राहुल गांधी की ओर से शुरू की गई राजीव गांधी खेल अभियान (आरजीकेए) योजना से उनके पिता के नाम को खेल मंत्रालय ने हटा दिया है। सिर्फ यही योजना नहीं यूपीए सरकार के समय में मंत्रालय की ओर से शुरू की गई तीन योजनाओं का विलय कर गुजरात मॉडल की तर्ज पर खेलो इंडिया नाम की योजना को शुरू किया जा रहा है।
मंत्रालय की कोशिश है कि इस योजना का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों कराया जाए। खेलो इंडिया को बाकायदा इस साल के बजट में जगह दी है। इसके लिए फिल्हाल 140 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। खेल मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि इन स्कीमों के विलय का राजनीति से कुछ लेना देना नहीं है, यह प्रतिस्पर्धात्मक माहौल बनाने के लिए उठाया गया कदम है।
राहुल गांधी ने 21 फरवरी 2014 को मैरी कॉम, करणम मल्लेश्वरी, गोपीचंद, रोंजन सोढी, आशीष कुमार, विजेंदर कुमार, अश्वनी नचप्पा जैसे खिलाड़ियों की मौजूदगी में नौ हजार करोड़ रुपये की राजीव गांधी खेल अभियान योजना को शुरू किया था। उस दौरान खेल मंत्री राहुल गांधी के खास कहे जाने वाले जितेंद्र सिंह थे। इस योजना को मणिशंकर अय्यर के दिमाग की उपज पाइका स्कीम को खत्म कर शुरू किया गया था।
हालांकि पाइका को किसी नेता के नाम से नहीं जोड़ा गया था। एनडीए सरकार आने के बाद आरजीकेए पर ज्यादा कोई काम नहीं हुआ। इस बार के आम बजट में इस योजना समेत यूपीए के समय में शुरू की गई अरबन स्पोर्ट्स इन्फ्रास्ट्रक्चर स्कीम, नेशनल स्पोर्ट्स टैलेंट सर्च स्कीम का विलय कर खेलों इंडिया को शुरू करने की घोषणा की गई है।