इसे समय का खेल ही कहिए कि अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए जिन लोगों ने अपनी पूरी जिंदगी लड़ाई लड़ी, वहीं इसके भूमि पूजन समारोह से दूर रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट में राम लला पक्ष के पैरोकार रहे प्रसिद्द वकील के. परासरन अपनी ज्यादा आयु और स्वास्थ्य कारणों से अयोध्या के राममंदिर भूमि पूजन समारोह में शामिल नहीं होंगे।
वे ऑनलाइन माध्यम से इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। ‘भाजपा के लौहपुरुष’ कहे जाने वाले लालकृष्ण आडवाणी और डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी भी ऑनलाइन माध्यम से ही कार्यक्रम में शामिल होंगे। कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए ज्यादा आयु के लोगों को समारोह की भीड़ से दूर रखने की नीति बनाई गई है और इसी के तहत इन दिग्गजों को कार्यक्रम में शारीरिक रूप से उपस्थित रहने से रोका गया है।
बजरंग दल के अध्यक्ष के तौर पर राममंदिर आंदोलन में बड़ी भूमिका निभाने वाले विनय कटियार ने स्वयं ही स्वास्थ्य कारणों से समारोह में न शामिल हो पाने के लिए जानकारी दे दी है। इसी प्रकार भाजपा की तत्कालीन फायर ब्रांड नेता रहीं उमा भारती ने भी अयोध्या के कार्यक्रम में न जा पाने की मजबूरी बताई है। उत्तर प्रदेश में भाजपा के पोस्टर बॉय रहे कल्याण सिंह भी इस कार्यक्रम से दूर रहेंगे।
अशोक सिंघल के बाद विश्व हिन्दू परिषद के अध्यक्ष रहते हुए राममंदिर आंदोलन में बड़ी भूमिका निभाने वाले डॉक्टर प्रवीण तोगड़िया वैचारिक मतभेद के कारण पहले ही संघ परिवार से दूर हो चुके हैं। उन्हें भी इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित नहीं किया गया है, जबकि कभी अपनी तेज तर्रार आवाज के कारण वे हमेशा मीडिया की सुर्ख़ियों में रहा करते थे। वे अब अपना संगठन चलाते हैं और समय-समय पर अपना विचार रखते रहते हैं।
हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, बाबा रामदेव, साध्वी ऋतंभरा सहित देश के कोने-कोने से सैकड़ों प्रमुख संत इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए आमंत्रित किए गए हैं। मंदिर का भूमि पूजन पांच अगस्त को प्रधानमंत्री के हाथों किया जाएगा।