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Twitter: ट्विटर पर दुष्प्रचार हुआ बंद, मंत्री बोले- अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर दुरुपयोग किया जा रहा था

Sat, 10 Dec 2022 07:04 PM IST
Jeet Kumar पीटीआई, नई दिल्ली

सार

राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि खुलासे से इस बात के सबूत मिलते हैं कि इस सोशल मीडिया मंच का दुरुपयोग किया जा रहा था और यह अलग-अलग लोगों के खिलाफ भेदभावपूर्ण तरीके से काम कर रहा था।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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हम सभी जानते हैं कि सोशल मीडिया का कुछ लोग अपना एजेंडा चलाने और फेक खबरों को चलाने के लिए करते हैं। हालांकि सरकार इस पर कड़ा एक्शन लेती है। लेकिन इस पर पूरी तरह से लगाम नहीं लगी है। इसको लेकर ट्विटर की कार्यशैली पर भी सवाल उठे थे। वहीं इस मामले पर इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने शुक्रवार को कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर ट्विटर द्वारा दुष्प्रचार करना अब बंद हो गया है और यह भारत में पूरी तरह से अस्वीकार्य है। 

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अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर दुष्प्रचार करना अब बंद 
उन्होंने कहा कि ‘ट्विटर फाइल्स’ के खुलासे से इस बात के सबूत मिलते हैं कि इस सोशल मीडिया मंच का दुरुपयोग किया जा रहा था और यह अलग-अलग लोगों के खिलाफ भेदभावपूर्ण तरीके से काम कर रहा था। इससे पता चलता है कि मंच न केवल सामग्री को इधर-उधर करने में बल्कि बातचीत को एक रूप देने में भी शामिल था। अब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर दुष्प्रचार करना बंद हो गया है।

भारत सरकार करेगी कार्रवाई
वहीं चंद्रशेखर ने कहा कि ‘ट्विटर फाइल्स’ नामक रिपोर्ट से पता चलता है कि ट्विटर के कर्मचारियों की टीम ‘काली सूची’ तैयार करती थी, नापसंद किए गए ट्वीट्स को ‘ट्रेंड’ होने से से रोकती थी। और ये सभी चीजें गोपनीय रूप से बिना उपयोगकर्ताओं को बताए की जाती थी। बता दें कि इस खुलासे को ट्विटर के नए मालिक एलन मस्क ने सोशल मीडिया पर साझा किया है। मंत्री ने कहा कि इन खुलासों के बाद हम देखेंगे कि क्या कदम उठाने की जरूरत है।
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 केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने दी जानकारी
वहीं, लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने अश्लील वेबसाइटों पर लगाए गए बैन, कारण और उद्देश्यों के साथ ही उल्लंघन करने पर सजा की जानकारी दी। इसके साथ ही उन्होंने साइबर अपराधों से निपटने के लिए सरकार द्वारा की जा रही कार्रवाई के बारे में भी जानकारी दी। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (आईटी अधिनियम) में अश्लील सामाग्री के प्रकाशन या प्रसारण करने वाले पर धारा 67ए और 67बी के तहत दंडित करने का प्रावधान किया गया है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000  में दोषी को 3 से 5 साल तक की कारावास की सजा देने का उल्लेख है।
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