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महिला आरक्षण बिल पास कराने के लिए सरकार ने राहुल गांधी को दी एक 'नई डील'

Wed, 18 Jul 2018 12:26 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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नरेंद्र मोदी व राहुल गांधी - फोटो : amar ujala
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सरकार ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के सामने शर्त रखी है कि अगर वह संसद में तीन तलाक और निकाह हलाला से संबंधित बिल का समर्थन करेंगे तो सरकार महिला आरक्षण पर कांग्रेस का साथ देगी। कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने मंगलवार को राहुल गांधी को पत्र लिखकर सभी महिलाओं के लिए एक समान नजरिया रखने की पेशकश की है। इसके जवाब में कांग्रेस ने कहा है कि कानून मंत्री बिलों को लेकर सौदेबाजी पर उतर आए हैं।  

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गौरतलब है कि राहुल गांधी ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत लिख कर संसद और विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण संबंधी बिल को समर्थन देने की गुजारिश की थी। रविशंकर प्रसाद ने सोमवार को उस खत का जवाब देते हुए तीन तलाक और निकाह हलाला पर समर्थन की मांग कर गेंद को फिर कांग्रेस केपाले में डाल दिया।

रविशंकर प्रसाद ने इस मामले में एक नई डील की पेशकश करते हुए कहा कि महिलाओं की समानता और उसकी पर्याप्त भागीदारी केलिए भाजपा और कांग्रेस को साथ आना चाहिए। इस नए डील के तहत महिला आरक्षण के साथ तीन तलाक और निकाह हलाला पर दोनों को कानून का समर्थन करना चाहिए।
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कानून मंत्री ने लिखा है कि तीन तलाक और निकाह हलाला जैसे मसले मुसलिम महिलाओं के अधिकार से नहीं बल्कि उनके सममान से भी जुड़ा है। खत में राहुल पर तंज कसते हुए कानून मंत्री ने कहा है कि महिलाओं और उनके अधिकार के संबंध में दोहरा रवैया नहीं होना चाहिए। 
--- गुंजन कुमार



अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने 1998 और 1999 में महिला आरक्षण विधेयक पेश किया था। लेकिन विपक्ष से समर्थन नहीं मिलने के कारण विधेयक पास नहीं हो सका था। गौरतलब है कि एनडीए सरकार ने 2002 में एक बार और 2003 में दो बार महिला आरक्षण विधेयक पेश किया, लेकिन सदन में एनडीए के बहुमत के बावजूद विधेयक पास नहीं हो सका।

इस बीच राहुल गांधी ने 16 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर 18 जुलाई से शुरू हो रहे मॉनसून सत्र में महिला आरक्षण विधेयक पास करने की मांग रखी है। इस विधेयक के पास हो जाने पर संसद और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था है। 
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राहुल ने पीएम से कहा कि लोकसभा में उनका बहुमत है, ऐसे में वह 2014 के अपने चुनावी घोषणापत्र के वादे को पूरा करें। राहुल की इस मांग के बाद बीजेपी ने एक बार फिर गेंद कांग्रेस के पाले में डाल दी है। 
 

 
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