सफदरजंग अस्पताल में डिपार्टमेंट ऑफ कम्युनिटी मेडिसिन के डायरेक्टर, प्रोफेसर और हेड डॉ. जुगल किशोर ने अमर उजाला को बताया कि जिन मरीजों में कोर्टिको स्टेरॉइड इस्तेमाल किया गया है, उन्हें फिरसे कोविड या फंगस से संक्रमित होने की संभावना बनी हुई है। इतनी अधिक मात्रा में दवाओं के इस्तेमाल के चलते हर्ड इम्यूनिटी पैदा नहीं हो पायी है। आने वाले दिनों में टीबी बीमारी फैलने की संभावना सबसे ज्यादा है, या हो सकता है कि आने वाले एक दो महीनों में टीबी के मामले कई गुना बढ़ जाएं। इसके अलावा एक बात और उभर रही है कि मेंटल हेल्थ डिसऑर्डर की महामारी आ सकती है, बड़ी संख्या में बेचैनी व अवसाद के मरीज मिल सकते हैं।
फंगल इंफेक्शन के बाद इंजेक्शन व दवाएं लंबे समय तक लेनी पड़ती हैं, ज्यादा गंभीर होने पर सर्जरी भी जरूरी हो जाती है क्योंकि मृत कोशिकाओं को उसके आसपास की जीवित कोशिकाओं के साथ ही हटाना पड़ता है, फिर एंटीफंगल दवाएं असर करने लगती हैं।
डायबिटीज से भी इम्यून सिस्टम होता है कमजोर
उन्होंने आगे बताया कि डायबिटीज से भी इम्यून सिस्टम कमजोर होता है और फंगल इंफेक्शन को बढ़ाती है क्योंकि शरीर में शुगर का कंटेंट बढ़ जाता है। हमारे खून की लाल कोशिकाओं में फेरेटिन पाया जाता है, यही कैमिकल इन फंगस में भी मिलता है यानी लाल कोशिकाएं इस फंगस के फैलने में मदद करती हैं। इसी तरह जिंक खाने से भी फंगल इंफेक्शन को फैलने में मदद मिलती है।
डॉ. किशोर आगे बताते हैं कि कोविड के अलावा एचआईवी, टीबी, कैंसर और लंबे समय से अस्पताल में पड़े स्ट्रोक व न्यूमोनिया के मरीजों में भी फंगल इंफेक्शन की संभावना बहुत ज्यादा होती है। घुटने व जोड़ों के दर्द के लिए अर्थराइटिस व गठिया के मरीज जो दवा लेते हैं, वे दवाएं भी ऑटो इम्यून सिस्टम को दबाती हैं, यदि इस तरह के मरीजों को कोविड हो तो इनमें फंगल इंफेक्शन की संभावना बहुत ज्यादा है।