प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश की ओर से राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को लिखे पत्र के हर शब्द को लोकतंत्र के प्रति आस्था को नया विश्वास देने वाला बताते हुए कहा कि इसमें सच्चाई के साथ-साथ संवेदनाए भी हैं और देशवासियों को इसे जरूर पढ़ना चाहिए। वहीं केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने उनके पत्र को भारत की राजनीति और लोकनीति की अमूल्य धरोहर बताया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने पत्र की प्रति ट्वीटर पर साझा करते हुए कहा, 'माननीय राष्ट्रपति जी को माननीय हरिवंश जी ने जो पत्र लिखा, उसे मैंने पढ़ा। पत्र के एक-एक शब्द ने लोकतंत्र के प्रति हमारी आस्था को नया विश्वास दिया है। यह पत्र प्रेरक भी है और प्रशंसनीय भी। इसमें सच्चाई भी है और संवेदनाएं भी। मेरा आग्रह है, सभी देशवासी इसे जरूर पढ़ें।'
वहीं कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा, 'माननीय हरिवंश जी! आपका ह्रदय से अभिनंदन। राज्यसभा में उपसभापति पद पर हुए अपमान से आप आहत हैं और पूरा देश भी। महामहिम राष्ट्रपति को लिखा आपका पत्र बहुत प्रेरणादायी है। मर्यादा, शिष्टाचार, गरिमामय भाषा और मिट्टी से जुड़े अपने परिवेश का जो परिचय आपने दिया है वही आपको वो शक्ति देता है कि इस पीड़ा के समय भी आप गांधी जी के रास्ते पर चलें और उपवास रखें।'
रविशंकर ने आगे कहा, 'आपका ये पत्र सर्जना, प्रेरणा और प्रखर बौद्धिकता से भरा हुआ है जिसमें एक दर्द भी है कि संसद की गरिमा लोकतंत्र के लिए जरूरी है। ये पत्र भारत की राजनीति और लोकनीति का अमूल्य धरोहर है। आपका पुनः अभिनंदन।'
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मालूम हो कि रविवार को उच्च सदन में कृषि संबंधी विधेयकों को पारित किए जाने के दौरान भारी हंगामा हुआ था। इस विरोध के बावजूद किसान उत्पादन व्यापार एवं वाणिज्य (प्रोत्साहन एवं सुविधा) विधेयक 2020 तथा किसान (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) मूल्य आश्वासन का समझौता एवं कृषि सेवा विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया था।
अगले दिन (सोमवार) को अमर्यादित व्यवहार के कारण विपक्षी दलों के आठ सदस्यों को शेष सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया जिसके विरोध में आठों निलंबित सदस्य संसद भवन परिसर में ही अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए।
राष्ट्रपति को लिखे पत्र में हरिवंश ने विपक्षी सदस्यों के कथित आपत्तिजनक आचरण पर गहरी पीड़ा जताई है और घोषणा की कि वह 24 घंटे का उपवास करेंगे। पत्र में उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे आपत्तिजनक आचरण करने वाले सदस्यों में आत्म-शुद्धि का भाव जागृत होगा।
उन्होंने कहा, '20 सितंबर को राज्यसभा में जो कुछ भी हुआ, उससे पिछले दो दिनों से गहरी आत्मपीड़ा, आत्मतनाव और मानसिक वेदना में हूं। पूरी रात सो नहीं पाया। उच्च सदन में जो दृश्य उत्पन्न हुआ, उससे सदन और आसन की मर्यादा को अकल्पनीय क्षति हुई है।'