आंध्र प्रदेश में प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी (CPI Maoist) में लड़कियों की भर्ती का मामला सामने आया है। इस केस में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने पांच लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया है। इसमें संगठन पर आरोप लगाया गया है कि वह युवा लड़कियों की भर्ती कर उन्हें कट्टरपंथी बना रहा है।
एनआईए ने बयान जारी कर बताया कि सोमवार को आंध्र के विजयवाड़ा स्थित विशेष कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया गया। यह केस विशाखापत्तनम पुलिस ने इस साल के आरंभ में दायर किया था। इसके बाद जांच एनआईए को सौंपने पर दोबारा केस दायर किया गया।
आरोप पत्र में राधा नामक लड़की को भाकपा माओवादी के कैडर के रूप में भर्ती किए जाने का जिक्र है। शिकायत में कहा गया है कि आरोपी डोंगरी देवेंद्र, दुबासी स्वप्ना और चुक्का शिल्पा ने राधा को चैतन्य महिला संघ (सीएमएस) में शामिल होने के लिए प्रेरित किया और बाद में उसे कट्टरपंथी बनाकर भाकपा (माओवादी) के नेतृत्व में प्रतिबंधित संगठन में भर्ती करा दिया।
एनआईए के प्रवक्ता ने बताया कि भूमिगत माओवादियों, आरके (अब मृतक) उदय, अरुणा आदि इस संगठन के नेता थे। जांच में पाया गया कि आरोपी देवेंद्र राधा को इलाज के बहाने जंगल में ले गया था। वहां उदय और अरुणा ने उसे प्रतिबंधित संगठन में शामिल होने के लिए मजबूर किया। एनआईए का कहना है कि आरोपियों ने कुछ अन्य लड़कियों व अन्य को भी इस प्रतिबंधित संगठन में भर्ती किया।
प्रवक्ता ने कहा कि देवेंद्र ने सामाजिक कार्य के नाम पर भोलीभाली लड़कियों को सीएमएस की ओर आकर्षित किया था। मामले में किसी बड़ी साजिश की आशंका को देखते हुए सीएमएस और संगठन के अन्य नेताओं की भूमिका की जांच की जा रही है।
एनएससीएन-आईएम के कोषाध्यक्ष ने की जबरन वसूली
नगालैंड में एनएससीएन (इसाक मुइवा) गुट के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने संगठन के स्वयंभू कर्नल रायिलुंग नसरंगबे और उनकी पत्नी रूथ चावांग सहित अन्य के खिलाफ अभियोजन शिकायत यानी आरोप पत्र दायर किया है। एजेंसी ने नेशनलिस्ट सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड (एनएससीएन-आईएम) की ओर से चलाए जा रहे एक सुसंगठित जबरन वसूली रैकेट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले मे यह कार्रवाई की है। ईडी ने चार्जशीट में कहा है कि एनएससीएन-आईएम के कोषाध्यक्ष के रूप में नसरंगबे की ओर से भारी मात्रा में जबरन वसूली और अवैध कर सीधे एकत्र किया जा रहा था। जांच की उचित प्रक्रिया के बाद, पीएमएलए, 2002 की धारा 44 और 45 के तहत नागालैंड में दीमापुर की अदालत में अभियोजन शिकायत दर्ज की गई।