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Rajkot Court: सरकार के खिलाफ जिहादी साजिश करने वाले आरोपी जेल में लेंगे आखिरी सांस, ATS ने किया था गिरफ्तार

Wed, 01 Oct 2025 03:51 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद

सार

राजकोट सत्र अदालत ने सरकार के खिलाफ साजिश और जिहादी प्रोपेगेंडा फैलाने के दोष में पश्चिम बंगाल के तीन युवकों को उम्रकैद की सजा सुनाई। गुजरात एटीएस ने जुलाई 2023 में इनकी गिरफ्तारी की थी।
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अदालत ने सुनाया फैसला। - फोटो : ANI
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विस्तार
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राजकोट की एक अदालत ने तीन युवकों को 'जिंदगी की आखिरी सांस तक' जेल में रहने की सजा सुनाई है। उन पर सरकार के खिलाफ साजिश रचने और जिहादी प्रोपेगेंडा फैलाकर युवाओं को भड़काने का आरोप साबित हुआ। अदालत ने तीनों पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आई.बी. पठान ने पश्चिम बंगाल के रहने वाले अमन सिराज मलिक (23), अब्दुल शाकुर अली शेख (20) और शफनवाज अबु शाहिद (23) को दोषी करार दिया। जिला सरकारी वकील एस.के. वोरा ने बताया कि तीनों को उम्रकैद और आर्थिक दंड दिया गया है।

गुजरात एटीएस ने दो साल पहले किया था गिरफ्तार
गुजरात एटीएस ने जुलाई 2023 में इन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। एटीएस को सूचना मिली थी कि ये लोग राजकोट के सोनी बाजार स्थित एक आभूषण इकाई में काम करते थे और वहीं से स्थानीय मस्जिद से जिहादी प्रोपेगेंडा फैला रहे थे। आरोप है कि ये लोग बांग्लादेशी हैंडलर के लिए काम कर रहे थे, जिसका मकसद युवाओं को अल-कायदा जैसे आतंकी संगठन के लिए भड़काना और भर्ती करना था।
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गिरफ्तारी और बरामदगी
सूचना के आधार पर एटीएस ने दो आरोपियों को राजकोट रेलवे स्टेशन से और एक आरोपी को एक रिहायशी इमारत से पकड़ा। तलाशी के दौरान उनके पास से देसी सेमी-ऑटोमैटिक पिस्तौल, कारतूस, कट्टरपंथी साहित्य, वीडियो और अन्य सामग्री बरामद की गई।

इस मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल
एटीएस के अनुसार, आरोपी बांग्लादेश स्थित अपने हैंडलर से एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स जैसे टेलीग्राम और व्हाट्सएप पर संपर्क में रहते थे। जांच में खुलासा हुआ कि उनका हैंडलर अल-कायदा इन बांग्लादेश का प्रमुख था, जिसने मलिक को 'जिहाद' और 'हिजरत' के नाम पर अन्य लोगों को भी कट्टरपंथी बनाने को प्रेरित किया।

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सबूत और गवाहियों का जिक्र
अदालत में पेश सबूतों में आरोपियों के मोबाइल फोन से मिले व्हाट्सएप चैट भी शामिल थे, जिनसे पता चला कि वे मुस्लिम समुदाय के कुछ युवाओं को भड़काने में लगे थे। वकील वोरा ने अदालत को बताया कि बरामद रिवॉल्वर और कारतूस भी उनके आपराधिक इरादों को दर्शाते हैं। हालांकि, बचाव पक्ष के गवाहों ने कहा कि आरोपियों को मस्जिद में केवल नमाज पढ़ते देखा गया था, लेकिन क्रॉस-एग्जामिनेशन में उन्होंने माना कि वे मस्जिद में केवल 15-20 मिनट रहते थे और बाकी समय की गतिविधियों की जानकारी नहीं थी।

अदालत की सख्त टिप्पणी
सरकारी वकील ने अदालत से कहा कि अगर इन आरोपियों को उम्रकैद से कम सजा दी जाती तो रिहाई के बाद ये आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल किए जा सकते थे। उन्होंने यह भी बताया कि ये आरोपी पश्चिम बंगाल से राजकोट तक सिर्फ सरकार विरोधी और कश्मीर मुद्दे पर कट्टरपंथी प्रचार करने आए थे। अदालत ने इन तर्कों को मानते हुए तीनों को उम्रकैद की सजा सुना दी।


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