भारत में अब रिसर्च पर जोर (सांकेतिक)
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दुनिया में अमेरिका की बादशाहत का एक बड़ा कारण उसका तकनीकी में आगे होना था। अमेरिका ने तकनीकी में भारी निवेश किया और नई तकनीकी के बल पर वह दुनिया की आर्थिक और सैन्य महाशक्ति बन बैठा। वर्तमान में चीन भी उसी की राह पर आगे बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है जो रिसर्च के मामले में लगातार भारी निवेश कर रहा है। विभिन्न क्षेत्रों में चीन की लगातार उन्नत होती तकनीक उसके उत्पादों की गुणवत्ता के सुधार के रूप में लगातार दिखाई भी दे रही है। लेकिन भारत भी इस क्षेत्र में पीछे नहीं रहना चाहता। वह अपने रिसर्च और उसके उपयोग की गुणवत्ता को सुधार कर इस क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति बनाए रखना चाहता है। इसके लिए नई पहल शुरू भी की जा चुकी है।
कामगारों को नई तकनीक का प्रशिक्षण...
आईआईटी खड़गपुर ने राइज (RISE) नाम से एक नई पहल शुरू की है। इसमें चार चरण रिसर्च, इनोवेशन, स्किलिंग और एंटरप्रेन्योरशिप शामिल होंगे। इसके अनुसार, आईआईटी खड़गपुर किसी क्षेत्र में न केवल शोध कर नई तकनीक का आविष्कार करेगा, बल्कि उस क्षेत्र में काम कर रहे कामगारों को नई तकनीक का प्रशिक्षण देकर उन्हें बेहतर काम करने योग्य भी बनाएगा। किसी रिसर्च की रूपरेखा तैयार होने के साथ ही इसके साथ किसी औद्योगिक घराने या सांगठनिक इकाई को जोड़कर उसके व्यावसायिक उपयोग की तैयारी भी की जाएगी जिससे रिसर्च के सफल होने पर उसका व्यावसायिक लाभ भी कमाया जा सके।
कार्बन उत्सर्जन रोकने सहित अनेक क्षेत्रों में काम
प्रो. सुमन चक्रबोर्ती (निदेशक, आईआईटी खड़गपुर) ने अमर उजाला को बताया कि वे कृत्रिम बुद्धिमत्ता से लेकर स्वच्छ जल उपलब्ध कराने, वनों-जल-भूमि के संरक्षण से लेकर नदियों को बचाने तक की तकनीक पर काम करते हैं। महिलाओं के स्वास्थ्य, वातावरण के संरक्षण, कार्बन उत्सर्जन रोकने सहित अनेक क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। इन सभी क्षेत्रों में वे नई तकनीक को लागू कर महिलाओं और बच्चों की स्थिति बेहतर करने के लिए प्रयासरत हैं। उन्होंने कहा कि अब इन तकनीक से सीधे प्रभावित लोगों को शामिल कर उसकी उत्पादकता को बढ़ाया जाएगा।
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देश को विकसित बनाने की दिशा में महत्त्वपूर्ण मदद
सामान्य तौर पर अब तक रिसर्च पेपर फाइल कर दिया जाता था, लेकिन जमीन पर इसकी उत्पादकता के बारे में प्रमाण नहीं जुटाए जाते थे। इससे रिसर्च की व्यावहारिक उपयोगिता को लेकर संदेह बना रहता था। साथ ही, यह लोगों के लिए कितना लाभकारी हो पाता है, इस पर भी प्रामाणिकता नहीं आ पाती थी। लेकिन वर्तमान पद्धति में पहले दिन से ही तकनीक के व्यावसायिक उपयोग तक के चरण शामिल होंगे। इससे तकनीक को लोगों के लिए उपयोगी बनाने में सहायता मिलेगी। इससे देश को विकसित बनाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण मदद मिलेगी।