रवींद्र रैना जम्मू-कश्मीर में भाजपा के पर्याय बन गए थे। पिछले एक दशक से वे बहुत सक्रिय भूमिका में थे और जम्मू-कश्मीर में भारतीय जनता पार्टी को लगातार आगे बढ़ाने का काम कर रहे थे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक कार्यकर्ता के रूप में अपनी पारी की शुरुआत करने वाले रवींद्र रैना को पार्टी ने जम्मू-कश्मीर में पार्टी का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया था। इस चुनाव में उन्हें नौशेरा से चुनावी मैदान में उतारा गया था। लेकिन नेशनल कांफ्रेंस के सुरिंदर चौधरी के हाथों उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
रैना अपने पाकिस्तान और आतंकवाद विरोधी तेवर के लिए जाने जाते थे। इस बार चुनाव में भाजपा को जम्मू-कश्मीर से बहुत उम्मीदें थीं। लेकिन पार्टी को नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस के सामने हार का सामना करना पड़ा। भाजपा को सबसे ज्यादा निराशा जम्मू के हिंदू बहुल इलाकों से मिली जहां उसे लगभग क्लीन स्वीप करने का अनुमान था।
भाजपा को जम्मू क्षेत्र में बेहतर परिणाम मिले थे, लेकिन फिर भी यह उसकी अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं था। सबसे अधिक बुरा यह हुआ कि खुद रवींद्र रैना भी अपना चुनाव हार गए। पार्टी के सूत्र बताते हैं कि अपनी हार से निराश रैना ने चुनाव परिणाम सामने आने के बाद ही पार्टी नेतृत्व को अपने पद से इस्तीफा भेज दिया था। लेकिन अब पार्टी ने उस पर संज्ञान लेते हुए नया अध्यक्ष नियुक्त कर दिया है।