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मानसून में कमी से घट सकती है चावल की पैदावार, निर्यात में भी गिरावट की संभावना 

Wed, 18 Jul 2018 05:40 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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चावल का उत्पादन करने वाले देश के छह राज्यों में मानसून सामान्य से कम दर्ज की गई है। इससे उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में चावल उत्पादन में सिर्फ कमी ही नहीं, बल्कि इसका निर्यात भी घटने की आशंका है। कृषि मंत्रालय के मुताबिक, देश में वित्त वर्ष 2017-18 (जुलाई-जून) फसल वर्ष में 11.152 करोड़ टन चावल का उत्पादन हुआ, जबकि वित्त वर्ष 2017-18 में 49,838 करोड़ रुपये के 1.27 करोड़ टन चावल का निर्यात हुआ। देश में उत्पादित चावल में खरीफ फसल की हिस्सेदारी 86 फीसदी से अधिक है। हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि अभी भी हालात सुधर सकते हैं, अगर अगले कुछ दिनों में समुचित बारिश हो जाए। 

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मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में बारिश सामान्य से लगभग 40 फीसदी कम रही है, जबकि पश्चिम बंगाल में मानसून की बारिश सामान्य से 27 फीसदी कम है। ओडिशा और छत्तीसगढ़ में मानसून की बारिश में 7 फीसदी और 2 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि आगामी दिनों में बारिश होगी, जिससे प्रभावित क्षेत्रों को राहत मिलेगी।

आठ फीसदी कम बुवाई 
मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 13 जुलाई तक धान की फसल की बुवाई 1.17 करोड़ हेक्टेयर में हुई थी, जो 8 फीसदी कम है। पिछले साल की समान अवधि में यह आंकड़ा 1.27 करोड़ हेक्टेयर था।  
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यह कुल खाद्यान्न उत्पादन में चावल की फसल का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है। विशेषज्ञों का मानना है कि चावल के उत्पादन की भरपाई किसी अन्य खाद्यान्न के उत्पादन से नहीं की जा सकती। चाहे गेहूं हो या दाल या फिर मोटा अनाज। 

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मानसून की बारिश का मौजूदा हाल

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में चावल का उत्पादन लगभग 42 लाख हेक्टेयर में होता है। पिछले सप्ताह के मुकाबले यह क्षेत्र केवल 2,63,000 हेक्टेयर तक पहुंचा है, जबकि इस साल करीब 5,00,000 हेक्टेयर में फसल होनी चाहिए थी।

मानसून की बारिश का मौजूदा हाल
प्रदेश                                                        बारिश की स्थिति
उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड                सामान्य से 40 फीसदी कम
पश्चिम बंगाल                                        सामान्य से 27 फीसदी कम
ओडिशा                                               सामान्य से 7 फीसदी कम
छत्तीसगढ़                                            सामान्य से 2 फीसदी कम
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