे किसी भी तरह से बेहतर स्थिति में हो। उन्होंने कहा कि वक्त के साथ वायुसेना ने बहुत तेजी से बदलाव किए हैं और अब काफी हद तक कमियों को दूर कर लिया गया है।

विरोधी को कमतर कर नहीं आंक रहे
सीमा गतिरोध को लेकर चीन की तैयारी पर वायुसेना प्रमुख ने कहा, विरोधी को कमतर आंकने का कोई सवाल ही नहीं है। हमनें सभी प्रासंगिक इलाकों में तैनाती की है, लद्दाख एक छोटा हिस्सा है। आश्वस्त रहिए, किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए हम मजबूती से तैनात हैं। 

जब चीन के साथ गतिरोध के दौरान लद्दाख में वायुसेना की तैनाती के बारे में पूछा गया तो वायुसेना प्रमुख ने कहा, हमने इस क्षेत्र में पहुंचने के लिए सभी प्रासंगिक परिचालन स्थानों पर तैनाती की है। निश्चिंत रहें, हमने किसी भी आकस्मिकता को संभालने के लिए दृढ़ता से तैनाती की है। 

 

83 एलसीए तेजस, 114 एमआरएफए की खरीद के भी दिए संकेत

वायुसेना प्रमुख ने साथ ही 83 हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) तेजस (मार्क 1ए), 114 एमआरएफए विमान की खरीद के भी संकेत दिए। राफेल खरीद से जुड़े सवाल के जवाब में वायुसेना प्रमुख ने लड़ाकू विमानों की और खरीद की बात को नकारे बिना कहा, यह वक्त की जरूरत पर तय होगा। अभी इसका जवाब देना जटिल है। राफेल के आने से वायुसेना की ताकत और अधिक बढ़ गई है। ऐसे में जरूरत पड़ने पर इसकी खरीद से पीछे नहीं हटा जाएगा। उन्होंने कहा, हम भविष्य में वायुसेना की ताकत और बढ़ाने का प्रयास करेंगे। हमारे पास कई विकल्प हैं और उनमें जो सबसे जरूरी होगा उसका चयन होगा और खरीद की जाएगी। उन्होंने कहा, विमानों की खरीद को लेकर चर्चा जारी है। भदौरिया ने कहा, राफेल विमानों की पहली खेप से हमारी युद्धक क्षमताएं बहुत अधिक बढ़ी हैं। हम हवा में पहले से भी मजबूत हुए हैं और दुश्मन की कैसी भी हरकत का पहले से अधिक तेजी और ताकत के साथ जवाब देने में सक्षम हुए हैं।  

 

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सीमा पर जारी है गतिरोध, 12 अक्तूबर को होगी सैन्य वार्ता

भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में पांच महीने से गतिरोध बना हुआ है जिससे दोनों के रिश्तों में महत्वपूर्ण रूप से तनाव आया है। विवाद के हल के लिए दोनों पक्षों ने कई दौर की कूटनीतिक और सैन्य वार्ता की हैं। हालांकि गतिरोध को दूर करने में कोई कामयाबी नहीं मिली।

दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच 12 अक्तूबर को एक और दौर की बातचीत होनी है जिसका एजेंडा खास तौर पर विवाद वाले बिंदुओं से सैनिकों की वापसी की रूपरेखा तय करना है। किसी भी चुनौती से निपटने के लिए भारत ने पहले ही ऊंचाई वाले इस क्षेत्र में हजारों सैनिकों और सैन्य साजो-सामान की तैनाती की है।

भारतीय वायुसेना ने भी पूर्वी लद्दाख और वास्तविक नियंत्रण रेखा से लगे अन्य स्थानों पर सुखोई 30 एमकेआई, जगुआर और मिराज 2000 जैसे अपनी अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमानों को पहले ही तैनात कर रखा है। हाल में वायुसेना के बड़े में शामिल किए गए पांच राफेल लड़ाकू विमान भी पूर्वी लद्दाख में नियमित रूप से उड़ान भर रहे हैं।

वायुसेना रात में भी पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में युद्धक हवाई गश्त कर रही है जिससे चीन को यह संदेश दिया जा सके कि वह इस पहाड़ी क्षेत्र में किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है।

दोनों देशों के बीच 21 सितंबर को हुई आखिरी सैन्य वार्ता के दौरान दोनों सेनाओं ने सीमा पर और सैनिकों को नहीं भेजने, जमीनी स्तर पर एकपक्षीय तौर पर स्थिति को बदलने से बचने और मामले को और जटिल बनाने वाले किसी भी कदम से बचने जैसे उपायों की घोषणा की थी।
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