फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

Rajasthan Congress Crisis: शांति कुमार धारीवाल ने बताया सच, बोले- गहलोत के खिलाफ षडयंत्र में ये लोग हैं शामिल

राहुल संपाल
Updated Tue, 27 Sep 2022 11:18 PM IST

सार

Rajasthan Congress Crisis: गहलोत खेमे वाले नेता पायलट के मुख्यमंत्री बनने की राह में रोड़ा बन रहे हैं। साथ ही, कांग्रेस आलाकमान द्वारा जयपुर भेजे गए पर्यवेक्षकों को भी सीधे चुनौती देते दिखाई दे रहे हैं। इस मामले में राज्य सरकार के मंत्री शांति कुमार धारीवाल ने पूरे मामले के लिए माकन को जिम्मेदार ठहराया है...
विज्ञापन
विज्ञापन
Rajasthan Congress Crisis: Shanti Kumar Dhariwal - फोटो : ANI

राजस्थान में नए मुख्यमंत्री को लेकर चल रही कवायद हर दिन उलझती हुई नजर आ रही है। अशोक गहलोत की जगह मुख्यमंत्री पद के लिए सचिन पायलट का नाम आते ही गहलोत के करीबी विधायकों ने बगावती रुख अपना लिया है। कांग्रेस हाईकमान का संदेश लेकर जयपुर गए पर्यवेक्षक अजय माकन ने इसे अनुशासनहीनता करार दिया है। वहीं गहलोत खेमे से फ्रंटफुट पर खड़े नेता पायलट के मुख्यमंत्री बनने की राह में ही रोड़ा बन रहे हैं। जबकि कांग्रेस आलाकमान द्वारा जयपुर भेजे गए पर्यवेक्षकों को भी सीधे चुनौती देते दिखाई दे रहे हैं। इस मामले में राज्य सरकार के मंत्री शांति कुमार धारीवाल ने पूरे मामले के लिए माकन को जिम्मेदार ठहराया है।

पार्टी आलाकमान को चुनौती देने वालों में शांति कुमार धारीवाल का नाम चर्चा में है। धारीवाल कांग्रेस के दिग्गज नेता और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के समर्थक माने जाते हैं। धारीवाल की सियासी अहमियत का पता इस बात से चलता है कि गहलोत ने अपनी तीनों ही सरकार में उन्हें जगह दी और मंत्रिमंडल में नंबर दो की हैसियत में रखा। साल 2020 में सचिन पायलट गुट की बगावत के समय भी शांति कुमार धारीवाल गहलोत के लिए संकटमोचक साबित हुए थे। राजस्थान के ताजा घटनाक्रम पर अमर उजाला डिजिटल ने शांति कुमार धारीवाल से विस्तार से चर्चा की।

सवालः राजस्थान के नए मुख्यमंत्री चयन के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक अजय माकन और मल्लिकाअर्जुन खड़गे की विधायकों के साथ बैठक करने से पहले आपने सरकारी आवास पर बैठक क्यों की? क्या आपने ने ही सभी विधायकों को फोन कर अपने घर बुलाया था?

जवाब: देखिए...मेरे पास संसदीय कार्य मंत्री की जिम्मेदारी भी है। इसी लिहाज से सभी पार्टी विधायक अपनी निजी राय रखने मेरे निवास आए थे। अब पर्यवेक्षकों से मिलने के पहले सभी विधायक घर आ गए तो मैं क्या करुं। सभी विधायक ने घर आने से पहले ये बोला कि धारीवाल साहब हम आपके घर आ रहे है। कुछ बातें हमारी भी सुनी जाएं।

सवालः आपके निवास पर विधायकों की कितनी देर बैठक हुई? वे क्या बोल रहे थे?

जवाबः घर पर कोई बैठक नहीं थी। सभी विधायक फोन कर घर आ रहे थे। मैंने करीब तीन घंटे तक एक-एक विधायक की बातें सुनीं। सभी विधायकों ने अपना रोष व्यक्त किया। सभी चाहते थे कि, सीएम किसी को बनाना है तो 102 विधायक में से किसी को भी बनाओ। इनमें से जिसे कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया कहेंगी वही सीएम बनेगा। उनका हुक्म बहाल रहेगा। कोई नेता सोनिया जी के हुक्म को चैलेंज नहीं कर सकता। लेकिन गद्दारी करने वाले को पुरस्कार मिले, यह राजस्थान के विधायक कभी स्वीकार नहीं करेंगे।

सवालः आप सभी लोग विधायक दल की बैठक में नहीं जाकर विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी के निवास क्यों पहुंच गए।

जवाबः देखिए...सभी विधायक जब मेरे घर जुटे तो उन्होंने खुद होकर ये फैसला लिया कि अगर दिल्ली के पर्यवेक्षक हमारी बात नहीं सुनेंगे तो हम क्या करेंगे। फिर इस्तीफा ही दें देंगे।

सवालः तो इस तरह से सामूहिक इस्तीफे का फैसला आखिर क्यों?

जवाबः सभी विधायकों का कहना है कि उन लोगों को पुरस्कृत किया जाएगा, जिन लोगों ने कांग्रेस की पीठ में छुरा घोंपा था, और सरकार को गिराने की कोशिश की।

विज्ञापन

Rajasthan Congress Crisis: Shanti Kumar Dhariwal - फोटो : ANI
राजस्थान में नए मुख्यमंत्री को लेकर चल रही कवायद हर दिन उलझती हुई नजर आ रही है। अशोक गहलोत की जगह मुख्यमंत्री पद के लिए सचिन पायलट का नाम आते ही गहलोत के करीबी विधायकों ने बगावती रुख अपना लिया है। कांग्रेस हाईकमान का संदेश लेकर जयपुर गए पर्यवेक्षक अजय माकन ने इसे अनुशासनहीनता करार दिया है। वहीं गहलोत खेमे से फ्रंटफुट पर खड़े नेता पायलट के मुख्यमंत्री बनने की राह में ही रोड़ा बन रहे हैं। जबकि कांग्रेस आलाकमान द्वारा जयपुर भेजे गए पर्यवेक्षकों को भी सीधे चुनौती देते दिखाई दे रहे हैं। इस मामले में राज्य सरकार के मंत्री शांति कुमार धारीवाल ने पूरे मामले के लिए माकन को जिम्मेदार ठहराया है।

पार्टी आलाकमान को चुनौती देने वालों में शांति कुमार धारीवाल का नाम चर्चा में है। धारीवाल कांग्रेस के दिग्गज नेता और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के समर्थक माने जाते हैं। धारीवाल की सियासी अहमियत का पता इस बात से चलता है कि गहलोत ने अपनी तीनों ही सरकार में उन्हें जगह दी और मंत्रिमंडल में नंबर दो की हैसियत में रखा। साल 2020 में सचिन पायलट गुट की बगावत के समय भी शांति कुमार धारीवाल गहलोत के लिए संकटमोचक साबित हुए थे। राजस्थान के ताजा घटनाक्रम पर अमर उजाला डिजिटल ने शांति कुमार धारीवाल से विस्तार से चर्चा की।

सवालः राजस्थान के नए मुख्यमंत्री चयन के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक अजय माकन और मल्लिकाअर्जुन खड़गे की विधायकों के साथ बैठक करने से पहले आपने सरकारी आवास पर बैठक क्यों की? क्या आपने ने ही सभी विधायकों को फोन कर अपने घर बुलाया था?

जवाब: देखिए...मेरे पास संसदीय कार्य मंत्री की जिम्मेदारी भी है। इसी लिहाज से सभी पार्टी विधायक अपनी निजी राय रखने मेरे निवास आए थे। अब पर्यवेक्षकों से मिलने के पहले सभी विधायक घर आ गए तो मैं क्या करुं। सभी विधायक ने घर आने से पहले ये बोला कि धारीवाल साहब हम आपके घर आ रहे है। कुछ बातें हमारी भी सुनी जाएं।

सवालः आपके निवास पर विधायकों की कितनी देर बैठक हुई? वे क्या बोल रहे थे?

जवाबः घर पर कोई बैठक नहीं थी। सभी विधायक फोन कर घर आ रहे थे। मैंने करीब तीन घंटे तक एक-एक विधायक की बातें सुनीं। सभी विधायकों ने अपना रोष व्यक्त किया। सभी चाहते थे कि, सीएम किसी को बनाना है तो 102 विधायक में से किसी को भी बनाओ। इनमें से जिसे कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया कहेंगी वही सीएम बनेगा। उनका हुक्म बहाल रहेगा। कोई नेता सोनिया जी के हुक्म को चैलेंज नहीं कर सकता। लेकिन गद्दारी करने वाले को पुरस्कार मिले, यह राजस्थान के विधायक कभी स्वीकार नहीं करेंगे।

सवालः आप सभी लोग विधायक दल की बैठक में नहीं जाकर विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी के निवास क्यों पहुंच गए।

जवाबः देखिए...सभी विधायक जब मेरे घर जुटे तो उन्होंने खुद होकर ये फैसला लिया कि अगर दिल्ली के पर्यवेक्षक हमारी बात नहीं सुनेंगे तो हम क्या करेंगे। फिर इस्तीफा ही दें देंगे।

सवालः तो इस तरह से सामूहिक इस्तीफे का फैसला आखिर क्यों?

जवाबः सभी विधायकों का कहना है कि उन लोगों को पुरस्कृत किया जाएगा, जिन लोगों ने कांग्रेस की पीठ में छुरा घोंपा था, और सरकार को गिराने की कोशिश की।

सवालः तो क्या विधायकों को मंजूर नहीं है कि गहलोत के बजाए कोई ओर सीएम बने।

जवाबः जिन लोगों ने सरकार को गिराने की कोशिश की। उन्हें सीएम की जिम्मेदारी मिले। यह किसी भी विधायक को मंजूर नहीं था। इसलिए सभी स्पीकर सीपी जोशी जी के यहां इस्तीफा देने चले गए।

सवालः चलिए.. एक तरफ यह घटनाक्रम हुआ। लेकिन आप सभी विधायकों की ही तो राय सुनने के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक जयपुर आए थे। यह बात वहां भी कर सकते थे?

जवाबः देखिए...वे बात नहीं आए थे। वे तो महज एक प्रस्ताव पास कराने आए थे। जो केवल एक औपचारिकता मात्र थी।

सवालः यह कैसे पता कि वो प्रस्ताव ही पास कराने आए थे। कुछ दूसरी बात और चर्चाएं भी हो सकती थीं।

कड़क आवाज में जवाब देते हुए, इस मीटिंग से पहले प्रदेश अध्यक्ष डोटासरा ने बताया कि एक लाइन का प्रस्ताव पास कराने का हुक्म हुआ है। मतलब साफ था कि पर्यवेक्षक हम सभी विधायकों से बात नहीं चाहते थे। वे एक रुटीन प्रस्ताव पास कराने चाहते थे कि सबकुछ हाईकमान पर ही छोड़ा जाता है।

सवालः ...तो क्या इस प्रस्ताव की बात सुनकर ही विधायक के तेवर बदल गए।

जवाबः जैसे ही यह बात सभी विधायकों को लगी तो उन्होंने दो टूक कहा कि, अगर हमारी बात नहीं सुनी जा रही है तो हम इस्तीफा दे देंगे।

सवालः आप सभी ने अपने इस्तीफे दे दिए, क्या ये स्वीकार होंगे या आगे क्या होगा?

जवाबः अब वरिष्ठ नेता अजय माकन तो कह रहे हैं कि हम सभी लोग अनुशासनहीन हैं। अब इससे तो आगे यह नजर आ रहा है कि उनका विचार कुछ और ही है। इस्तीफा स्पीकर साहब को दे दिया। अब वे विचार करेंगे।

सवालः क्या आपको नहीं लगता कि अगर आप लोग केंद्रीय पर्यवेक्षक से मिल लेते तो मामला इतना बढ़ता ही नहीं। सब कुछ पार्टी के फोरम पर ही निपट जाता।

जवाबः हम लोग एक बार नहीं दो बार पर्यवेक्षक से मिले हैं। उन्होंने मुलाकात के दौरान यहीं कहा था, एक लाइन का प्रस्ताव पास करना है। इसी बात पर कोई भी विधायक तैयार नहीं था।

सवालः वरिष्ठ नेता अजय माकन इस घटनाक्रम और विधायकों की बैठक करने को अनुशासनहीनता करार दे रहे है? क्या सोचना है?

जवाबः इसमें सोचने जैसा कुछ नहीं है। 50 वर्ष से राजनीति कर रहा हूं। इतने वर्षों में कभी अनुशासन नहीं तोड़ा और न अब तोड़ेंगे। आज तक हमने हाईकमान की सभी बात मानी। लेकिन हमें भी अपनी बात कहने का अधिकार है।

सवालः क्या अशोक गहलोत को हटाने के लिए कोई षडयंत्र चल रहा है? इसमें आपके मुताबिक कौन-कौन शामिल है?

जवाबः बिल्कुल सौ फीसदी षड्यंत्र चल रहा था। इसमें अजय माकन शामिल थे। मल्लिकार्जुन खड़गे साहब पर कोई आरोप नहीं है। वे बहुत ईमानदार और निष्पक्ष आदमी हैं।

सवालः इन गंभीर आरोप पर हाईकमान आपको तलब करेगा, तब आप क्या कहेंगे?

जवाबः मैं यह आरोप बहुत सोच समझकर लगा रहा हूं। मेरे पास पूरे सबूत हैं। अगर हाईकमान बुलाएंगा तो पूरे साक्ष्य उनके सामने रखूंगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next