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रिपोर्ट: जलवायु वित्त पोषण के वादे को पूरा करने में विफल रहे अमीर देश, 35 अरब डॉलर से अधिक नहीं थी वित्तीय मदद

Thu, 11 Jul 2024 11:39 PM IST
दीपक कुमार शर्मा एजेंसी, नई दिल्ली

सार

कोपेनहेगन में 2009 के संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन में अमीर देशों ने विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन से निपटने और अनुकूलन में मदद करने के लिए 2020 से सालाना 100 अरब अमेरिकी डॉलर देने का वादा किया था। हालांकि, इस लक्ष्य को हासिल करने में देरी के कारण विकसित और विकासशील देशों के बीच विश्वास कम हुआ है और वार्षिक जलवायु वार्ता के दौरान यह लगातार विवाद का मसला रहा है।
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जलवायु परिवर्तन (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : ANI
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विस्तार
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अमीर देश 2022 में विकासशील देशों को जलवायु वित्त के रूप में करीब 116 अरब अमेरिकी डॉलर उपलब्ध कराने के अपने वादे को पूरा करने में विफल रहे। वैश्विक गैर-लाभकारी संगठन ऑक्सफैम इंटरनेशनल के अनुसार, अमीर देशों की ओर से दी गई वित्तीय सहायता 35 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक नहीं थी।

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कोपेनहेगन में 2009 के संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन में अमीर देशों ने विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन से निपटने और अनुकूलन में मदद करने के लिए 2020 से सालाना 100 अरब अमेरिकी डॉलर देने का वादा किया था। हालांकि, इस लक्ष्य को हासिल करने में देरी के कारण विकसित और विकासशील देशों के बीच विश्वास कम हुआ है और वार्षिक जलवायु वार्ता के दौरान यह लगातार विवाद का मसला रहा है। मई में आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) ने कहा था कि विकसित देशों ने 2022 में विकासशील देशों को लगभग 116 अरब अमेरिकी डॉलर का जलवायु वित्त प्रदान करके अपने लंबे समय से चले आ रहे 100 अरब डॉलर प्रति वर्ष के वादे को पूरा कर लिया है। हालांकि, इस धनराशि का करीब 70 प्रतिशत ऋण के रूप में था, जिनमें से कई लाभदायक बाजार दरों पर प्रदान किए गए थे, जिससे पहले से ही भारी कर्ज में डूबे देशों पर ऋण का बोझ और बढ़ गया।

ऑक्सफैम ने कहा कि अमीर देशों ने 2022 में फिर से कम और मध्य आय वाले देशों को 88 अरब अमेरिकी डॉलर से कम दिया है। ऑक्सफैम ने अनुमान लगाया है कि 2022 में अमीर देशों की ओर से प्रदान किए जाने वाले जलवायु वित्त का वास्तविक मूल्य 28 अरब अमेरिकी डॉलर से कम और 35 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक नहीं है। इसमें अधिकतम 15 अरब अमेरिकी डॉलर अनुकूलन के लिए निर्धारित किए गए हैं, जो जलवायु संकट के बिगड़ते प्रभावों से निपटने में जलवायु-संवेदनशील देशों की मदद करने के लिए महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्तीय वादों और वास्तविकता के बीच यह विसंगति देशों के बीच आवश्यक विश्वास को कमजोर कर रही है और यह भौतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि कई देशों में जलवायु कार्रवाई इसी जलवायु वित्त पर निर्भर करती है।

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