सिस्टम में नगदी तरलता बढ़ाने के लिए रिजर्व बैंक 5 अरब डॉलर (34,761 करोड़ रुपये) डालेगा। ये नकदी बैंकों के साथ तीन साल के लिए विदेशी विनिमय प्रबंधन के जरिए डाली जाएगी। इस प्रावधान के तहत बैंक स्वैप अवधि के आखिर में आरबीआई को अमेरिकी डॉलर बेच सकेंगे। आरबीआई ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि दीर्घावधि के लिए नकदी तरलता बढ़ाने की योजना के तहत यह कदम उठाया जा रहा है।
बोली के तहत डॉलर विनिमय की सुविधा 26 मार्च को खोली जाएगी। प्रक्रिया में भाग लेने प्रतिभागी प्रीमियम के तौर पर बोली लगाएंगे, जो उन्हें आरबीआई को भुगतान करनी होगी। इसके लिए न्यूनतम बोली का आकर 2.5 करोड़ डॉलर यानी 173 करोड़ रुपये का होगा, जो 6.95 करोड़ रुपये गुणांक में होगा।