अमरनाथ यात्रा शुरू होने के बाद सुरक्षा बलों की चुनौतियां और बढ़ गईं हैं। सुरक्षा एजेंसियों को इनपुट मिले हैं कि आतंकी संगठनों में वर्चस्व की जंग के कारण हमले बढ़ सकते हैं। आत्मसमर्पण कर चुके और पीओके से लौटे पूर्व आतंकियों में से कुछ फिर सक्रिय हो गए हैं।
लश्करे-ए-तइबा और हिज्बुल मुजाहिदीन ऐसे पूर्व आतंकियों के समूह का इस्तेमाल कर रहा है। हिज्बुल मुजाहिदीन के कमांडर की धमकी के तुरंत बाद से ही लश्कर-ए-तइबा ने सुरक्षा बलों पर हमले बढ़ा दिए।
सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के मुताबिक अब हिज्बुल मुजाहिदीन हमले की ताक में है। हिज्बुल के कश्मीर कमांडर बुरहान मुजफ्फर वानी ने अमरनाथ यात्रा के दौरान सुरक्षा बलों को निशाना बनाने की धमकी दी थी। उसके बाद लश्कर के आतंकियों ने नेशनल हाइवे पर सीआरपीएफ के काफिलों को निशाना बनाया।
पूर्व आतंकियों को फिर से किया जा रहा है सक्रिय
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केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने मंत्रालय के पास मौजूद इनपुट के आधार पर जम्मू कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के दौरान हाईवे की सुरक्षा के लिए सेना, पुलिस और सीआरपीएफ के संयुक्त दल पर जोर दिया है। मंत्रालय की ओर से पीओके से लौटे पूर्व आतंकियों के बारे में विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है।
जम्मू कश्मीर सरकार ने यूपीए शासनकाल में केंद्र की सहमति से नीति बनाई थी जिसके तहत 1990 के दशक में आतंकी प्रशिक्षण लेने गए कश्मीर से पीओके गए आतंकियों की वापसी के प्रावधान हैं।
आतंकियों ने पीओके में विवाह भी रचा लिया और पत्नी और बच्चे के साथ नेपाल के रास्ते लौट रहे हैं।
हांलाकि नीति के तहत नेपाल वैध रूट नहीं है इसलिए इन्हें पुनर्वास नीति के तहत सुविधाएं नहीं मिलती हैं। इस नीति के बाद 1253 लोग पीओके से कश्मीर लौटे हैं। इनमें 453 आतंकी, 197 महिलाएं और 603 बच्चे हैं। सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार वापसी के बाद इनमें से कुछ ने फिर से हथियार उठा लिए हैं। पंपोर हमले में आतंकियों को हाईवे तक पहुंचाने में इनमें से कुछ ने मदद की थी।
पूर्व आतंकियों के रिकॉर्ड फिर से खंगाले जा रहे हैं
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आतंकवाद के चरम दौर में कश्मीर से चार हजार युवक आतंकी प्रशिक्षण के लिए पीओके गए थे। इनमें लगभग एक हजार अब वापस लौटना चाहते हैं। इनके आवेदन जम्मू कश्मीर सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के पास लंबित हैं।
मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से इन पूर्व आतंकियों की वापसी के लिए नेपाल रूट को वैध बनाने की मांग की थी। गृह मंत्रालय ने उसे खारिज कर दिया है।
ताजा आंतकी घटनाओं के बाद वापस लौटे पूर्व आतंकियों के रिकार्ड को खंगाला जा रहा है तथा उन सब की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।