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अमर उजाला विशेष: दिन व रात में अलग-अलग काम करती है हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली

Wed, 09 Jun 2021 11:01 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली

सार

  • शोध में इंसानी प्रतिरक्षा प्रणाली से जुड़ी यह धारणा गलत साबित हुई है कि संक्रमण दिन में हुआ है या रात में इससे कोई फर्क नहीं पड़ता
  • शोध में खुलासा हुआ है कि सुबह टीका लगवाना सबसे बेहतर होता है
  • कोरोना के मामले में अभी यह शोध कारगर नहीं, ढूंढा जा रहा है जवाब
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
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विस्तार
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आमतौर पर माना जाता है कि इंसानी प्रतिरक्षा प्रणाली हर वक्त एक जैसा काम करती है। धारणा यह थी कि इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि संक्रमण दिन में हुआ है या रात में। लेकिन, एक शोध से अब पता चला है कि हमारा प्रतिरक्षा तंत्र संक्रमण से दिन व रात में अलग-अलग ढंग से निपटता है। यहां तक कि हम दिन के किस समय वैक्सीन लगवाते हैं, तो प्रतिरक्षा पर इसका भी असर पड़ता है। जानकार इनके लिए शरीर की जैविक घड़ी को जिम्मेदार मानते हैं।

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जैविक घड़ी करती है शरीर को समायोजित
डबलिन में आरसीएसआई यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ एंड साइंसेज की शोधकर्ता एनी कार्टिस के मुताबिक, हमारी जैविक घड़ी लाखों वर्षों में विकसित हुई है। यह दिन और रात के समय को स्वत: समझकर हमारे कार्य और व्यवहार को समायोजित कर लेता है। जैविक घड़ी कोशिकीय गितिविधियों के लिए 24 घंटे लय (सर्केडियन रिद्म) पैदा करके ऐसा कर पाता है। मसलन, रात होते ही बॉडी क्लॉक शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन का उत्पादन सुनिश्चित करता है। यह रसायन शरीर को थकाता है और हमें सोने का संकेत मिलने लगता है।
 
सुबह के समय वैक्सीन रही अधिक कारगर
इस बात के भी पर्याप्त प्रमाण हैं कि खास रोगों के रोगाणुओं के खिलाफ प्रतिरक्षा विकसित करने में दिन और रात का समय महत्वपूर्ण है। 2016 में 65 साल और उससे ज्यादा उम्र के 250 वयस्कों पर एक शोध हुआ था। इसमें पता चला कि जिन लोगों को सुबह नौ से 11 बजे के बीच इन्फ्लुएंजा का टीका लगा, उनके शरीर में दोपहर बाद डोज लेने वाले के मुकाबले ज्यादा एंटीबॉडी मिलीं। इसी प्रकार हाल ही में, करीब 25 साल वाले जिन युवाओं को सुबह बीबीसी के टीके लगे, उनमें दोपहर 12 बजे से एक बजे के बीच वैक्सीन लेने वालों की तुलना में ज्यादा प्रतिरक्षा मिली।
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...तो फिर कोरोना में क्या
इस तरह के शोध के बाद कोरना टीकाकरण के समय को लेकर सवाल उठना लाजिमी है। लेकिन अभी इसका जवाब ढूंढा जाना है। विशेषज्ञ मानते हैं कि तात्कालिकता और कोरोना टीकों के असर को देखते हुए हमें दिन के किसी भी समय टीकाकरण कराना चाहिए।
 
दवा लेने का समय भी तय करता है उसका असर
कुछ शोधों से पता चला है कि दवा का असर उसे लेने के समय पर भी निर्भर करता है। मसलन, सोते समय शरीर में कोलेस्ट्रॉल बनता है। ऐसे में सोने से ठीक पहले कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवा लेना ज्यादा लाभदायक होता है। अध्ययन में यह भी पता लगा है कि दिन का समय कुछ निश्चित प्रकार की प्रतिरक्षा कोशिकाओं के कार्य को प्रभावित करता है।
 
यूं होती है शरीर की बेहतर रक्षा
मोटे तौर पर कहें तो दिन में हमारी प्रतिरक्षा उत्तकों में चली जाती है और फिर रात में पूरे शरीर में फैल जाती हैं। जानकारों के मुताबिक, प्रतिरक्षा कोशिकाओं की यह सर्केडियन लय शायद इसलिए विकसित हुई होगी ताकि संक्रमण की ज्यादा आशंका के वक्त कोशकाएं शरीर में चारों ओर घूमती हैं और हमारे लिम्फ नोड्स में ठहर जाती है। यहां वे संक्रमण समेत दिन में हुई गतिविधियों की स्मृति बनाती है। इससे कोशिकाएं यह सुनिश्चित करती हैं कि अगली बार जब संक्रमण से सामना हो तो वे बेहतर जवाबी कार्रवाई कर सकें।

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तमिलनाडु में कोविड जांच के लिए 28 हाथियों के नमूने लिए

तमिलनाडु के उधगमंडलम जिले में मंगलवार को एक शिविर में 28 हाथियों के कोविड-19 जांच के लिए नमूने लिए गए। चेन्नई के एक चिड़ियाघर में कुछ दिन पहले कोविड-19 से एक शेरनी की मौत और नौ अन्य के संक्रमित होने के बाद यहां जांच की जा रही है। 

वन विभाग के सूत्रों के अनुसार वन मंत्री के रामचंद्रन ने सभी हाथियों के नमूने लेकर उन्हें जांच के लिए उत्तर प्रदेश में बरेली के इज्जत नगर स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान भेजने का आदेश दिया है। उन्होंने बताया कि उसके बाद यहां पास में ही मुदुमलाई शिविर में दोपहर तक सभी 28 हाथियों के नमूने लिए गए। 
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