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आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम: आयात प्रतिबंधित हथियारों की तीसरी सूची जारी, राजनाथ सिंह बोले- भारतीय हथियार उद्योग को प्रोत्साहन मिलेगा

Thu, 07 Apr 2022 04:58 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

राजनाथ सिंह ने कहा कि इसमें सेंसर, हथियार और गोला-बारूद, नौसैनिक उपयोगिता हेलीकॉप्टर, गश्ती जहाज, जहाज-रोधी मिसाइल और विकिरण-रोधी मिसाइलों सहित प्रमुख उपकरण और प्रणालियां शामिल हैं।
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केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह - फोटो : ANI
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विस्तार
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को 101 से अधिक सैन्य प्रणालियों और हथियारों की तीसरी सूची जारी की। इस सूची में मौजूद सैन्य प्रणालियों और हथियारों के आयात पर अगले पांच साल तक प्रतिबंध रहेगा। इस दौरान इन्हें स्वदेशी तौर पर विकसित किया जाएगा ताकि भारतीय हथियार उद्योग को प्रोत्साहन मिले।

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एक कार्यक्रम में सूची जारी करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि इसमें सेंसर, हथियार और गोला-बारूद, नौसैनिक उपयोगिता हेलीकॉप्टर, गश्ती जहाज, जहाज-रोधी मिसाइल और विकिरण-रोधी मिसाइलों सहित प्रमुख उपकरण और प्रणालियां शामिल हैं। उन्होंने कहा कि आज 101 रक्षा उपकरणों और प्रणालियों की तीसरी सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची राष्ट्र को जारी करते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है। इस सूची के जारी होने से रक्षा क्षेत्र में हमारी आत्मनिर्भरता की तेज गति का पता चलता है।

इससे पहले पहली सकारात्मक स्वदेशीकरकण सूची को अगस्त 2020 में जारी किया गया था, जिसमें 155 एमएम/39 सीएएल अल्ट्रा-लाइट होवित्जर, हल्के लड़ाकू विमान (एलसीडब्ल्यू) एमके-आईए-उन्नत स्वदेशी सामग्री, पारंपरिक पनडुब्बी और संचार उपग्रह जीसैट-7सी शामिल हैं।
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पिछले साल मई में सरकार ने अतिरिक्त 108 सैन्य हथियारों और प्रणालियों जैसे- अगली पीढ़ी के युद्धपोत, एयरबोर्न अर्ली वार्निंग सिस्टम, टैंक इंजन और राडार के आयात पर प्रतिबंधों को मंजूरी दी थी, जो साढ़े चार साल की समय सीमा के तहत थे। सिंह ने कहा कि हमारे दो महत्वपूर्ण उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और सैन्य उपकरणों के निर्यात को बढ़ावा देना है। इस सूची के जारी होने से सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की भागीदारी से स्वदेशीकरण को बढ़ावा मिलेगा और हम इन दोनों लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेंगे।

रक्षा मंत्री ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता का मतलब दुनिया के बाकी हिस्सों से अलग-थलग होकर काम करना नहीं है। सिंह ने कहा कि इसका मतलब है अपने देश में उनकी (विदेशी फर्मों) सक्रिय भागीदारी और समर्थन के साथ काम करना। पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई उपाय किए हैं। भारत अपनी उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर पड़ोसियों से कठिन चुनौतियों का सामना कर रहा है। वह विश्व स्तर पर हथियारों के सबसे बड़े आयातकों में से एक है।

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