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Rajya Sabha: 'ऑपरेशन सिंदूर निर्णायक था या नहीं? समय बताएगा', चिदंबरम ने सरकार को घेरा; DMK-AAP ने भी किए सवाल

Tue, 29 Jul 2025 10:14 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

Rajya Sabha: कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने राज्यसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान पाकिस्तान के साथ संघर्षविराम को सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि भारत अब चीन और पाकिस्तान के संयुक्त मोर्चे से जूझ रहा है और सरकार के पास इससे निपटने की ठोस योजना होनी चाहिए। विपक्षी सांसदों तिरुचि शिवा और संजय सिंह ने कर्नल सोफिया कुरैशी पर मध्य प्रदेश के मंत्री के आपत्तिजनक बयान की निंदा की और प्रधानमंत्री की चुप्पी को मौन समर्थन करार दिया और उन्होंने इसे भारतीय सेना की बेटी का अपमान बताया।
 
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संजय सिंह, पी चिदंबरम, तिरुचि शिवा - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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कांग्रेस नेता और पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने मंगलवार को सरकार के उस कदम की आलोचना की, जिसमें भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के सफल होने के बावजूद पाकिस्तान के साथ संघर्षविराम पर सहमति जताई। वह राज्यसभा में पहलगाम हमले के बाद 'ऑपरेशन सिंदूर' पर विशेष चर्चा में बोल रहे ते। 
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चिदंबरम ने कहा, ऑपरेशन सिंदूर सफल था, लेकिन निर्णायक था या नहीं, यह समय बताएगा। कांग्रेस सांसद ने आगे कहा, ऑपरेशन सिंदूर शक्तिशाली और कामयाब रहा लेकिन यह निर्णायक था या नहीं, इसका जवाब वक्त ही दे सकता है। उन्होंने कहा, अगर आप मुझसे पूछें कि क्या ऑपरेशन सिंदूर मजबूत था? तो मेरा जवाब हां है। क्या यह सफल रहा? हां। लेकिन क्या यह निर्णायक था? तो मैं कहूंगा कि इसका जवाब समय बताएगा। 

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चिदंबरम ने इस दौरान भारतीय सेना की क्षमता की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि सेना ने जिस तरह से स्थिति को संभाला, वह प्रशंसनीय है। लेकिन उन्होंने सवाल किया कि अगर ऑपरेशन सफल था तो संघर्षविराम क्यों किया गया? पूर्व गृहमंत्री ने सरकार से पूछा कि अगर ऑपरेशन सिंदूर सफल रहा, तो फिर पाकिस्तान के साथ संघर्षविराम पर सहमति क्यों जताई गई? उन्होंने इस फैसले को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए।

उन्होंने कहा कि अब भारत एक साथ कई मौर्चे पर संघर्ष कर रहा है। चिदंबरम ने कहा, अब भारत केवल एक या दो मोर्चों पर युद्ध नहीं लड़ रहा है, बल्कि पाकिस्तान और चीन मिलकर एक संयुक्त मोर्चा बना चुके हैं। क्या सरकार के पास पाकिस्तान, चीन और अन्य भागीदारों के साथ इस संयुक्त मोर्चे से निपटने की कोई ठोस योजना है? उन्होंने यह भी पूछा कि सरकार ने दुनिया के कई देशों में प्रतिनिधिमंडल भेजे, लेकिन नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार और मालदीव जैसे पड़ोसी देशों में कोई प्रतिनिधिमंडल क्यों नहीं भेजा?

चिदंबरम ने कहा, दुनिया ने आतंकवाद की निंदा की, लेकिन किसी ने पाकिस्तान का नाम नहीं लिया। उन्होंने कहा कि पहलगाम हमले के बाद पूरी दुनिया ने आतंकवाद की निंदा की और भारत के पीड़ितों के प्रति सहानुभूति जताई, लेकिन किसी भी देश ने पाकिस्तान का नाम लेकर उसकी आलोचना नहीं की। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवाद को बढ़ावा देता रहा है, लेकिन भारत में हुए कई हमलों में घरेलू आतंकी भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि कई बार पाकिस्तान से भेजे गए आतंकवादी और देश के अंदर पनपे आतंकी एक साथ काम करते हैं।

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विपक्ष ने मंत्री के बयान पर पीएम की चुप्पी को बताया ‘मौन समर्थन’
राज्यसभा में विपक्षी सांसदों तिरुचि शिवा (द्रमुक) और संजय सिंह (आम आदमी पार्टी) ने मध्य प्रदेश के मंत्री द्वारा भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर गए बयान पर भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी की आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर चुप रहना उस बयान का अप्रत्यक्ष तरीके से समर्थन करना है। शिवा और संजय सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में कर्नल सोफिया कुरैशी पर मंत्री विजय शाह के बयान को शर्मनाक बताया। शिवा ने कर्नल कुरैशी को 'महान महिला' कहा और पूछा कि उन्हें किस तरह पेश किया गया? उन्होंने कहा कि उन्हें पाकिस्तान के आतंकवादियों की बहन बताया गया।

शिवा ने कहा कि इस बयान की अदालत ने भी निंदा की, लेकिन न प्रधानमंत्री और न ही पार्टी ने कोई विरोध दर्ज कराया। उन्होंने पूछा, क्यों सिर्फ इसलिए कि वह मुस्लिम हैं, उन्हें आतंकवादी की बहन कह दिया गया और आपने कोई नाराजगी नहीं दिखाई? शिवा ने कहा कि वह आज भी मंत्री बने हुए हैं, यानी सरकार इस बयान को सही मानती है। उन्होंने यह भी कहा, हर मुद्दे को सांप्रदायिक मत बनाइए, जो चाहे बोलिए और फिर अपनी मर्जी से उसे सही ठहराइए। चुप्पी कभी-कभी सहमति होती है। सहनशीलता कमजोरी नहीं, बल्कि धैर्य होती है। 

पीएम मोदी ने भारत की भावना के साथ विश्वासघात किया: संजय सिंह
राज्यसभा में 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर विशेष चर्चा के दौरान संजय सिंह ने भाजपा सरकार को जमकर घेरा। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने अमेरिका की मध्यस्थता स्वीकार कर भारत की भावना के साथ विश्वासघात किया है। सीजफायर की घोषणा भारत की धरती से नहीं, बल्कि अमेरिका की धरती से राष्ट्रपति ट्रंप ने की। इससे पहले 8 मई को जब भारतीय सेना लड़ रही थी, तब भारत सरकार आईएसआई प्रमुख आसीम मलिक से बात कर रही थी। आज भारत सरकार कह रही है कि पाकिस्तान गिड़गिड़ाया और हम मान गए, लेकिन हमारी बहनों के गिड़गिड़ाने पर आतंकवादी तो नहीं माने, तो फिर सरकार कैसे मान गई? उन्होंने स्पष्ट किया कि जब भी देश पर संकट होगा, हम सरकार के साथ खड़े रहेंगे, लेकिन लोगों को बांटना, गद्दार कहकर अपमानित करना बंद करें।
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शहीद का दर्जा दिया जाए: संजय सिंह
संजय सिंह ने कहा कि सर्वदलीय बैठक में हमें सरकार द्वारा बताया गया था कि बैसरन घाटी में सिर्फ अमरनाथ यात्रा के दौरान ही लोग आते हैं। यह तो पता नहीं किस गलती से होटल वालों के साथ मिलकर बैसरन घाटी को खोल दिया गया। केंद्रीय गृहमंत्री और रक्षा मंत्री की मौजूदगी में सरकार के जिम्मेदार मंत्री विपक्ष के नेताओं को गलत जानकारी दे रहे हैं। बाद में पता चला कि बैसरन घाटी हमेशा खुली रहती है। लेकिन वहां सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे। लोग चीखते-चिल्लाते रहे। मदद मांगते रहे। लेकिन उनकी मदद करने वाला कोई नहीं था। मैं बैसरन में जान गंवाने वाले शुभम द्विवेदी के घर कानपुर गया था। उनकी पत्नी का बुरा हाल था। उनके पिता रोकर एक ही बात कही कि हमारे बेटे ने देश के लिए शहादत दी है, जो लोग इसमें मारे गए हैं, उनको कम से कम शहीद का दर्जा दिया जाए। 

'प्रधानमंत्री को इस चर्चा का महत्व नजर नहीं आता'
संजय सिंह ने कहा कि यहां चर्चा हो रही थी कि प्रधानमंत्री कहां हैं, वह सदन में क्यों नहीं आए? प्रधानमंत्री अवतार हैं, इंसान नहीं हैं। वह अदृश्य रहकर भी कहीं पर प्रकट हो सकते हैं, उनको शारीरिक रूप से कहीं आना नहीं होता है। वह नॉन बायलोजिकल हैं। इतने गंभीर विषय पर दोनों सदनों में चर्चा हो रही है, लेकिन 18 घंटे काम करने वाले प्रधानमंत्री दो घंटे भी किसी सदन में उपस्थित नहीं रहे। प्रधानमंत्री को इस चर्चा का महत्व नजर नहीं आता है। 

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