कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने सोमवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) बीआर गवई पर हमले की कोशिश को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की नफरत का नतीजा बताया और कहा कि इससे संस्थाओं के प्रति सम्मान कमजोर हो रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए सीजेआई की शांत और अडिग प्रतिक्रिया की सराहना भी की।
सीजेआई के संयम की सराहना की
उन्होंने लिखा, आज सुप्रीम कोर्ट से हैरान करने वाला दृश्य सामने आया। किसी ने कार्यवाही के दौरान सीजेआई गवई पर कोई वस्तु फेंकने की कोशिश की। इस अफरा-तफरी के बीच, सीजेआई शांत, गरिमापूर्ण और पूरी तरह अविचलित रहे। यही असली नेतृत्व है। सीजेआई गवई का संयम भारत की न्यायपालिका की ताकत को दिखाता है, जो नफरत के सामने भी डटकर खड़ी रहती है।
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'नफरत की जगह इंसानियत को चुने भारत'
आरएसएस पर हमला बोलते हुए उन्होंने आगे लिखा, लेकिन सच्चाई यह है कि यह केवल एक व्यक्ति का पागलपन नहीं है। यह आरएसएस की 100 साल की नफरत का नतीजा है, जिसने लोगों की सोच को नुकसान पहुंचाया है और संस्थाओं के प्रति सम्मान को कमजोर किया है। उन्होंने अपनी पोस्ट में आगे लिखा, जब नफरत सामान्य हो जाती है, तो न्याय करना खतरनाक हो जाता है। अब वक्त है कि भारत अफरा-तफरी की जगह शांति, नफरत की जगह इंसानियत को चुने।
क्या हुई पूरी घटना?
यह घटना उस समय हुई, जब एक वकील सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय के कोर्ट रूम नंबर एक में घुसा और उसने सीजेआई पर कोई वस्तु फेंकने की कोशिश की, जिसका इरादा उन पर हमला करने का था। हालांकि, वहां मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत दखल देकर उसे बाहर निकाल दिया। फिलहाल, उस हमलावर से पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी पूछताछ कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, जब उस व्यक्ति को बाहर ले जाया जा रहा था, तब उसने कहा, 'सनातन का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान।'
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वकील अनस तनवीर उस वक्त कोर्ट रूम में मौजूद थे। उन्होंने एक्स पर लिखा कि हमलावर पूरी वर्दी में था। उसके पास एक प्रोक्सिमिटी कार्ड था और एक बैग भी था, साथ ही कुछ कागजों की एक बंधी हुई गठरी भी उसके पास थी। तनवीर के मुताबिक, हमलावर ने जस्टिस के. विनोद चंद्रन से माफी मांगी, जो सीजेआई गवई के साथ बैठे थे और स्पष्ट किया कि उसका निशाना केवल सीजेआई गवई पर ही था।