राहुल-पायलट की मुलाकात के बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत से फोन पर बात की। माना जा रहा है इस दौरान उन्होंने विवाद के समाधान का रास्ता निकालने को कहा। इस बीच, पायलट खेमे के बागी विधायक राजस्थान लौटने लगे हैं। सोमवार को पार्टी से निलंबित विधायक भंवरलाल शर्मा जयपुर में गहलोत से मिले। वहीं, मंगलवार को पायलट सहित बाकी विधायक भी लौट सकते हैं।
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ऐसे खुली सुलह की राह
गहलोत के खिलाफ खुली बगावत के चलते पायलट और बागी विधायकों की वापसी की राह आसान नहीं थी। पायलट से मुलाकात के दौरान वरिष्ठ नेताओं ने स्पष्ट किया था कि बिना शर्त माफी मांगने पर ही उन्हें शीर्ष नेतृत्व से मिलाया जाएगा। राहुल से बैठक के दौरान पायलट खेमे को स्पष्ट कहा गया कि अगर विधानसभा सत्र के दौरान बहुमत परीक्षण की स्थिति बनी तो सभी विधायकों को सरकार के समर्थन में वोट देना होगा।
दरअसल, विधायकों की खरीद-फरोख्त के मामले में एसओजी ने अंतिम रिपोर्ट सौंपी, जिसमें राष्ट्रद्रोह की धारा हटा दी गई। पायलट इसी मामले में नोटिस मिलने से नाराज हुए थे। इस बीच, गहलोत ने विधायक दल की बैठक में संकेत दिए थे कि अगर आलाकमान बागी विधायकों को माफ करता है तो उन्हें फैसला मंजूर होगा।
पायलट ने कहा कि आज से डेढ़ साल पहले हम जीतकर आए तब कांग्रेस अध्यक्ष ने मुझे डिप्टी सीएम पद की जिम्मेदारी दी। इस डेढ़ साल का जो अनुभव रहा उसे मैं आलाकमान के सामने रखना चाहता था और मैंने सारी बातें बताई हैं। मैंने कभी ऐसी भाषा, भावना या आचरण नहीं किया जो किसी के योग्य न हो। हम कांग्रेस से जीतकर आए हैं।
हमने जनता से जो वादे किए हैं उन्हें पूरा करना जरूरी है। जिन लोगों की मेहनत से सरकार बनी उनकी सरकार में भागीदारी होनी चाहिए। पार्टी ने हमारी बात सुनी और एक समिति बनाई, जो समयबद्ध तरीके से इन सब बातों का अच्छा निराकरण करेगी।
मैं शुरू से कह रहा हूं कि ये बातें सिद्धांत पर आधारित थीं। मुझे हमेशा लगा कि पार्टी के हित में इन चीजों को उठाना जरूरी है। प्रियंका जी ने हमारी और विधायकों की बातों को खुले मन से सुना है। इसके लिए उनका शुक्रिया।