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RIC: रूसी राजदूत बोले- भारत-चीन-रूस में सहयोग के लिए अतुलनीय क्षमता, आपसी रिश्तों पर कही ये बात

Mon, 05 Sep 2022 12:52 AM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

रूसी राजदूत ने कहा कि आरआईसी ने क्षेत्र में 'आपसी समझ, विश्वास और स्थिरता' को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और यह सदस्य देशों के बीच सहयोग और समन्वय को बढ़ाने में और योगदान दे सकता है।
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रूसी राजदूत डेनिस अलीपोव - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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रूसी राजदूत डेनिस अलीपोव ने कहा कि त्रिपक्षीय संगठन आरआईसी (रूस-भारत-चीन) में तीन देशों के बीच सहयोग के लिए अतुलनीय क्षमता है और यह नई दिल्ली और बीजिंग के बीच रचनात्मक वार्ता को बढ़ावा देने के लिए एक सहायक ढांचा हो सकता है। 

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अमेरिका की ओर इशारा करते हुए राजदूत ने  पीटीआई को बताया कि आरआईसी का नजरिया कुछ ताकतवर देशों की नीति से बहुत अलग है।
 
अलीपोव ने अमेरिका के वाली इंडो-पैसिफिक पहल की भी आलोचना की और कहा कि यह एक 'रोकथाम नीति' (कंटेनमेंट पॉलिसी) का हिस्सा है। उन्होंने 'विभाजनकारी' बयानों का समर्थन करने से इनकार करने के लिए क्वाड में भारत की स्थिति की सराहना की।

राजदूत ने कहा कि आरआईसी ने क्षेत्र में 'आपसी समझ, विश्वास और स्थिरता' को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और यह सदस्य देशों के बीच सहयोग और समन्वय को बढ़ाने में और योगदान दे सकता है। 
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उन्होंने कहा, "निश्चित रूप से रूस के लिए यह (आरआईसी) एक प्राथमिक प्रारूप है। हमारा मानना है कि यह नई दिल्ली और बीजिंग के बीच एक रचनात्मक बातचीत को बढ़ावा देने में सहायक हो सकता है।"

भारत को एस-400 मिसाइल प्रणाली  की आपूर्ति तय समय पर
रूस और भारत रक्षा सहयोग में उत्पन्न बाधाओं को दूर करने के लिए प्रभावी ढंग से काम कर रहे हैं। भारत में रूसी राजदूत डेनिस अलीपोव ने कहा कि भारत को एस-400 मिसाइल प्रणाली (सतह से हवा में मार करने वाली) की आपूर्ति तय समय पर की जाएगी। 

रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण सैन्य प्रणालियों और उपकरणों की आपूर्ति में देरी की अटकलों के बीच अलीपोव ने भरोसा दिलाते हुए कहा, रक्षा सहयोग रूसी-भारतीय विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी के प्रमुख स्तंभों में से एक है। हमारे दोनों देश यह सुनिश्चित करने के लिए बहुत प्रेरित हैं कि यह निर्बाध बना रहे।

उन्होंने कहा, हम नकारात्मक बाहरी कारकों द्वारा बनाई गई बाधाओं को सफलतापूर्वक कम करने और वैकल्पिक भुगतान और रसद विकल्पों का उपयोग करके नई वास्तविकताओं को समायोजित करने में कामयाब रहे।

दरअसल अक्तूबर 2018 में, भारत ने एस-400 वायु रक्षा मिसाइल प्रणालियों की 5 इकाइयों को खरीदने के लिए रूस के साथ 5 बिलियन अमेरिकी डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर किया था।

रूस ने पिछले साल दिसंबर में मिसाइल की पहली खेप के साथ डिलीवरी शुरू की और इसे उत्तरी सेक्टर में चीन सीमा के साथ पाकिस्तान से लगती सीमा पर तैनात किया गया है। जानकारी के अनुसार, जल्द ही रूस से दूसरी खेप की डिलीवरी हो सकती है क्योंकि रूस ने डिलीवरी की तैयारी लगभग पूरी कर ली है।

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