जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की झांकियां कर्तव्य पथ पर प्रदर्शित की गईं, उनमें: अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, मणिपुर, मध्य प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़, राजस्थान, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, लद्दाख, तमिलनाडु, गुजरात, मेघालय, झारखंड, उत्तर प्रदेश तथा तेलंगाना शामिल हैं।
कर्तव्य पथ पर परेड के दौरान कुल 25 झांकियों को प्रदर्शित किया गया, जिनमें 16 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों की झांकियां शामिल हुईं। जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की झांकियां कर्तव्य पथ पर प्रदर्शित की गईं, उनमें: अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, मणिपुर, मध्य प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़, राजस्थान, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, लद्दाख, तमिलनाडु, गुजरात, मेघालय, झारखंड, उत्तर प्रदेश तथा तेलंगाना शामिल हैं।
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गुजरात में झांकी में कच्छ का धोर्डो गांव रहा मुख्य आकर्षण
गुजरात की झांकी में कच्छ के रण का प्रवेश द्वार धोर्डो शुक्रवार को गणतंत्र दिवस परेड में मुख्य आकर्षण रहा। धोर्डो ने पिछले साल संयुक्त राष्ट्र की सर्वश्रेष्ठ गांवों की सूची में जगह बनाई थी। कच्छ के रण के प्रवेश द्वार के रूप में जाना जाने वाला धोर्डो अपने पारंपरिक हस्तशिल्प, लोक संगीत और वार्षिक रण उत्सव के लिए खास तौर पर चर्चित है।
तेलंगाना की झांकी में कोमाराम भीम और रामजी गोंड की वीरता पर जोर
तेलंगाना की झांकी में कोमाराम भीम, रामजी गोंड और चित्याललम्मा (चकलिल्लम्मा) जैसे नेताओं के वीरतापूर्ण प्रयासों की झलक दिखाई गई, जिनका अदम्य साहस इस क्षेत्र की लोककथाओं का अभिन्न हिस्सा बन गया है। कोमाराम भीम और रामजी गोंड अपने जीवकाल में हमेशा स्वदेशी आदिवासी समुदायों की स्वतंत्रता, सम्मान और अधिकारों की पैरवी करते रहे।
मणिपुर की झांकी में इमा कीथेल का प्रदर्शन
75वें गणतंत्र दिवस की परेड में मणिपुर की झांकी में, राज्य के प्रख्यात ‘इमा कीथेल’ यानी ‘मदर्स मार्केट’ का प्रदर्शन किया गया। करीब 500 साल पुराना इमा कीथेल दुनिया का एकमात्र ऐसा बाजार है जिसे पूरी तरह से महिलाएं चलाती हैं और यह 'नारी शक्ति' का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
तमिलनाडु की झांकी ने दिखाई ऐतिहासिक 'कुडावोलाई' चुनावी प्रक्रिया की झलक
देश के 75वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर शुक्रवार को कर्तव्य पथ पर निकाली गई विभिन्न राज्यों की झांकियों में तमिलनाडु की झांकी भी शामिल थी जिसमें 10वीं शताब्दी के चोल युग के दौरान उभरी और लोकतंत्र की दिशा में एक प्रारंभिक कदम मानी जाने वाली कुडावोलाई चुनाव प्रणाली के महत्व को रेखांकित किया गया। इस चुनावी प्रक्रिया का इस्तेमाल ग्रामीण प्रशासन के संचालन के लिए प्रतिनिधियों के चुनाव के वास्ते होता था और इससे लोगों की सामूहिक इच्छा प्रदर्शित होती थी। इस प्रणाली के ऐतिहासिक साक्ष्य कांचीपुरम जिले में स्थित उतीरामेरुर शिलालेखों में दर्ज़ हैं।
छत्तीसगढ़ की झांकी में आदिवासी परंपरा 'मुरिया दरबार'
गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित परेड में शुक्रवार को छत्तीसगढ़ की झांकी में राज्य के बस्तर क्षेत्र में सामुदायिक स्तर पर निर्णय लेने की 600 साल पुरानी आदिवासी परंपरा 'मुरिया दरबार' को दर्शाया गया। 'मुरिया दरबार' प्राचीन काल से आदिवासी समुदायों में मौजूद लोकतांत्रिक चेतना और पारंपरिक लोकतांत्रिक मूल्यों को प्रतिबिंबित करता है और साथ ही भारत में लोकतंत्र की उत्पत्ति और विकास की कहानी भी प्रस्तुत करता है। 'मुरिया दरबार' की परंपरा 600 वर्ष से अधिक पुरानी है और प्रसिद्ध 'बस्तर दशहरा' का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही है।
उत्तर प्रदेश की झांकी की थीम 'अयोध्या-विकसित भारत, समृद्ध विरासत'
उत्तर प्रदेश की झांकी की थीम 'अयोध्या-विकसित भारत-समृद्ध विरासत' रही। यूपी की झांकी में आगे रामलला की प्रतिमा को दर्शाया गया, जिसमें अयोध्या में हाल ही में हुई राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा को दर्शाया गया।
अरुणाचल प्रदेश में 'सिंगचुंग बुगुन विलेज कम्युनिटी रिजर्व' की झलक
गणतंत्र दिवस परेड में अरुणाचल प्रदेश की झांकी में 17 वर्ग किलोमीटर के जैव विविधता वाले क्षेत्र ‘सिंगचुंग बुगुन विलेज कम्युनिटी रिजर्व’ की झलक दिखाई गई। इस जैव विविधता वाले क्षेत्र को 2017 में बनाया गया था। यह गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण के लिए है। यहां लुप्त होने के खतरे का सामना कर रहे बुगुन लियोशिक्ला (लियोशिक्लाबुगुनोरम) पक्षी का संरक्षण किया जाता है। पक्षी का यह नाम एक जनजाति पर रखा गया है। 'सिंगचुंग बुगुन विलेज कम्युनिटी रिजर्व' में अन्य लुप्तप्राय: प्रजातियां जैसे रेड पांडा (ऐलुरुस्फुल्गेन्स) तथा जीवों एवं वनस्पतियों की दूसरी प्रजातियां भी हैं।
राजस्थान की झांकी में दिखी संस्कृति, कला और पर्यटन की झलक
राजस्थान की झांकी में इस रेगिस्तानी राज्य की मनमोहक सांस्कृतिक परंपराओं, आकर्षक हस्तशिल्प और विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों को दर्शाया गया। 'विकसित भारत मैं - पधारो म्हारे देश...राजस्थान' थीम पर आधारित झांकी में राज्य की पर्यटन क्षमता को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया। इस झांकी में आगे की ओर राजस्थान की 'घूमर' नृत्य शैली का प्रदर्शन किया गया और पीछे की ओर एक सजे हुए ऊंट का प्रतीक दर्शाया गया।
गणतंत्र दिवस परेड में ओडिशा की झांकी में राज्य में महिला सशक्तीकरण के साथ-साथ इसके समृद्ध हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्र को प्रदर्शित किया। झांकी के मध्य भाग में हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी पर प्रकाश डाला गया और उन्हें नगदी रहित लेनदेन और ई-प्लेटफॉर्म मार्केटिंग में शामिल दिखाया गया था। इसके साथ ही प्रौद्योगिकी के प्रति महिलाओं के झुकाव की झलक पेश करने का प्रयास किया गया।