कर्नाटक में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर शुक्रवार को राज्यसभा में जमकर हंगामा हुआ। दरअसल भाजपा सदस्यों ने शून्यकाल के दौरान कर्नाटक में कथित भ्रष्टाचार के मुद्दे को उठाने की मांग की, जिसे सभापति जगदीप धनखड़ ने खारिज कर दिया, हालांकि एक सदस्य को इस मुद्दे पर बोलने की अनुमति दे दी। इस पर विपक्ष नाराज हो गया और उसने शून्यकाल में बोलने की अनुमति देने पर विरोध जताया। इसके चलते दोनों तरफ से शोर-शराबा शुरू हो गया।
किस मुद्दे पर हुआ शोर-शराबा
राज्यसभा में भाजपा सांसदों इरन्ना कडाडी, बृज लाल, नरेश बंसल और सुधांशु त्रिवेदी ने नोटिस देकर कर्नाटक महर्षि वाल्मिकी जनजातीय विकास निगम में हुए कथित भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बोलने की इजाजत मांगी। हालांकि सभापति जगदीप धनखड़ ने राज्यसभा के नियम 267 के तहत सत्ता पक्ष के नोटिसों को खारिज कर दिया। सभापति ने कहा कि नियम 267 के तहत दिए गए नोटिस किसी भी ऐसे मुद्दे पर नहीं हैं, जिन पर तुरंत चर्चा करना जरूरी हो। ऐसे में सभी नोटिस खारिज किए जाते हैं। इस पर सत्ता पक्ष ने आपत्ति जताई। हालांकि सभापति धनखड़ ने भाजपा सांसद इरन्ना कडाडी को शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे पर बोलने की इजाजत दे दी।
विपक्ष ने शून्यकाल में कडाडी को बोलने की इजाजत देने पर जताया विरोध
जब कडाडी ने कर्नाटक के कथित भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बोलना शुरू किया तो कांग्रेस के सदस्यों ने विरोध करना शुरू कर दिया। कांग्रेस सांसदों का कहना था कि शून्यकाल में बोलने वालों में इरन्ना कडाडी का नाम शामिल नहीं था, ऐसे में उन्हें बोलने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। कांग्रेस सांसद पी चिदंबरम ने इस पर आपत्ति जताई और कहा कि कडाडी किसी और दिन इस मुद्दे पर बोले सकते हैं। इसके बाद सत्ता और विपक्ष दोनों तरफ से हंगामा शुरू हो गया। सभापति ने दोनों पक्षों को शांत करने की कोशिश की, लेकिन हंगामा बढ़ता गया। बाद में कडाडी ने कर्नाटक में हुए कथित भ्रष्टाचार के मुद्दे पर अपनी बात रखी।
क्या है घोटाला
कर्नाटक की महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में लेखा विभाग के अधीक्षक चंद्रशेखर पी ने बीती 26 मई को आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने एक सुसाइड नोट छोड़ा था। इसके बाद निगम में बड़ा घोटाला सामने आया। नोट में आरोप लगाया गया कि निगम के खाते से 187 करोड़ रुपये अवैध तरीके से ट्रांसफर किए गए। इसमें से 88.62 करोड़ रुपये आईटी कंपनी और हैदराबाद की एक सहकारी बैंक में अवैध रूप से भेजे गए। घोटाले का आरोप लगने के बाद अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री बी नागेंद्र ने छह जून को इस्तीफा दे दिया था। मौजूदा समय में वे ईडी की हिरासत में हैं।