दो महीने पहले दर्ज हुई थी FIR
बता दें कि पूर्व जिला कलेक्टर के खिलाफ दो महीने पहले गांधीनगर के सेक्टर 7 पुलिस स्टेशन में एक अधिकारी ने एफआईआर दर्ज करवाई थी। एफआईआर के अनुसार लंगा कथित तौर पर रिश्वत लेने के मामले में लिप्त थे। शिकायत में कहा गया है कि गांधीनगर जिला कलेक्टर के रूप में लंगा ने अपने साथी अधिकारियों के साथ मिलकर साजिश रची। इसके अलावा पूर्व अधिकारी ने सरकार को देय प्रीमियम का भुगतान भी नहीं किया, जिससे राज्य के खजाने को नुकसान हुआ।
रिश्तेदारों को वित्तीय लाभ पहुंचाने पद का दुरुपयोग
उन्होंने अपने सहयोगियों और रिश्तेदारों को वित्तीय लाभ पहुंचाने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया। इतना ही नहीं उन्होंने पद पर रहते हुए अवैध तरीकों से गैर-कृषि (NA) भूमि का करने उपयोग की अनुमति दी। यह अनुमति 6 अप्रैल, 2018 और 30 सितंबर, 2019 के बीच दी गई थी। इस दौरान वह गांधीनगर के कलेक्टर हुआ करते थे।
इन धाराओं के तहत केस दर्ज
लंगा के खिलाफ आईपीसी की धारा 409 (लोक सेवक द्वारा आपराधिक विश्वासघात), 168 (लोक सेवक के रूप में अवैध व्यापार में शामिल होना), 193 (गलत व्यापार), 196 (वास्तविक साक्ष्य का गलत उपयोग करना) और 465 (जालसाजी) के तहत मामला दर्ज किया गया था।