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आरजी कर: नेटवर्क और पहुंच के बल पर चढ़ता गया सीढ़ी, जबरन वसूली से डराने धमकाने तक के हैं संजय पर

सार

Sanjay roy: संजय रॉय बहुत कम समय में अपने नेटवर्क के जरिए, कोलकाता पुलिस में काफी पहुंच रखने लगा था। उस पर जबरन धन वसूली, डराने-धमकाने के आरोप लगे हैं, जिनकी जांच हो रही है। 
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कोलकाता मामले का दोषी संजय रॉय - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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आरजी कर मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या मामले में दोषी संजय राय को अदालत ने सोमवार को उम्र कैद की सजा सुनाई। लेकिन बहुत कम लोगों को जानकारी है कि उसने बहुत कम समय में पुलिस विभाग में एक 'खास' जगह बना ली। सूत्रों के मुताबिक  संजय रॉय बहुत कम समय में अपने नेटवर्क के जरिए, कोलकाता पुलिस में काफी पहुंच रखने लगा था। उस पर जबरन धन वसूली, डराने-धमकाने के आरोप लगे हैं, जिनकी जांच हो रही है। 
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2019 में वह कोलकाता पुलिस में सिविल वॉलंटियर के रूप में शामिल हुआ। थोड़े ही समय में अपने नेटवर्क के जरिए उसने कोलकाता पुलिस की चौथी बटालियन में आवास की सुविधा भी हासिल कर ली। इस कारण उसे आरजी कर मेडिकल कॉलेज में तैनाती भी मिली। सूत्र बताते हैं कि उसकी शादियां असफल रहीं। अपनी पहुंच और नेटवर्क की वजह से उसने पुलिस से एक मोटरसाइकिल भी हासिल कर लिया, जिसके लिए उसे पेट्रोल का खर्च भी मिलता था। 

उस पर जबरन धन वसूली, डराने-धमकाने के आरोप भी लगे हैं, जिनकी जांच चल रही हैं। उस पर एक महिला डॉक्टर के साथ अनुचित व्यवहार का भी आरोप है। इतना ही नहीं पैसे लेकर मरोजों को भर्ती कराने सहित कई तरह के आरोप लगे हैं।
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आरजी कर मामलाः 9 अगस्त से 20 जनवरी तक की पूरी कहानी
9 अगस्त, 2024 : आरजी कर अस्पताल के आपातकालीन विभाग की तीसरी मंजिल के सेमिनार
हाल से जूनियर डॉक्टर का शव बरामद। पुलिस ने मामला दर्ज किया।
10 अगस्त : कोलकाता पुलिस ने एक सिविक वालंटियर संजय राय को गिरफ्तार किया। जूनियर
डॉक्टरों ने प्रदर्शन शुरू किया।
13 अगस्त : कलकत्ता हाई कोर्ट ने मामले का संज्ञान लिया, जांच का जिम्मा कोलकाता
पुलिस से सीबीआई को सौंपा।
14 अगस्त : मामले की जांच के लिए 25 सदस्यीय सीबीआई टीम का गठन, फारेंसिक टीम भी
बनाई गई।
14 व 15 अगस्त की दरमियानी रात : आरजी कर कांड के खिलाफ 'रिक्लेम द नाइट' अभियान
के दौरान भीड़ ने आरजी कर अस्पताल में घुसकर तोड़फोड़ की।
18 अगस्त : सुप्रीम कोर्ट ने लिया घटना का स्वत: संज्ञान।
21 अगस्त : सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय बलों को आरजी कर अस्पताल की सुरक्षा संभालने का
निर्देश दिया।
24 अगस्त : मुख्य आरोपित के साथ छह अन्य के लाई डिटेक्शन टेस्ट किए गए।
25 अगस्त : सीबीआई ने अस्पताल के पूर्व प्राचार्य संदीप घोष समेत अन्य के आवासों पर
छापेमारी की।
2 सितंबर : संदीप घोष को अस्पताल में वित्तीय भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
14 सितंबर : सीबीआई ने संदीप घोष और एफआईआर दर्ज करने में देरी और सुबूत मिटाने के आरोप
में टाला थाने के पूर्व एसएचओ अभिजीत मंडल को गिरफ्तार किया।
3 अक्तूबर : न्याय की मांग पर जूनियर डॉक्टर भूख हड़ताल पर बैठे।
7 अक्तूबर : संजय राय के खिलाफ सीबीआई ने चारशीज दाखिल की।
21 अक्तूबर : मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ बैठक के बाद जूनियर डॉक्टरों ने भूख हड़ताल
खत्म की।
4 नवंबर : सियालदह कोर्ट में संजय राय के खिलाफ सीबीआई ने आरोप तय किए।
11 नवंबर : सियालदह कोर्ट में मामले में ट्रायल शुरू हुआ।
12 नवंबर : चार्जशीट दाखिल करने में देरी के कारण अभिजीत मंडल और संदीप घोष को जमानत
मिली।
29 नवंबर : सीबीआई ने अस्पताल में वित्तीय भ्रष्टाचार के मामले में 125 पन्नों की चार्जशीट
दाखिल की।
18 जनवरी : सियालदह कोर्ट ने दरिंदगी मामले में मुख्य आरोपित रहे संजय राय को दोषी
करार दिया
20 जनवरी : आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
 
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