कनाडा और भारत के बीच बीते एक साल से तनाव बना हुआ है। रिश्ते सुधरने की बाजाय लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। हाल के दिनों में कनाडा ने भारत के खिलाफ बिना सबूत के कई बेतुके आरोप लगाए हैं। अब इस मामले पर विशेषज्ञों ने राय दी है। उन्होंने कहा कि कनाडा तनाव कम करने पर विचार नहीं कर रहा है। अगर ऐसा होता तो वो कूटनीतिक तरीके से निपटता न कि निगरानी करके।
यह है मामला
दरअसल, पिछले साल खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद कनाडा-भारत के रिश्तों में खटास आई है। यहां तक कि कनाडा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ बेतुके आरोप लगाए, जिस पर भारत भड़क गया और चेतावनी दी है कि इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना हरकतों के द्विपक्षीय संबंधों पर गंभीर परिणाम होंगे। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कनाडाई उच्चायोग के प्रतिनिधि को तलब करते हुए कड़ा विरोध भी जताया है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी बुधवार को भारत-कनाडा संबंधों पर संसदीय पैनल को जानकारी देंगे।
क्या बोले केपी फैबियन?
रक्षा विशेषज्ञ केपी फैबियन ने कहा, 'आप देख सकते हैं कि विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कनाडाई उच्चायोग के प्रतिनिधि का जिक्र किया। परंपरागत रूप से, आप उच्चायोग, राजदूत या सीडीए को बुलाते हैं। इस मामले में, प्रतिनिधि की भूमिका महत्वपूर्ण है। कार्यवाहक उच्चायुक्त को एक सप्ताह पहले समन भेजा गया था। कार्यवाहक उच्चायुक्त सहित कनाडाई राजनयिकों को समन भेजकर उन्हें जाने के लिए कहा गया था।'
'तनाव कम करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिख रही'
उन्होंने कहा, 'चलिए मान लेते हैं कि कनाडा के पास भारत के गृह मंत्री की संभावित संलिप्तता पर विश्वास करने का कोई सही कारण था तो उन्हे मीडिया के पास जाने के बजाय कूटनीतिक माध्यम से बात करनी चाहिए थी। इससे पता चलता है कि कनाडा की वर्तमान सरकार तनाव कम करने की कोशिश नहीं कर रही है और यह एक अच्छा विचार नहीं है। मुझे तनाव कम करने में किसी भी तरह की दिलचस्पी नहीं दिखती। कुछ वाणिज्य दूतावास अधिकारियों को ऑडियो-वीडियो निगरानी में रखा गया था। कनाडा को कूटनीतिक तरीके से इससे निपटना चाहिए न कि उन पर निगरानी रखनी चाहिए। कनाडा कूटनीतिक मानदंडों के विपरीत काम कर रहा है।
भारतीय राजनयिकों के बारे में जानकारी इकट्ठा कर रही कनाडाई खुफिया एजेंसी
भारत-कनाडा संबंधों पर विदेश मामलों के विशेषज्ञ रोबिंदर सचदेव ने कहा, 'भारत जो कह रहा वह यह है कि कनाडाई खुफिया एजेंसियां भारतीय राजनयिकों के बारे में खुफिया जानकारी इकट्ठा कर रही हैं। मेरा कहना यह है कि इन सभी विदेशी प्रभावों और उनकी खुफिया जानकारी की नाकामयाबी के बारे में अभी कनाडा में एक जांच आयोग चल रहा है। कनाडाई खुफिया एजेंसियों की जांच की जानी चाहिए कि वे इन गतिविधियों को कैसे अंजाम दे रहे हैं।'
'भारत को पीछे धकेलने की कोशिश'
उन्होंने आगे कहा, 'कनाडा की संसद को पता होना चाहिए कि उसकी खुफिया एजेंसियां कैसे काम कर रही है। हो सकता है कि कुछ खामियां हों... हो सकता है कि कुछ विदेशी शक्तियों ने खुफिया एजेंसियों को प्रभावित किया हो... ऐसा लगता है कि कनाडा भारत को सबक सिखाना चाहता है। वे हमारे खिलाफ वैश्विक दुष्प्रचार कर रहे हैं। शायद वे भारत को पीछे धकेलने की कोशिश कर रहे हैं और पश्चिम, विशेष रूप से अमेरिका और इंग्लैंड को दिखा रहे हैं कि भारत हमारे पश्चिमी वर्चस्व वाले व्यवस्था के लिए खतरा बन रहा है।'