राम मंदिर का शिलान्यास
- फोटो : AMAR UJALA
भगवान राम के जन्म को लेकर कई मान्यताएं हैं, कई लोग महर्षि वाल्मीकि की रामायण में बताए गए समय को ही भगवान राम का जन्म समय मानते हैं लेकिन रामायण पर किए शोध के आधार यह बात सामने निकलकर आई है कि राम का जन्म 5,114 ईसा पूर्व 10 जनवरी को दोपहर 12.05 पर हुआ था।
वाल्मीकि के अनुसार श्रीराम का जन्म चैत्र शुक्ल नवमी तिथि को हुआ था या फिर पुनर्वसु नक्षत्र में जब पांच ग्रह अपने उच्च स्थान में थे तब हुआ था। इस प्रकार सूर्य मेष में 10 डिग्री, मंगल मकर में 28 डिग्री, ब्रहस्पति कर्क में 5 डिग्री पर, शुक्र मीन में 27 डिग्री पर एवं शनि तुला राशि में 20 डिग्री पर था।
इस स्थिति पर अलग-अलग शोधकर्ताओं का अलग-अलग मत है। डॉ. वर्तक के अनुसार ऐसी स्थिति 7,323 ईसा पूर्व दिसंबर में ही बनी थी लेकिन प्रोफेसर तोबयस का मानना बै कि जन्म के ग्रहों के विन्यास के आधार पर राम का जन्म 7,130 वर्ष पूर्व यानि कि दस जनवरी 5,114 ईसा पूर्व हुआ था।
आइए जानते हैं कि भगवान राम के जन्म को लेकर वेदों में क्या लिखा है...
राम मंदिर का शिलान्यास
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पौराणिक कथाओं में बताया गया कि भगवान राम का जन्म 24वें त्रेतायुग में हुआ था। महाभारत में कहा गया है कि भगवान राम त्रेता युग और द्वापर युग के बीच हुए बदलाव में जीवित थे। वाल्मीकि रामायण और राम की जीवनी पर बनी दूसरी किताबों के अलावा वायु पुराण, महाभारत, हरिवंश और ब्रह्मानंद पुराण में भगवान राम के जन्म के बारे में बताया गया है।
जिन लोगों को इन पौराणिक बातों पर विश्वास नहीं होता, जिनके लिए ये सब बातें घिसी-पिटी सी होती है, उनके लिए विज्ञान का तर्क भी सामने हैं। विज्ञान ने भी भगवान राम के जन्म पर कुछ तथ्य सामने रखे हैं, आइए उन्हें भी जान लेते हैं...
भगवान राम के जन्म पर क्या कहता है विज्ञान?
इंस्टीट्यूट ऑफ साइंटिफिक रिसर्च ऑन वेद (I-SERVE) के प्लैनेटेरियम सॉफ्टवेयर के मुताबिक भगवान राम का जन्म अयोध्या में दस जनवरी 5,114 ईसा पूर्व को हुआ था, जैसा कि कई शोधकर्ता भी मान चुके हैं। भारतीय कैलेंडर के मुताबिक भगवान राम के जन्म का समय दोपहर 12 से एक बजे के बीच में है।
इसके अलावा संस्थान ने भारतीय पौराणिक कथाओं में कई अन्य प्राचीन घटनाओं की पुष्टि करने में भी सफलता का दावा किया है, जो 2000 ईसा पूर्व से पहले तारामंडल (प्लैनेटेरियम) सॉफ्टवेयर का उपयोग करके हुई थी। इस संस्थान के शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि वाल्मीकि ने रामायण में जो ग्रहों की स्थिति का वर्णन किया है, उसी के आधार पर राम की जन्मतिथि निकाली गई है।
राम मंदिर का शिलान्यास
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