बात करें राज्यसभा की कार्यप्रणाली की तो 1952 में राज्यसभा के गठन के बाद से अब तक इस सदन ने 107 संविधान संशोधन बिल पारित किए हैं। जिनमें से अब तक केवल को एक लोकसभा द्वारा नकार दिया गया था। जबकि चार को भंग कर दिया गया था।
इस विवरण की विस्तृत व्याख्या राज्यसभा प्रकाशन द्वारा जारी किए राज्य सभा द जर्नी फ्राम 1951 में की गई है। इसमें सभी संशोधनों को संकलित किया गया है। यह जानकारी राज्यसभा सचिवालय ने एक बयान में जारी की है। इतना ही नहीं राज्यसभा 102 संविधान संशोधनों को स्वीकार करने में साक्षी रहा है। जबकि लोकसभा में 106 संविधान संशोधन बिल पारित हुए हैं।
इसमें सबसे अहम 1951 में हुआ पहला संशोधन था। इसमें बदलाव केतहत राज्य को सामाजिक और आथक रूप से पिछड़े वर्गों या अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की उन्नति के लिए सकारात्मक कार्रवाई करने के लिए किया गया था।
ताजा 103 वां संशोधन आथक रूप से निर्धन लोगों को 10 फीसदी आरक्षण का था। जिसमें उन्हें शिक्षा और नियुक्ति में छूट का प्रावधान था। संविधान में इन 103 संशोधनों में से राष्ट्रीय न्यायिक आयोग की स्थापना के लिए किए गए 99 वें संशोधन को सुप्रीमकोर्ट द्वारा असंवैधानिक करार दे दिया गया था।