पर्यटन स्थलों पर टूरिज्म को बढ़ाने के लिए सरकार 'गौ कनेक्शन' का सहारा लेने जा रही है। पहले चरण में देश के 10 बड़े धार्मिक पर्यटक स्थलों में गौशालाओं का चयन किया गया है। यहां गौ पर्यटन केंद्र तैयार किए जाएंगे। गौशालाओं में ओपन एयर थिएटर और लाइट एंड साउंड शो के जरिए गाय के धार्मिक, आध्यात्मिक, पर्यावरण, कृषि, आरोग्य के उपयोगों को बताया जाएगा। केंद्र में रिसर्च सेंटर और पंचगव्य चिकित्सालय का भी निर्माण होगा।
राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के अध्यक्ष वल्लभभाई कथीरिया ने अमर उजाला से कहा कि 'गौ पर्यटन' को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पहले चरण में 10 बड़े पर्यटन स्थलों में बनी गौशालाओं को गौ-पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इसे लेकर केंद्रीय पर्यटन संस्कृति मंत्रालय को हमने एक विस्तृत प्रारूप सौंप दिया हैं। मंत्रालय ने हमारे प्रारूप पर काम भी करना शुरू कर दिया हैं। पहले चरण में तिरुपति, सोमनाथ, द्वारिका, मथुरा, वाराणसी, दिल्ली, पंजाब के बड़े पर्यटन स्थलों के पास की गौशालाओं का चयन हमने किया है।
पर्यटन मंत्रालय एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, 'राष्ट्रीय कामधेनु आयोग की तरफ से हमें पर्यटन स्थलों पर गौ पर्यटन केंद्र का प्रस्ताव मिला है। इस दिशा में कुछ पर्यटक स्थलों का चयन किया है। आगामी दिनों इसे लेकर कामधेनु आयोग के साथ बैठक भी होगी।'
कथीरिया ने आगे कहा कि गौ पर्यटन से विदेश में गाय के महत्व का पता चलेगा। पर्यटन स्थलों पर आने वाले पर्यटकों गौशालाओं में ओपन एयर थिएटेर और लाइट एंड साउंड शो के जरिए गाय के धार्मिक, आध्यात्मिक, पर्यारण, कृषि, आरोग्य के उपयोगों को बताया जाएगा। सभी स्थानों पर रिसर्च सेंटर और पंचगव्य चिकित्सालय का भी निर्माण होगा। इन स्थानों पर गौ साहित्य और गौ उत्पाद भी सस्ते दामों पर उलपब्ध करवाए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि गौशालाओं को एक मॉडल गौशालाओं के तौर में विकसित किया जाएगा। जिस जिस राज्य में ये आदर्श गौशालाएं बनेंगी, इसमें उस राज्य की सभी नस्लों की गाय होंगी। गाय के दूध, गोबर, गौमूत्र से निर्माण होने वाले सभी प्रोडक्ट्स की अलग-अलग मैन्युफैक्चरिंग यूनिट तैयार की जाएंगी। पंचगव्य दवाईयां भी तैयार की जाएंगी। विदेशी शोधकर्ताओं को आकर्षित करने के लिए देसी गायों के महत्व का भी प्रचार किया जाएगा।
गौ पर्यटन केंद्र के निर्माण में आने वाले खर्चों के सवाल का जवाब देते हुए कथीरिया ने कहा कि इन केंद्रों का निर्माण करने में एक नहीं बल्कि कई मंत्रालय का सहयोग मिलेगा। गौशालाओं में जो प्रोजेक्ट्स चलेंगे संबंधित मंत्रालय जैसे पशुपालन और डेयरी मंत्रालय, कृषि मंत्रालय, नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, स्कीम डेवलपमेंट मंत्रालय और पेट्रोलियम मंत्रालय की स्कीमों के अनुसार हमें ग्रांट मिलेगी। इसके जरिए हम सभी गौशालाओं के प्रोजेक्टस चला सकेंगे। वहीं संबंधित राज्य सरकारों से भी हम गौ पर्यटन केंद्र विकसित करने में भी मदद लेंगे।