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'पेट्रोल-डीजल को लेकर घबराएं नहीं': होर्मुज संकट के बीच बढ़ते दामों पर राजनाथ सिंह बोले- ईंधन-खाद की कमी नहीं

Thu, 28 May 2026 03:46 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Petrol-Diesel Availability India: पश्चिम एशिया संकट के बीच केंद्र सरकार ने देशवासियों से पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की घबराहट में खरीदारी नहीं करने की अपील की है। सरकार ने कहा कि देश में सभी जरूरी वस्तुओं और खाद की पर्याप्त उपलब्धता बनी हुई है। सार्वजनिक तेल कंपनियां रोज 550 करोड़ रुपये का नुकसान उठाकर आम लोगों को राहत दे रही हैं। आइए, विस्तार से जानते हैं, राजनाथ सिंह ने और क्या-क्या कहा....
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राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर वैश्विक चिंता के बीच केंद्र सरकार ने देशवासियों से अफरातफरी में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की खरीदारी नहीं करने की अपील की है। सरकार ने साफ कहा है कि देश में ईंधन, खाद और दूसरी जरूरी वस्तुओं की पर्याप्त उपलब्धता बनी हुई है और सप्लाई चेन पूरी तरह सामान्य है। केंद्र ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और किसी भी तरह की कमी नहीं आने दी जाएगी। पश्चिम एशिया संकट और होर्मुज क्षेत्र में तनाव बढ़ने के बाद देश में ईंधन को लेकर आशंकाएं तेज हो गई थीं।

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आखिर केंद्र सरकार ने समीक्षा बैठक में क्या फैसला लिया?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में पश्चिम एशिया पर गठित अनौपचारिक मंत्रिस्तरीय समूह की छठी बैठक हुई। बैठक में पेट्रोलियम, खाद, बिजली, रेलवे और खाद्य मंत्रालय समेत कई अहम विभागों के मंत्री शामिल हुए। इस दौरान देश में ईंधन, खाद और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता की समीक्षा की गई। बैठक के बाद राजनाथ सिंह ने कहा कि देश में सभी जरूरी वस्तुओं की सप्लाई सामान्य है और सरकार हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।

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क्या तेल कंपनियां जनता को राहत देने के लिए नुकसान उठा रही हैं?
सरकार ने बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी कीमतों का पूरा बोझ आम लोगों पर नहीं डाल रही हैं। सरकारी तेल कंपनियां वर्तमान में रोज करीब 550 करोड़ रुपये का नुकसान सह रही हैं ताकि आम उपभोक्ताओं को राहत मिल सके। सरकार के मुताबिक यह राहत खास तौर पर घरेलू उपभोक्ताओं, किसानों और आम वाहन चालकों को ध्यान में रखकर दी जा रही है। हालांकि कुछ औद्योगिक उपभोक्ताओं द्वारा खुदरा ईंधन का गलत इस्तेमाल करने और कालाबाजारी की शिकायतें भी सामने आई हैं।

क्या सरकार ने कालाबाजारी और जमाखोरी पर सख्ती दिखाई?
बैठक में सरकार ने यह भी माना कि कुछ जगहों पर डीलरों और बड़े खरीदारों द्वारा नियमों का गलत फायदा उठाने की कोशिश हो रही है। कई औद्योगिक उपभोक्ता कम कीमत का फायदा लेने के लिए खुदरा पंपों से ज्यादा खरीदारी कर रहे हैं। सरकार ने इसे गंभीर मामला मानते हुए राज्यों और एजेंसियों को निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। कालाबाजारी, अवैध भंडारण और गलत तरीके से ईंधन खरीदने वालों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने की बात कही गई है।

खरीफ सीजन से पहले खाद को लेकर क्या तैयारी है?
सरकार ने खरीफ फसलों की बुवाई से पहले खाद की उपलब्धता की भी समीक्षा की। बैठक में बताया गया कि 2026 खरीफ सीजन के लिए देश को करीब 390.54 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की जरूरत होगी। फिलहाल करीब 200.47 लाख मीट्रिक टन खाद उपलब्ध है, जो कुल जरूरत का आधे से ज्यादा हिस्सा है। इसके अलावा आयात और घरेलू उत्पादन के जरिए भी उर्वरक की आपूर्ति लगातार बढ़ाई जा रही है। मई और जून के दौरान बड़ी मात्रा में डीएपी और एनपीके खाद भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की उम्मीद है।
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पश्चिम एशिया संकट का भारत पर कितना असर पड़ सकता है?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है और पश्चिम एशिया उसके लिए बेहद अहम क्षेत्र है। ऐसे में वहां किसी भी तरह का युद्ध या संकट तेल कीमतों और सप्लाई पर असर डाल सकता है। हालांकि केंद्र सरकार फिलहाल यह भरोसा दिलाने की कोशिश कर रही है कि देश में घबराने जैसी कोई स्थिति नहीं है। सरकार का कहना है कि भारत के पास पर्याप्त भंडार, मजबूत रिफाइनिंग क्षमता और सप्लाई प्रबंधन व्यवस्था मौजूद है। इसी वजह से नागरिकों से अफवाहों पर ध्यान न देने और सामान्य तरीके से खरीदारी जारी रखने की अपील की गई है।

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