DoPT: 23 नवंबर को जारी गजट अधिसूचना में कहा गया था कि सीईआरटी को आरटीआई अधिनियम की दूसरी अनुसूची में शामिल किया गया है, जो इसे पारदर्शिता कानून के प्रावधानों से छूट देगा।
कार्मिक मंत्रालय ने सीईआरटी-इन को सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून से छूट देने के लिए विचार-विमर्श से संबंधित फाइल नोट का खुलासा करने से इनकार कर दिया है। सीईआरटी-इन देश की साइबर सुरक्षा निगरानी संस्था है।
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23 नवंबर को जारी गजट अधिसूचना में कहा गया था कि सीईआरटी को आरटीआई अधिनियम की दूसरी अनुसूची में शामिल किया गया है, जो इसे पारदर्शिता कानून के प्रावधानों से छूट देगा। बशर्ते आवेदक द्वारा मांगी गई जानकारी भ्रष्टाचार या मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों से संबंधित हो।
राष्ट्रमंडल मानवाधिकार पहल के निदेशक वेंकटेश नायक ने बताया कि उन्होंने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग से संपर्क कर सीईआरटी-इन को आरटीआई कानून से छूट प्राप्त संस्थाओं की सूची में शामिल करने से जुड़ी फाइल के नोट की मांग की थी। उन्होंने कहा कि अधिनियम की धारा 24 का हवाला देते हुए उन्हें सूचना देने से इनकार कर दिया गया।
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जवाब में मंत्रालय ने कहा, आरटीआई अधिनियम की धारा 24 में प्रावधान है कि इस अधिनियम में निहित कुछ भी आरटीआई अधिनियम की दूसरी अनुसूची में निर्दिष्ट खुफिया और सुरक्षा संगठनों पर लागू नहीं होगा। आरटीआई अधिनियम के दायरे से सीईआरटी-इन को छूट के प्रस्ताव को फाइल संख्या 1/3/2021-आईआर II में निपटाया गया है, जो आरटीआई अधिनियम, 2005 की दूसरी अनुसूची में संशोधन से संबंधित है।
इसमें कहा गया है कि सीईआरटी-इन सहित संबंधित संगठनों द्वारा उन्हें दूसरी अनुसूची में शामिल करने के लिए प्रदान की गई जानकारी गोपनीय प्रकृति की है और आरटीआई अधिनियम की धारा 8 (1) (ए) के तहत छूट प्राप्त है। यह धारा ऐसी सूचना के खुलासे से संबंधित है, जिसमें भारत की संप्रभुत्ता और अखंडता, देश की सुरक्षा, रणनीतिक, वैज्ञानिक या आर्थिक हित, दूसरे देश के साथ संबंध प्रभावित होते हैं या किसी अपराध को बढ़ावा मिलता है।