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अमेरिका में लगेगा किताबों पर प्रतिबंध के खिलाफ महाकुंभ, भारत सहित कई देशों में इन पुस्तकों पर बैन

Tue, 28 Aug 2018 09:33 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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अभी हाल ही में मलयाली पुस्तक मीशा पर प्रतिबंध लगाने की खबर चर्चा में आई थी। जिसमें लेखक पर आरोप लगा है कि उनके इस उपन्यास में मंदिर जाने वाली हिंदू महिलाओं और उनकी परंपराओं को गलत तरीके से दिखाया गया हैै। इसके बाद योग गुरु बाबा रामदेव के जीवन पर लिखी गई किताब 'गॉडमैन टू बिजनेस टायकून' पर प्रतिबंध को लेकर भी विवाद रहा। देश में अभी तक कई किताबों पर प्रतिबंध लगाने की मांग देखी गई है।

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इस तरह के विवाद से अमेरिका, बांग्लादेश सहित दुनिया के कई देश भी अछूते नहीं हैं। अब अमेरिका में तो प्रतिबंधित पुस्तकों को लेकर पूरा सप्ताह मनाने की तैयारी भी चल रही है। किताबों पर अलग-अलग वजहों से प्रतिबंध लगाया जा रहा है लेकिन उनके पाठकों की बड़ी संख्या होने से इस बात पर सवाल उठना लाजमी है कि आखिर किताबों पर प्रतिबंध क्यों? क्या यह सही है? क्या किताबों में अपनी राय लिखना या फिर क्रांतिकारी विचारों की झलक दिखाना उसपर प्रतिबंध के कारण हैं?

फिलहाल चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने अभी उस याचिका पर फैसला सुरक्षित कर लिया है जिसमें एस हरीश द्वारा लिखी गई मीशा के एक भाग को हटाने की मांग की गई है। इस पर सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि किताबों पर प्रतिबंध लगाने की संस्कृति से विचारों का मुक्त प्रवाह प्रभावित होता है और इसके खिलाफ तब तक कदम नहीं उठाना चाहिए जब तक यह धारा 292 का उल्लंघन न करे।
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क्या है धारा 292?

यह धारा अश्लीलता पर प्रतिबंध लगाती है। इसके तहत अगर किसी किताब में अश्लीलता जैसा कुछ पाया जाता है तो उस पर प्रतिबंध लगाया जाता है। वहीं योग गुरु बाबा रामदेव के जीवन पर लिखी किताब पर प्रतिबंध को निचली अदालत द्वारा खारिज किए जाने को लेकर भी विवाद चल रहा है।

अमेरिका में प्रतिबंधित किताबों की प्रदर्शनी

एक ओर जहां दुनिया भर में किताबों पर प्रतिबंध लग रहा है वहीं दूसरी तरफ अमेरिका में 23 सितंबर से 29 सितंबर तक एक खास तरह की किताबों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इस प्रदर्शनी में वही किताबें बिकेंगी जिनपर दुनिया के किसी ने किसी कोने में प्रतिबंध लगाया गया है। ऐसा वहां पहली बार नहीं हो रहा है। बल्कि 'बैन्ड बुक वीक' का यह 36वां सफल वार्षिक आयोजन होगा। इस आयोजन में दूर-दूर से लोग आते हैं।

30 साल से बिक रही किताब पर अचानक प्रतिबंध

भारत में भी एक ऐसी किताब पर प्रतिबंध लगाया गया जो पिछले 30 सालों से बिक रही थी। जिस किताब को लाखों लोगों ने पढ़ा। इस किताब में भगत सिंह को आतंकवादी बताया गया था।  जिसके खिलाफ जानेमाने इतिहासकारों रोमिला थापर, इरफान हबीब और अमर फारूकी जैसे करीब 102 लेखकों और शिक्षाविदों ने सफदर हाशमी मेमोरियल ट्रस्ट के तहत अपना विरोध दर्ज कराया।

किताब पर यह फैसला राज्यसभा के उपसभापति की आपत्ति के बाद लिया गया। यह किताब बिपन चंद्र, केएन पणिक्कर, मृदुला मुखर्जी, आदित्य मुखर्जी और सुचेता महाजन द्वारा लिखी गई थी।

प्रतिबंधित किताबों में हमेशा नए संदेश और क्रांतिकारी विचारों की झलक मिली

माना जाता है कि पुरानी सत्ता को हमेशा नए विचारों से खतरा महसूस होता है। जिसमें राजनीतिक, सामाजिक और अन्य कई तरह के कारण शामिल होते हैं। अभी तक जिन भी किताबों का विरोध किया गया या फिर जिन पर प्रतिबंध लगाया गया उनमें क्रांतिकारी विचार और नए संदेशों की झलक ही मिली है। इसमें बांग्लादेश की लेखिका तस्लीमा नसरीन और तमिल लेखक पेरूमल मुरूगन की किताबों भी शामिल हैं।
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इन किताबों पर भी लगा चुका है प्रतिबंध-

अगर उन किताबों की बात करें जिनपर पहले से ही प्रतिबंध लग चुका है, जिसके बाद वह चर्चा का विषय भी रहीं तो उनमें ये नाम शामिल हैं-

- द सैटेनिक वर्सेज

इस किताब के लेखक सलमान रुशदी हैं। इन्हें एशिया का सबसे विवादित लेखक माना जाता है। इस किताब में इस्लामी आस्था और मोहम्मद साहब का अपमान किया गया। जिसके बाद इसे भारत समेत कई देशों में बैन कर दिया गया।

- द ग्रेट सोल

यह किताब न्यूयॉर्क टाइम्स के पूर्व संपादक जोसेफ लेलीवेल्ड द्वारा लिखी गई है। इन्हें पुलित्जर पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है। इस किताब में महात्मा गांधी के अंतरंग किस्सों का जिक्र है। जिसे न पढ़ने लायक बताया गया।

- जिन्ना: इंडिया पार्टीशन इंडिपेंडेंस

यह किताब भारत के पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिन्हा ने साल 2009 में लिखी थी। इस किताब पर इसलिए प्रतिबंध लगाया गया क्योंकि इसमें जिन्नाह को सरदार पटेल और जवाहरलाल नेहरू से ज्यादा बेहतर बताया गया था। जिस वजह से यह लोगों को पसंद नहीं आई और इसे बैन किया गया।

- द हिंदूज: एन ऑल्टरनेटिव हिस्ट्री

इस किताब की लेखिका का नाम वेंडी डोनिगर है। उनकी लिखी इस किताब में हंदुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ का आरोप लगा है। साथ ही इसमें हिंदू देवी-देवताओं को भी गलत तरीके से चित्रित किया गया है। देश में इस किताब का विरोध कई धार्मिक समितियों ने किया। जिसके बाद इसपर तुरंत बैन लगाया गया।

- अंडरस्टैंडिंग इस्लाम थ्रू हदीस

इस किताब को भारतीय लेखक राम स्वरूप ने लिखा है। उनपर आरोप है कि उन्होंने अपनी किताब में इस्लाम को गलत तरीके से दर्शाया है। इस किताब पर मुस्लिम बोर्ड द्वारा आपत्ति जाहिर की गई थी। जिसके बाद किताब के प्रशासक को जेल भी जाना पड़ा।
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