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शीतकालीन सत्र में राज्यसभा ने तोड़ा 13 साल पुराना रिकार्ड, एक सप्ताह में हुआ 90 फीसदी काम

Tue, 26 Nov 2019 05:15 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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राज्य सभा - फोटो : ANI
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शीतकालीन सत्र में राज्यसभा ने पहले सप्ताह के दौरान विधायी काम 90 फीसदी से ज्यादा पूरा करने का रिकार्ड बनाया है। राज्यसभा का 250 वां सत्र है। सोमवार को राज्यसभा सचिवालय से साझा की गई जानकारी के मुताबिक राज्यसभा ने 18 वीं लोकसभा  के पहले शीतकालीन सत्र में 13 सालों बाद लंबी चर्चा का रिकार्ड बनाया है।    

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18 नवंबर से शुरु हुए सदन ने पहले पांच कार्य दिवसों के दौरान उपलब्ध समय 28 घंटे 37 मिनटों में से 25 घंटे 54 मिनट काम किया है। दो घंटे 43 मिनट जबरन स्थगन में निकल गए। सदन ने एक घंटा 6 मिनट अतिरिक्त काम किया। जिसकी वजह से पहले सप्ताह में केवल एक घंटा 43 मिनट का ही नेट लॉस हुए।

राज्यसभा में पिछले 43 सत्रों और 13 सालों के बाद प्रदूषण के मुद्दें पर तीन घंटे तक कांलिंग अटेंशन नोटिस के तहत लंबी चर्चा हुई। सदन में इससे पहले 2006 में कॅालिंग अटेंशन नोटिस पर 1984 सिख दंगों के मसले पर सबसे लंबी चर्चा हुई थी। यह चर्चा चार घंटे तक चली थी।
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इसके अलावा जलियांवाला बाग राष्ट्रीय स्मारक संशोधन विधेयक 2019 को पारित करने के अलावा पहले सप्ताह के दौरान तत्काल सार्वजनिक महत्व के मुद्दों पर कुल 27 तारांकित प्रश्न और 33 शून्यकाल प्रस्तुतियां और 22 विशेष उल्लेख किए गए थे। केवल सोमवार को जबरन स्थगन के कारण राज्यसभा की कार्यवाही बाधित हुई है।  मंगलवार को सदन के संयुक्त सत्र के बाद ट्रांसजेंडर अधिकार और संरक्षण विधेयक  2019 पर चर्चा होगी।   

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बात करें राज्यसभा की कार्यप्रणाली की तो 1952 में राज्यसभा के गठन के बाद से अब तक इस सदन ने 107 संविधान संशोधन बिल पारित किए हैं। जिनमें से अब तक केवल को एक लोकसभा द्वारा नकार दिया गया था। जबकि चार को भंग कर दिया गया था।

इस विवरण की विस्तृत व्याख्या राज्यसभा प्रकाशन द्वारा जारी किए राज्य सभा द जर्नी फ्राम 1951 में की गई है। इसमें सभी संशोधनों को संकलित किया गया है।  यह जानकारी राज्यसभा सचिवालय ने एक बयान में जारी की है।  इतना ही नहीं राज्यसभा 102 संविधान संशोधनों को स्वीकार करने में साक्षी रहा है। जबकि लोकसभा में 106 संविधान संशोधन बिल पारित हुए हैं।  

इसमें सबसे अहम 1951 में हुआ पहला संशोधन था।  इसमें बदलाव केतहत राज्य को सामाजिक और आथक रूप से पिछड़े वर्गों या अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की उन्नति के लिए सकारात्मक कार्रवाई करने के  लिए किया गया था।  

ताजा 103 वां संशोधन आथक रूप से निर्धन लोगों को 10 फीसदी आरक्षण का था।  जिसमें उन्हें शिक्षा और नियुक्ति में छूट का प्रावधान था। संविधान में इन 103 संशोधनों  में से राष्ट्रीय न्यायिक आयोग की स्थापना के लिए किए गए 99 वें संशोधन को सुप्रीमकोर्ट द्वारा असंवैधानिक  करार दे दिया गया था।    
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