अगर टूटी दोस्ती को फिर से संवारना है या नौकरी के लिए किसी अधिकारी से बात करनी है, तो शाम 6 से 7 बजे फोन कीजिए। ये कोई ज्योतिषीय गणना या मुहुर्त नहीं बल्कि बॉडी क्लॉक का वो हिसाब है जिसमें बताया गया है कि इस समय लोगों का मूड सबसे अच्छा होता है। और बिगड़ा काम सबसे अधिक इसी समय बनता है। शोध बताते हैं कि ये वक्त किसी भी काम के लिए सबसे मुफीद होता है।
ब्रिटेन में हुए एक अध्ययन से पता चला है कि इंसान का मूड और शरीर के साइकोलॉजिकल क्लॉक से उसका मूड तय होता है। ब्रिटेन के ह्यूमन साइंस रिसर्चर डेनियल पिंक और उनकी टीम ने दिन के अलग-अलग समय पर लोगों का मूड बदलने के पैटर्न पर अध्ययन किया।
इस शोध के लिए डेनियल की टीम ने सोशल मीडिया का भी सहारा लिया और यूजर्स के अलग-अलग टाइम पर किए गए 8 करोड़ पोस्ट का विश्लेषण किया। इस विश्लेषण के बाद यह बात निकल कर आई कि शरीर में बायोलॉजिकल क्लॉक की तरह साइकोलॉजिकल क्लॉक भी होती है जो इंसान के मूड को नियंत्रित करती है।
इसमें यह भी पता चला कि बायोलॉजिकल क्लॉक हमारी दिनचर्या से ढलती रहती है जबकि साइकोलॉजिकल क्लॉक ये तय करती है कि दिन के अलग-अलग समय में किसी इंसान का व्यवहार अमूमन बदलता रहता है। शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव से साइकोलॉजिकल क्लॉक तय होती है। शोध में कई नतीजे सामने आए जिसमें पता चला कि हमारा मूड जो पल-पल बदलता है इसकी बड़ी वजह समय होता है।
शोध में यह भी पता चला कि सुबह जागने के लिए 5 से 6 बजे का वक्त ठीक रहता है वहीं 9 से 10 बजे तक इंसान सबसे कम गुस्से में रहता है।
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अच्छे मूड का कारण होता है- सेरोटोनिन हार्मोन। ये हार्मोन सुबह के समय शरीर में रिसता है और नेचुरल हैप्पीनेस को बढ़ाता है। दोपहर 12 बजे के आस-पास कॉफी पीना शरीर पर अच्छा असर डालता है, तो 1 बजे के बाद सेरोटोनिन घटने से आलस आने लगता है। हमारे शरीर में समय के हिसाब से हॉर्मोन का रिसाव होता है जो हमारे मूड को प्रभावित करता रहता है।
जैसे दोपहर बाद शरीर में कोर्टिसोल का रिसाव शुरू होता है। इसका असर शाम को सूरज ढलने तक रहता है यानी 5 बजे के आस-पास तक रहता है। इस दौरान हमारा मूड कई बार बदलता है चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है। इसके बाद फिर सेरोटोनिन और टेस्टोस्टेरॉन बढ़ता है और मूड अच्छा होने लगता है। शाम 6 से 7 बजे तो मूड सबसे अच्छा रहता है। इस वक्त किए गए काम के सफल होने की उम्मीद 70फीसदी तक होती है।
शोध में जुटे लोगों ने सोशल मीडिया पर अलग-अलग समय पर करीब आठ करोड़ पोस्ट का बारीकी से अध्ययन किया और इस नतीजे पर पहुंचे हैं। यहां तक कि शोध में कहा गया कि रात 10 बजे सोए तो अच्छी नींद आएगी, अगर नहीं सो पाए तो 1 बजे सोने पर आती है चैन की नींद।
शाम 8 से 9 के बीच दिमाग काफी शांत रहता है और हर बात को बिना ज्यादा प्रयास के व्यवस्थित रूप से सोच पाता है, इसीलिए ये वक्त अगले दिन की प्लानिंग करने के लिए सटीक रहता है। रात 10 बजे से शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन का रिसाव शुरू होता है, इसलिए अब सोने की तैयारी कर देनी चाहिए। लेकिन अगर 10 बजे नहीं सो पाए, तो कोई बात नहीं। रात 1 बजे से शरीर में फिर मेलाटोनिन का रिसाव शुरू होता है, जो 4 बजे तक जारी रहता है। इस बीच सो जाने से भी अच्छी नींद ली जा सकती है।