सोसायटी में रहने वाले हितेश पटेल ने बताया कि मेरे बेटे को भी टीका लगा था। हर डोज के लिए हमसे 1260 रुपये लिए गए। टीका लगने के बाद हमारे मोबाइल पर किसी भी तरह का मैसेज नहीं आया। इसके अलावा टीका लगवाने के दौरान हमने किसी भी तरह की सेल्फी या फोटो खींचने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने बताया कि सोसायटी के 390 लोगों ने 1260 रुपये प्रति टीके के हिसाब से भुगतान किया। ऐसे में पांच लाख रुपये की ठगी होने की आशंका जताई जा रही है। लोगों को संदेह तब हुआ, जब किसी भी शख्स में टीके के बाद होने वाले लक्षण नहीं दिखे।
सोसायटी के एक अन्य सदस्य ऋषभ कामदार ने बताया कि टीका लगने के बाद जब किसी तरह के लक्षण और साइड इफेक्ट नजर नहीं आने तो सभी हैरान रह गए। इसके बाद मामले की पड़ताल शुरू की गई, क्योंकि किसी को भी टीका लगवाने के तुरंत बाद प्रमाण पत्र नहीं मिला। 10-15 दिन बाद प्रमाण पत्र आए तो वे अलग-अलग अस्पतालों जैसे नानावती, लाइफलाइन, नेस्को बीएमसी टीकाकरण केंद्र की ओर से जारी किए गए थे। इस मामले में संबंधित अस्पतालों से संपर्क किया तो उन्होंने सोसायटी को टीके उपलब्ध कराने से इनकार किया।