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RBI की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट: परिवारों पर कर्ज बढ़ा, अब जीडीपी का 45.5 फीसदी; लेकिन चीन से स्थिति बेहतर

Wed, 01 Jul 2026 05:26 AM IST
अमन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

आरबीआई की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट के अनुसार भारतीय परिवारों पर कुल कर्ज बढ़कर जीडीपी के 45.5 फीसदी पर पहुंच गया है। गैर-आवासीय खुदरा ऋण में तेज वृद्धि चिंता का विषय बनी हुई है, जबकि बैंकों का सकल एनपीए कई दशकों के सबसे निचले स्तर 1.8 फीसदी पर आ गया है।
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RBI - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गैर-आवासीय खुदरा ऋण में वृद्धि के कारण भारतीय परिवारों पर कुल कर्ज बढ़कर जीडीपी के 45.5 फीसदी तक पहुंच गया। वहीं, गैर-आवासीय खुदरा कर्ज मार्च, 2026 तक बढ़कर कुल ऋण का 58.4 फीसदी पहुंच गया। यह कर्ज आवास, कृषि और कारोबारी ऋणों की तुलना में तेजी से बढ़ रहा है। आरबीआई ने ताजा वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (एफएसआर) में कहा, सितंबर, 2023 से भारतीय परिवारों पर कर्ज का जीडीपी में हिस्सा उनके पांच वर्ष के औसत 42.9 फीसदी से ऊपर बना हुआ है। विशेषज्ञ परिवारों पर कर्ज में लगातार बढ़ोतरी को लेकर चिंता जताते रहे हैं। उनका मानना है कि परिवारों की आय का बड़ा हिस्सा ऐसे ऋणों की किस्त चुकाने में खर्च हो रहा है, जिनसे खरीदी गई संपत्तियों (जैसे वाहन) का मूल्य समय के साथ घटता जाता है। 
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चीन से बेहतर स्थिति
उभरती अर्थव्यवस्थाओं में घरेलू कर्ज के मामले में भारत चौथे स्थान पर काबिज है। थाइलैंड में परिवारों पर कर्ज जीडीपी का 87.3 फीसदी, मलयेशिया में 69.9 फीसदी और चीन में 59 फीसदी पहुंच गया है।

बड़े मूल्य वाले होम लोन की मांग बढ़ी
रिपोर्ट के मुताबिक, बैंकों के हाउसिंग लोन पोर्टफोलियो में बड़ा बदलाव देखा गया है। पहले 25 लाख रुपये की कर्ज सीमा से कम वाले बकाया लोन का दबदबा था, जो किफायती घरों पर फोकस को दिखाता है। हाल के वर्षों में ट्रेंड ज्यादा वैल्यू वाले सेगमेंट की ओर बढ़ा है। अब 50 लाख रुपये और उससे ज्यादा मूल्य के होम लोन का हिस्सा कुल बकाया कर्ज का 44.7 फीसदी हो गया है।
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एनपीए : कई दशक में सबसे कम
भारतीय बैंकों का कुल बुरा फंसा कर्ज यानी सकल एनपीए मार्च, 2026 तक घटकर 1.8 फीसदी के निचले स्तर पर आ गया है, जो कई दशकों में सबसे कम है। हालांकि, ईरान संकट जैसी चुनौतियों के बीच बेसलाइन आधार पर 46 बैंकों का सकल एनपीए मार्च, 2028 तक बढ़कर 1.9 फीसदी पहुंच सकता है। 

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ऊर्जा संकट अब भी बड़ा जोखिम
आरबीआई ने कहा, मजबूत आर्थिक आधार के बावजूद अर्थव्यवस्था ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति शृंखला में व्यवधान के प्रति संवेदनशील बनी हुई है। आयातित क्रूड पर निर्भरता इसे बाहरी झटकों के प्रति जोखिम में रखती है। अगर तेल में फिर तेजी आती है या आपूर्ति शृंखला सामान्य नहीं होती, तो रुपये में उथल-पुथल फिर बढ़ सकती है।
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