हाई प्रोफाइल हथियार डीलर संजय भंडारी ने कालेधन के मामले में उसे भगोड़ा घोषित करने की मांग वाली प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका का विरोध किया है। दिल्ली की एक अदालत में भंडारी ने दावा किया कि ब्रिटेन में उसका प्रवास वैध है क्योंकि लंदन हाईकोर्ट ने उसके भारत प्रत्यर्पण से इनकार कर दिया है। भंडारी ने 19 अप्रैल को अपने वकील के जरिये अदालत के समक्ष दावा किया कि ईडी का आवेदन अस्पष्ट, गलत और अधिकार क्षेत्र से बाहर है क्योंकि यह भगोड़ा अपराधी अधिनियम की आवश्यकताओं का अनुपालन नहीं करता है।
भंडारी के मामले में लंदन हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए इंग्लैंड की एक अदालत ने 11 अप्रैल को करोड़ों रुपये के चावल खरीद घोटाले में एक अन्य आरोपी को प्रत्यर्पित करने के भारत सरकार के अनुरोध को खारिज कर दिया था। खबरों के अनुसार, हाल ही में बेल्जियम में गिरफ्तार भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी ने भी 13,000 करोड़ रुपये के पंजाब नेशनल बैंक धोखाधड़ी के मामले में भारत में मुकदमा चलाने के लिए अपने प्रत्यर्पण का विरोध करने के लिए लंदन हाईकोर्ट के आदेश का हवाला दिया है। हथियार डीलर भंडारी का नाम कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बहनोई रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय की चल रही जांच में भी सामने आया है।
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लंदन हाईकोर्ट ने कहा था- तिहाड़ में भंडारी के साथ हिंसा का खतरा
फरवरी में ब्रिटेन के लंदन स्थित हाईकोर्ट ने कथित कर चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों का सामना करने के लिए भारत प्रत्यर्पित किए जाने के खिलाफ भंडारी की अपील को स्वीकार कर लिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि तिहाड़ जेल में उससे जबरन वसूली का खतरा होगा। साथ ही उसे अन्य कैदियों और जेल अधिकारियों की ओर से धमकी या हिंसा का भी सामना करना पड़ सकता है। इस महीने की शुरुआत में लंदन हाईकोर्ट ने भारत सरकार की याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उसके आदेश के खिलाफ ब्रिटेन के सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की अनुमति मांगी गई थी।
ब्रिटेन में रहने का कानूनी हक, भारत सरकार फैसले से बंधी
भंडारी ने अपने वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह के जरिये 19 अप्रैल को विशेष न्यायाधीश संजीव अग्रवाल के समक्ष लंदन हाईकोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए दावा किया कि उनके मुवक्किल के ब्रिटेन में रहने को अवैध नहीं कहा जा सकता क्योंकि उसे ब्रिटेन में रहने का कानूनी अधिकार है और भारत सरकार ब्रिटेन की अदालत के फैसले से बंधी हुई है। भंडारी कानूनी तौर पर वहां रह रहा है और ऐसे में उसे भगोड़ा घोषित करना कानूनी तौर पर गलत है।
ईडी का आवेदन कानून की आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं
सिंह ने दावा किया कि ईडी का आवेदन अस्पष्ट, गलत और अधिकार क्षेत्र से बाहर है क्योंकि यह भगोड़ा अपराधी अधिनियम की आवश्यकताओं का अनुपालन नहीं करता है।
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भगोड़ा अपराधी अधिनियम के अनुसार, अनुसूचित अपराध (वर्तमान मामले में भंडारी के खिलाफ कालेधन का मामला) में शामिल मूल्य 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक होना चाहिए, ताकि किसी व्यक्ति को भगोड़ा घोषित किया जा सके लेकिन ईडी ने जब आवेदन दायर किया तो उनके पास आयकर विभाग का ऐसा कोई मूल्यांकन उपलब्ध नहीं था और अदालत को गुमराह किया गया कि अपराध का मूल्य 100 करोड़ रुपये से अधिक है। इसके अलावा आयकर विभाग के अनुसार, मार्च 2020 में कार्यवाही को रद्द करने के लिए भंडारी द्वारा दायर एक मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष उनके प्रस्तुतीकरण के अनुसार, इसमें शामिल अपराध का मूल्य 100 करोड़ रुपये से कम था।
भंडारी के खिलाफ कोई नया वारंट भी लंबित नहीं
सिंह ने कहा कि भंडारी को जिन गैर-जमानती वारंट के आधार पर ब्रिटेन में गिरफ्तार किया गया था, उन्हें ब्रिटेन हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार बरी कर दिया गया है और उनके खिलाफ कोई नया वारंट लंबित नहीं है। दिल्ली की अदालत ने ईडी से भंडारी की दलील पर 3 मई तक जवाब मांगा है।