रियल एस्टेट रेग्युलरटी अथॉरिटी बिल को राज्य सभा में पास
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मकान के खरीदारों को बड़ी राहत देते हुए राज्यसभा ने रियल एस्टेट बिल पारित कर दिया है। अब इसे लोकसभा में पारित होना है। रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) बिल में ग्राहकों के हितों की रक्षा करते हुए बिल्डरों, प्रमोटरों और डेवलपरों को कड़े प्रावधानों के दायरे में लाया गया है।
विधेयक के पारित होने के बाद शहरी विकास मंत्री एम वैंकेया नायडू ने कहा कि इससे रियल एस्टेट में पारदर्शिता आएगी और ठगी पर अंकुश लग सकेगा। एआईडीएमके को छोड़कर कांग्रेस समेत तमाम दलों ने विधेयक का समर्थन किया और यह ध्वनि मत से पारित हो गया।
विधेयक के कानून का रूप लेने के बाद किसी बिल्डर के लिए बिना रजिस्ट्रेशन कराए लुभावने विज्ञापन देकर ग्राहकों को फांसना आसान नहीं होगा। लुभावने वादे पूरे नहीं करने पर तीन साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है।
पुराने विधेयक में 20 संशोधनों को शामिल कर लिया गया है। संसद की स्थायी समिति और सेलेक्ट कमेटी के सुझावों को शामिल करने के बाद बिल के बारे में तमाम आशंकाओं को समाप्त करने की कोशिश की गई।
विधेयक के प्रावधानों के तहत अब आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया है। इसके लिए रेगुलेटरी अथॉरिटी बनेगी जो लेन-देन पर नजर रखने के अलावा विवादों का निपटारा भी करेगी।
विधेयक के प्रावधानों के अनुसार, किसी भी आठ अपार्टमेंट्स और 500 वर्गमीटर वाले परियोजना का रजिस्ट्रेशन कराने के बाद ही उसका विज्ञापन किया जा सकेगा। खरीदारों से पूर्व में वसूली गई राशि और भूमि लागत की 70 फीसदी राशि को बैंकों के एस्क्रो एकाउंट में रखना अनिवार्य होगा। तीस प्रतिशत राशि को बिल्डर हस्तांतरित कर सकते हैं।
पहले बैंक एकाउंट में 50 प्रतिशत राशि रखने का प्रावधान किया जा रहा था लेकिन संशोधनों के बाद इसे बढ़ाकर 70 प्रतिशत कर दिया गया। इस व्यवस्था के बाद पैसे लेने के बाद बिल्डर के लिए प्रोजेक्ट बंद करना मुश्किल होगा। प्रोजेक्ट में देर होने पर बिल्डरों के लिए ग्राहकों को ब्याज का भुगतान भी करना पड़ेगा।