के भरतपुर जिले का कामां पंचायत। यहां न तो लड़कियां डॉक्टरी की पढ़ाई करती हैं न ही इंजीनियरिंग की। ग्रेजुएशन और बीएड की पढ़ाई हाल फिलहाल में कुछ लड़कियों ने जरूर शुरू की है। लेकिन शहनाज ने कामां में एक नया कीर्तिमान रच दिया है। वो कामां पंचायत की पहली
सरपंच बनी हैं। शहनाज सिर्फ 24 साल की हैं और एमबीबीएस की पढ़ाई का चौथा साल है।
इसी महीने की 30 तारीख से शहनाज को गुरुग्राम के सिविल अस्पताल में अपनी इंटरशिप शुरू करनी है। वो आगे पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई भी करनी चाहती थीं। लेकिन डॉक्टर बनने से पहले शहनाज सरपंच बन गईं। शहनाज राजनीति में उतरना चाहती थीं, लेकिन इतनी जल्दी भी नहीं।
अपने इस फैसले के बारे में बीबीसी से बातचीत करते हुए शहनाज ने बताया, "पिछले छह महीने में मेरी जिंदगी अचानक बदल गई। मुझसे पहले मेरे दादाजी भी यहां से सरपंच थे। लेकिन पिछले साल अक्टूबर में कोर्ट ने वो चुनाव खारिज कर दिया था। उसके बाद से ही चुनाव में घर से कौन खड़ा होगा, इसकी चर्चा शुरू हुई।"
राजस्थान में सरपंच का चुनाव लड़ने के लिए दसवीं पास होना अनिवार्य है। शहनाज के दादाजी पर सरपंच के चुनाव में फर्जी शैक्षणिक योग्यता का सर्टिफिकेट देने का आरोप था, जिसके बाद कामां का सरपंच चुनाव रद्द कर दिया गया था।
शहनाज का पूरा परिवार राजनीति में ही है। उनके दादा 55 साल तक सरपंच रहे। पिता गांव के प्रधान रहे हैं। मां राजस्थान से विधायक, मंत्री और संसदीय सचिव रही हैं। शहनाज के सरपंच बनने के बाद वो परिवार की चौथी पीढ़ी हैं, जो राजनीति में जा रही हैं।
अपने फैसले के बारे में वो आगे कहती हैं, "पिताजी अगले साल प्रधान का चुनाव लड़ने वाले हैं। मां इस साल के अंत में होने वाले विधायक के चुनाव की तैयारी में जुटी हैं। इसलिए परिवार की राजनीति की इस विरासत को मैंने खुद ही आगे बढ़ाने का जिम्मा उठाया।"