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Recycling Policy: कचरे से संसाधन बनाने की योजना, बजट में रीसाइक्लिंग और सर्कुलर अर्थव्यवस्था पर बड़ा दांव

Sat, 07 Feb 2026 04:45 AM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

बजट में अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के लिए रीसाइक्लिंग और सर्कुलर अर्थव्यवस्था पर जोर दिया गया है। बैटरी और ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग को बढ़ावा, एमएसई उद्यमियों को प्रोत्साहन और कम कार्बन तकनीक अपनाने के प्रावधान किए गए हैं। आइए विस्तार से पूरी जानकारी को समझते हैं।
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सरकार ने किया ई-वेस्ट की समस्या का हल। - फोटो : freepik
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विस्तार
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केंद्र सरकार ने इस बार के बजट में अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए रीसाइक्लिंग मॉडल पर बड़ा जोर दिया है। निर्माण-उपयोग-कचरा की पुरानी व्यवस्था से आगे बढ़ते हुए अब निर्माण-उपयोग-पुनर्चक्रण मॉडल को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह पहल विकसित भारत 2047 और नेट जीरो 2070 के लक्ष्य से जुड़ी मानी जा रही है। बजट प्रावधानों के जरिए संसाधनों के दोबारा उपयोग और कचरे को संपत्ति में बदलने पर फोकस रखा गया है।
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रीसाइक्लिंग और सर्कुलर अर्थव्यवस्था पर फोकस
सरकार सर्कुलर अर्थव्यवस्था मॉडल को आगे बढ़ा रही है, जिसमें कच्चे माल का बार-बार उपयोग हो सके। बढ़ते कचरे और कार्बन उत्सर्जन की समस्या से निपटने के लिए बैटरी और ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग को प्रोत्साहन दिया गया है। इससे आयातित कच्चे माल पर निर्भरता घटाने का लक्ष्य है। अपशिष्ट प्रबंधन को उद्योग और निवेश से जोड़कर नई आर्थिक गतिविधि बनाने की भी योजना है।

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उद्यमियों को वित्तीय प्रोत्साहन
एमएसई स्पाईस योजना के तहत रीसाइक्लिंग और अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े उद्यमियों को वित्तीय राहत और प्रोत्साहन जारी रखा गया है। इसमें प्लास्टिक, रबर, इलेक्ट्रॉनिक कचरा, बायोगैस, सौर पैनल और स्क्रैप मेटल जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले कारोबारी शामिल हैं। सरकार चाहती है कि छोटे और मध्यम उद्यम इस क्षेत्र में आगे आएं। इससे रोजगार और हरित उद्योग दोनों को बढ़ावा मिलेगा।

रेयर अर्थ मैग्नेट पर बड़ी योजना
इलेक्ट्रिक वाहन मोटर और पवन टर्बाइन जनरेटर के लिए रेयर अर्थ मैग्नेट जरूरी होते हैं। इसके लिए 7,280 करोड़ रुपये की रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट विनिर्माण योजना शुरू की जाएगी। इसके तहत खनन, प्रोसेसिंग, शोध और निर्माण के लिए समर्पित कॉरिडोर विकसित होगा। इससे स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती मिलेगी। आयात पर निर्भरता घटेगी और रक्षा आपूर्ति शृंखला भी मजबूत होगी।

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कम कार्बन तकनीक और उद्योग सुधार
बजट में केमिकल सेक्टर सहित प्रमुख उद्योगों में कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन और स्टोरेज तकनीक के लिए अगले पांच साल में 20,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसका उपयोग उत्सर्जन कम करने, अपशिष्ट शोधन और ऊर्जा दक्षता बढ़ाने में होगा। अधिक प्रदूषण वाले क्षेत्रों में कम कार्बन उत्सर्जन तकनीक अपनाने पर जोर दिया गया है।

ई-वेस्ट चुनौती और बैटरी स्क्रैप छूट
अनुमान है कि वर्ष 2030 तक देश में ई-वेस्ट 1.4 करोड़ मीट्रिक टन तक पहुंच सकता है। इसे संभालना बड़ी चुनौती होगा। इसी को देखते हुए लिथियम-आयन बैटरी स्क्रैप पर सीमा शुल्क छूट दी गई है ताकि रीसाइक्लिंग उद्योग को बढ़ावा मिले। नीति स्तर पर रीसाइक्लिंग मॉडल को मजबूत करने के सुझावों को भी बजट प्रावधानों में शामिल किया गया है।

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