इस्राइली सॉफ्टवेयर द्वारा जासूसी प्रकरण मुद्दे पर गुरुवार को राज्यसभा में चर्चा के दौरान सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर ने सदन को बताया कि व्हाट्सएप सुरक्षा प्रणाली को सरकार परखना चाहती है। सरकार इसकी कमजोरियों की जांच करना चाहती है। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि क्या सरकार ने कोई जासूसी वाला स्पाइवेयर खरीदा है कि नहीं।
इसके साथ ही उन्होंने उच्च सदन को बताया कि व्हाट्सएप जैसे मैसेजिंग प्लेटफार्मों पर नागरिकों की निजता और सुरक्षा के प्रति सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सरकार डाटा प्रोटेक्शन कानून पर काम कर रही है, जिसे जल्द ही संसद में पेश किया जाएगा।
जासूसी प्रकरण पर हुई बहस के दौरान रविशंकर ने बताया कि भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी सीईआरटी-इन ने नौ नवंबर को व्हाट्सएप को स्पष्ट कह दिया है कि वह उसके पूरे सिस्टम की जांच करना चाहती है। इस मामले पर 18 नवंबर को व्हाट्सएप से मिले जवाब पर उससे 26 नवंबर को और सफाई और जानकारी मांगी है।
वहीं सीईआरटी-इन ने 26 नवंबर को एनएसओ को भी एक पत्र भेजकर भारतीय उपभोक्ताओं पर मालवेयर के असर की विस्तृत जानकारी मांगी है। इसके साथ ही उन्होंने सभी डिजिटल सेवादाताओं को कहा है कि वह अपनी सेवाओं को सुरक्षित करें, ऐसा न करने पर उन पर कार्रवाई होगी।
हालांकि उन्होंने वरिष्ठ कांग्रेसी नेता दिग्विजय के बार बार पूछे जाने वाले सवाल का सीधा जवाब नहीं दिया। दिग्विजय बार बार यह पूछ रहे थे कि क्या सरकार ने इस्राइल की कंपनी एनएसओ से जासूसी वाला पेगासस स्पाइवेयर खरीदा है।
वहीं व्हाट्सएप के अधिकारियों की गृहमंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात के दिग्विजय के सवाल का जवाब देते उन्होंने बताया कि व्हाट्सएप के प्रतिनिधि सरकारी अधिकारियों से मिलते रहते हैं। इसी के तहत वह गृहमंत्रालय के अधिकारियों से भी मिले होंगे। मालूम हो कि व्हाट्सएप ने पिछले महीने इस्राइली कंपनी एनएसओ पर मामला दर्ज कराया था।