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Study: बच्चों से ज्यादा युवा जंक फूड की लत के शिकार, शराब और धूम्रपान जैसी खतरनाक है यह आदत

Tue, 17 Oct 2023 06:24 AM IST
यशोधन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली।

सार

शोधकर्ताओं के अनुसार, बेहद ज्यादा कार्बोहाइड्रेट और वसा वाले यह अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड जैसे कैंडी, आइसक्रीम, फ्राइज, चिप्स, बर्गर, डिब्बा बंद भोजन, कोल्ड ड्रिंक्स, चॉकलेट,  पैकेज्ड सूप, चिकन नगेट्स, हॉटडॉग और बहुत कुछ हैं। 
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जंक फूड - फोटो : पेक्सेल्स
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विस्तार
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बच्चों से ज्यादा युवा जंक फूड यानी अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स की लत के शिकार बन रहे हैं। यह चिंताजनक है, क्योंकि स्वास्थ्य के नजरिए से हानिकारक इन खाद्य पदार्थों को लेकर जो लगाव बढ़ रहा है वह शराब और धूम्रपान की तरह बढ़ रहा है।

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शोध के नतीजे द ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित हुए हैं। अमेरिका, ब्राजील और स्पेन के शोधकर्ताओं के अध्ययन के अनुसार 14 फीसदी वयस्कों और 12 फीसदी बच्चों में जंक फूड की दीवानगी बेहद गंभीर खतरे की ओर इशारा करती है। यही वजह है कि आज का युवा हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। 

शोधकर्ताओं के अनुसार, बेहद ज्यादा कार्बोहाइड्रेट और वसा वाले यह अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड जैसे कैंडी, आइसक्रीम, फ्राइज, चिप्स, बर्गर, डिब्बा बंद भोजन, कोल्ड ड्रिंक्स, चॉकलेट,  पैकेज्ड सूप, चिकन नगेट्स, हॉटडॉग और बहुत कुछ हैं। 
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ऐसे फूड्स को ही अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड कहते हैं। इन्हें कई प्रक्रियाओं से गुजारने के साथ ही इनमें कई अतिरिक्त तत्व मिलाते हैं, जो किसी नशीले पदार्थ से कम नहीं होते। यह अध्ययन 36 देशों में प्रकाशित 281 अध्ययनों के विश्लेषण पर आधारित है।

अनगिनत बीमारियों की जड़
शोधकर्ताओं के अनुसार कई अध्ययनों में यह सामने आया है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की वजह से मोटापा, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप , टाइप-2 मधुमेह और कैंसर तक का जोखिम बढ़ जाता है। इन उत्पादों की वैश्विक खपत बढ़ रही है। जहां यूके और अमेरिका में यह औसत आहार का आधे से अधिक हिस्सा बन चुके हैं, वहीं भारत जैसे  देशों में भी इनकी खपत तेजी से बढ़ रही है।

भारतीय बच्चों के  लिए अधिक खतरा
डब्ल्यूएचओ, यूनिसेफ और लैंसेट आयोग की जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ जंक फूड भी भारतीय बच्चों के जीवन के लिए बड़ा खतरा है। जो लोग बहुत ज्यादा तला हुआ भोजन करते हैं उनमें मधुमेह और ह्रदय रोग का खतरा कहीं ज्यादा हो सकता है। 

डब्लूएचओ के मुताबिक हर साल जरूरत से ज्यादा नमक (सोडियम) का सेवन दुनिया में 30 लाख से ज्यादा लोगों की जान ले रहा है। इतना ही नहीं इसकी वजह से रक्तचाप और हृदय रोग का खतरा भी बढ़ रहा है।

मौजूदा मामले में जोड़े के बीच विवाह नहीं हुआ था और उन्होंने विवाह समझौते के आधार पर एक साथ रहना शुरू कर दिया था, जिसकी कानून की नजर में कोई कानूनी पवित्रता नहीं है। उन्हें सहमति संबंध में रहने वालों की तरह ही देखा जाना चाहिए। वे पति-पत्नी नहीं थे।

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