लोकसभा चुनाव से पहले राज्यसभा उपसभापति का चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमितशाह की जोड़ी के खिलाफ विपक्षी एकता का सबसे बड़े टेस्ट के रूप में देखा जा रहा है। इस पद के लिए एनडीए से जेडीयू के हरिवंश नारायण सिंह, वहीं, विपक्ष की ओेर से कांग्रेस के बीके हरिप्रसाद मैदान में हैं।
राज्यसभा में सत्ताधारी एनडीए बहुमत के आंकड़े से दूर है जबकि विपक्ष के सभी दलों को मिलाकर बहुमत के लिए पर्याप्त सीटें मौजूद हैं। अब अगर कांग्रेस प्रत्याशी बीके हरिप्रसाद किसी भी कारणवश यह चुनाव हार जाते हैं तो पीएम मोदी के खिलाफ बनी कथित विपक्षी एकता की पोल खुल जाएगी और लोकसभा चुनाव में इस एकता का क्या हश्र होने जा रहा है यह भी पता चल जाएगा।
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बता दें कि हाल ही में सेवानिवृत्त हुए उपसभापति पी जे कुरियन का कार्यकाल पिछले महीने यानी जुलाई में समाप्त हो गया था। 245 सदस्यीय राज्यसभा में इस समय 244 सदस्य हैं जबकि 1 सीट खाली है। मौजूदा 244 सदस्यीय उच्च सदन में उपसभापति चुनाव को जीतने के लिए 123 मतों की जरूरत होगी। ऐसे में एनडीए और यूपीए दोनों पक्ष बहुमत के आंकड़े से दूर हैं।
सत्ताधारी एनडीए के राज्यसभा में 100 सांसद हैं। इनमें बीजेपी के 73 , शिवसेना के 3, बोडो पीपुल्स फ्रंट के पास 1, जेडीयू के 6, आरपीआई (ए) के 1, शिरोमणि अकाली दल के 3, सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट के 1, नामांकित सदस्य 4, 3 अन्य और निर्दलीय 6 सदस्य शामिल हैं।
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विपक्ष के सभी दलों की संख्या को देखते हैं तो ये आंकड़ा 144 पहुंचता है। इनमें कांग्रेस के 50, बीएसपी के 4, टीएमसी के 13, सीपीआई के 2, सीपीएम के 5, डीएमके के 4, इंडियन मुस्लिम लीग के 1, जेडीएस के 1, केरल कांग्रेस के 1, एनसीपी के 4, आरजेडी के 5, एसपी के 13, टीडीपी के 6, एआईएडीएमके के 13, बीजू जनता दल के 9, इंडियन नेशनल लोकदल के 1, पीडीपी के 2, टीआरएस के 6, वाईएसआर कांग्रेस के 2 और आम आदमी पार्टी के 3 सदस्य शामिल हैं।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि कांग्रेस ने बीके हरिप्रसाद को मैदान में उतारकर विपक्ष की एकता का लिटमस टेस्ट कर रहा है। इस चुनाव के बाद ही विपक्ष की तस्वीर साफ हो जाएगी कि कौन-कौन से दल पीएम मोदी के खिलाफ कांग्रेस के साथ खड़े रहते हैं और कौन से नहीं।
चल रही है जोड़तोड़ की राजनीति
चुनाव के मद्देनजर एनडीए और यूपीए दोनों ही पार्टियों में जोड़तोड़ की राजनीति शुरू हो गई है। एनडीए अपना कुनबा संभालने के साथ-साथ विपक्ष के दलों से भी समर्थन जुटाने में लगा है। देखने में आ रहा है कि अभी तक एनडीए से जुड़े सभी सहयोगी दल हरिवंश सिंह के समर्थन में पूरी मुस्तैदी से खड़े हैं यही नहीं राजनीति में गहरी पैठ रखने वालों का मानना है कि एनडीए विपक्ष की एकता में सेंध लगाने में भी कामयाब होता दिख रहा है।
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लेकिन अगर सिर्फ इस चुनाव पर नजर लगाएं तो पाएंगे कि सत्तापक्ष की तुलना में विपक्ष अधिक ताकतकर है, लेकिन जिस तरह से विपक्ष में एकता की कमी देखी जाती रही है यहां भी देखने को मिल रही है। सभी दल कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में खड़े होते नहीं दिख रहे। इसी बीच टीडीपी ने कांग्रेस को समर्थन करने का ऐलान कर दिया है लेकिन केसीआर की पार्टी टीआरएस और नवीन पटनायक की पार्टी बीजेडी ने जिस तरह से ढुलमुल रवैया अपनाए हुए है ऐसे में कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन करना मुश्किल नजर आ रहा है। इसी तरह से एआईएडीएमके भी कांग्रेस के साथ आती दिखाई नहीं दे रही है।
राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के तीन सदस्य हैं लेकिन जिस तरह से केजरीवाल का दोनों ही पार्टियों से छत्तीस का आंकड़ा रहा है ऐसे में आप किस करवट बैठने जा रही है वह तय करना मुश्किल है। पार्टी नेता और राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने कहा कि उपसभापति चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को समर्थन के लिए हमारी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल से बात करनी चाहिए, क्योंकि उन्हें ही इसपर फैसला करना है।
कांग्रेस जुटा रही है समर्थन
हालांकि कांग्रेस ने भी विपक्ष दलों से समर्थन के लिए बातचीत शुरू कर दी है। बीके हरिप्रसाद खुद और कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद से लेकर अशोक गहलोत तक विपक्ष दलों से समर्थन जुटाने में लगे हैं। बावजूद इसके बीजेडी, टीआरएस जैसे दल एनडीए उम्मीदवार के पक्ष में खड़े नजर आ रहे हैं।
विपक्षी दलों में इस तरह सेंध लगती रही तो कांग्रेस के बीके हरिप्रसाद का जीत पाना काफी मुश्किल हो जाएगा। बीके हरिप्रसाद की हार के साथ विपक्षी एकता की जो बात लगातार की जा रही है, उसकी भी पोल खुल जाएगी।